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तरीके नए, चाल पुरानी... अपने फायदे के लिए अटैक को कैसे वाजिब ठहराता है अमेरिका?

अमेरिका के इतिहास में कई विदेशी हमले और हस्तक्षेप प्राकृतिक संसाधनों (तेल, खनिज, फल) के लिए हुए. वेनेजुएला (2026) पर हमला ताजा उदाहरण है, जहां मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका तेल नियंत्रण चाहता है. ईरान, इराक, ग्वाटेमाला, मेक्सिको, ताइवान और पाकिस्तान जैसे मामलों में भी यही वजह है. अमेरिका जमीन से निकलने वाले प्राकृतिक संसाधनों की कॉलोनी बनाना चाहता है.

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अमेरिका अपने हमलों और हस्तक्षेप को अपने फायदे के लिए कई तरह से वाजिब ठहराता है. (Photo: ITG)
अमेरिका अपने हमलों और हस्तक्षेप को अपने फायदे के लिए कई तरह से वाजिब ठहराता है. (Photo: ITG)

अमेरिका की इतिहास में कई बार विदेशी देशों पर हमले या हस्तक्षेप हुए हैं. इनमें से कई का मुख्य कारण प्राकृतिक संसाधन जैसे तेल, खनिज, फल या अन्य संपदा को हासिल करना रहा है. अमेरिका के आलोचक इसे नियो-कॉलोनियलिज्म कहते हैं, जहां अमेरिका सीधे शासन न करके आर्थिक नियंत्रण से फायदा उठाता है. हाल ही में वेनेजुएला पर हमला इसका ताजा उदाहरण है. ये हमला प्राकृतिक संसाधनों की कॉलोनी (Natural Land Resources Colony- NLRC) बनाने का प्रयासों में से एक है.

अमेरिकी हस्तक्षेप का ऐतिहासिक संदर्भ: 19वीं और 20वीं सदी

अमेरिका का विस्तार शुरू से ही संसाधनों पर केंद्रित रहा. 19वीं सदी में मैनिफेस्ट डेस्टिनी के नाम पर अमेरिका ने उत्तर अमेरिका में भूमि हासिल की. उदाहरण...

मैक्सिकन-अमेरिकी युद्ध (1846-1848): अमेरिका ने मैक्सिको पर हमला किया. कैलिफोर्निया समेत विशाल क्षेत्र जीत लिया. इससे अमेरिका को सोना, तेल और कृषि भूमि मिली.

स्पेनिश-अमेरिकी युद्ध (1898): अमेरिका ने स्पेन से लड़कर प्यूर्टो रिको, गुआम और फिलीपींस पर कब्जा किया. क्यूबा पर भी नियंत्रण (प्लाट संशोधन). इसका उद्देश्य नौसेना अड्डे और आर्थिक अवसर थे.

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बनाना युद्ध (1800 के अंत से 1934): कैरिबियन और मध्य अमेरिका (होंडुरास, निकारागुआ, हैती, डोमिनिकन रिपब्लिक) में अमेरिका ने कई सैन्य कार्रवाई की. वजह थी यूनाइटेड फ्रूट कंपनी जैसी अमेरिकी कंपनियों के हितों की रक्षा, जो केला, चीनी और तंबाकू का कारोबार करती थीं. इन देशों को बनाना रिपब्लिक कहा गया, जहां अमेरिका ने संसाधनों का शोषण किया.

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हवाई द्वीपों का अधिग्रहण (1893-1898):  मेरिकी गन्ना किसानों ने रानी लिलिउओकलानी को उखाड़ फेंका. अमेरिका ने द्वीपों को जोड़ लिया. इससे अमेरिका को बंदरगाह और संपदा मिली.

ग्वानो द्वीप अधिनियम (1856): अमेरिका ने प्रशांत महासागर के छोटे द्वीप (जैसे वेक और मिडवे) हासिल किए, ताकि ग्वानो (उर्वरक) प्राप्त हो.

