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एक ब्रह्मोस मिसाइल कितने में बिकती है? इंडोनेशिया से डील क्यों अहम है

एक ब्रह्मोस मिसाइल की कीमत 30-40 करोड़ रुपये है. इंडोनेशिया के साथ यह सौदा रक्षा निर्यात बढ़ाने, समुद्री चोक पॉइंट्स को सुरक्षित करने और दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए जरूरी है.

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भारत अपनी ब्रह्मोस मिसाइल इंडोनेशिया को देने की तैयारी में है. इससे चीन का प्रभाव कम होगा. (Photo: WIKI)
भारत अपनी ब्रह्मोस मिसाइल इंडोनेशिया को देने की तैयारी में है. इससे चीन का प्रभाव कम होगा. (Photo: WIKI)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (BrahMos Supersonic Cruise Missile) सौदे को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है. यह समझौता न केवल भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के लिए मील का पत्थर है, बल्कि दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर क्षेत्र में भू-राजनीतिक संतुलन को बदलने की क्षमता रखता है.

सैन्य रक्षा विशेषज्ञों और रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, एक ब्रह्मोस मिसाइल की अनुमानित लागत लगभग $3.5 मिलियन (करीब 29 से 30 करोड़ रुपये) होती है. हालांकि, इसके एडवांस और अधिक दूरी तक मार करने वाले वैरिएंट, जैसे ब्रह्मोस-ER (Extended Range), की प्रति यूनिट कीमत लगभग $4.85 मिलियन (करीब 40 करोड़ रुपये) तक जाती है.   

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जब कोई देश किसी अन्य देश से मिसाइल प्रणाली खरीदता है, तो कुल सौदे में केवल मिसाइल ही शामिल नहीं होती. इसमें मोबाइल ऑटोनॉमस लॉन्चर्स, रडार सिस्टम, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, ऑपरेटरों की ट्रेनिंग, मेंटेनेंस और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट भी शामिल होता है.

BrahMos missile cost India Indonesia defence deal

इंडोनेशिया के साथ होने वाला यह रक्षा सौदा लगभग $200 मिलियन से $450 मिलियन के बीच आंका जा रहा है, जिसमें भारत मिसाइलों के साथ पूरा तट की सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी सिस्टम प्रदान करेगा.

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इंडोनेशिया के साथ यह सौदा क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस मिसाइल का यह समझौता केवल एक व्यापारिक डील नहीं है, बल्कि इसके गहरे रणनीतिक और कूटनीतिक मायने हैं...

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चीन के प्रभुत्व पर अंकुश और समुद्री सुरक्षा: इंडोनेशिया एक विशाल द्वीप समूह है, जिसके पास दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री मार्ग हैं. मलक्का, सुंडा, लोंबोक और मकासर जैसे समुद्री चोक पॉइंट्स इंडोनेशिया के अधिकार क्षेत्र में आते हैं. इन क्षेत्रों में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता और 'नाइन-डैश लाइन' के दावों के बीच, ब्रह्मोस मिसाइल की तैनाती से इंडोनेशिया को मजबूत समुद्री प्रतिरोध मिलेगा. 

दक्षिण-पूर्व एशिया में 'ब्रह्मोस बेल्ट' का निर्माण: फिलीपिंस के बाद इंडोनेशिया भारत से ब्रह्मोस खरीदने वाला दूसरा आसियान (ASEAN) देश बनने जा रहा है. इसके अलावा वियतनाम, मलेशिया और थाईलैंड जैसे देश भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं. यदि ये सौदे पूरे होते हैं, तो चीन के 'बैकयार्ड' (दक्षिण चीन सागर) में भारत समर्थित एक 'मजबूत मिसाइल सुरक्षा कवच' या 'डिटेरेंस आर्क' तैयार हो जाएगा, जो किसी भी शत्रु देश के युद्धपोतों को आगे बढ़ने से रोकने की क्षमता रखेगा.

BrahMos missile cost India Indonesia defence deal

रक्षा निर्यातक के रूप में भारत का उदय: भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹38,424 करोड़ का रिकॉर्ड रक्षा निर्यात दर्ज किया है. ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक तकनीक का निर्यात भारत को दुनिया के हथियार बाजार में एक 'विश्वसनीय और गैर-पश्चिमी' विकल्प के रूप में स्थापित करता है. यह 'मेक इन इंडिया' और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर प्रमाणित करता है.

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गुटनिरपेक्षता और रणनीतिक स्वायत्तता: दक्षिण-पूर्व एशियाई देश अमेरिका या चीन के बीच किसी एक सैन्य गुट में शामिल होने से बचते रहे हैं. भारत के साथ रक्षा सहयोग उन्हें अपनी स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी बनाए रखने और बिना किसी अमेरिकी गठबंधन का हिस्सा बने अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने का एक बेहतरीन विकल्प देता है.

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