ये कार्रवाई अमेरिका को संसाधन और बाजार देती थीं, लेकिन प्रभावित देशों में इसे उपनिवेशवाद माना गया.

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शीत युद्ध और उसके बाद: तेल और अन्य संसाधनों के लिए हस्तक्षेप

शीत युद्ध में अमेरिका ने तेल जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों के लिए कई देशों में दखल दिया. उदाहरण...

ईरान (1953): अमेरिका और ब्रिटेन ने प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसद्देक को उखाड़ फेंका, क्योंकि उन्होंने ब्रिटिश तेल कंपनी का राष्ट्रीयकरण किया. शाह को सत्ता दी गई, ताकि पश्चिमी देश ईरान के तेल पर नियंत्रण रखें.

ग्वाटेमाला (1954): सीआईए ने राष्ट्रपति जैकोबो अर्बेंज को हटाया, क्योंकि उनकी भूमि सुधार नीति यूनाइटेड फ्रूट कंपनी के हितों को नुकसान पहुंचा रही थी.

इराक (1991 और 2003): 1991 में इराक के कुवैत पर हमले के बाद अमेरिका ने युद्ध किया, मुख्य रूप से तेल आपूर्ति की रक्षा के लिए. 2003 में इराक पर आक्रमण (विनाशकारी हथियारों के बहाने) किया गया, लेकिन आलोचक कहते हैं कि इराकी तेल क्षेत्रों पर नियंत्रण मुख्य वजह थी. अमेरिका ने इराकी अर्थव्यवस्था को निजीकरण कर विदेशी कंपनियों को 100% मालिकाना हक दिया.

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कार्टर डॉक्टरिन (1980): अमेरिका ने घोषणा की कि फारस की खाड़ी के तेल हितों की रक्षा के लिए सैन्य बल इस्तेमाल करेगा. अमेरिकी नौसेना आज भी तेल जहाजों की सुरक्षा करती है.

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पनामा (1903): अमेरिका ने कोलंबिया से अलग होकर पनामा को स्वतंत्र बनवाया, ताकि पनामा नहर पर नियंत्रण हो. यह व्यापार और संसाधनों के लिए था.

पश्चिम अफ्रीका: 2008 में अमेरिका ने अफ्रीकॉम (अफ्रीकी कमांड) बनाया, ताकि नाइजीरिया और अंगोला जैसे तेल उत्पादक देशों में स्थिरता बनी रहे और समुद्री रास्ते सुरक्षित हों.

ये हस्तक्षेप संसाधनों की सुरक्षा से जुड़े थे, लेकिन प्रभावित देशों में अमेरिका को साम्राज्यवादी कहा गया.

आधुनिक रणनीति: महत्वपूर्ण खनिज और हरित ऊर्जा

आजकल अमेरिका तेल के अलावा लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों जैसे खनिजों पर फोकस कर रहा है, जो तकनीक और हरित ऊर्जा के लिए जरूरी हैं. मिनरल्स सिक्योरिटी पार्टनरशिप जैसे कार्यक्रमों से अमेरिका सहयोगी देशों से आपूर्ति सुनिश्चित करता है. चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों पर निर्भरता कम करता है.

  • ग्रैंड एरिया कॉन्सेप्ट (1940): द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने सोवियत संघ के बाहर सभी तेल क्षेत्रों पर नियंत्रण की योजना बनाई.
  • रूजवेल्ट कोरॉलरी (1904): अमेरिका ने खुद को पश्चिमी गोलार्ध का अंतरराष्ट्रीय पुलिस घोषित किया, ताकि व्यापारिक हितों की रक्षा हो.

वर्तमान घटनाएं (2026 तक): वेनेजुएला और अन्य

जनवरी 2026 में अमेरिका की कार्रवाई ने फिर सवाल उठाए...

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बोलिविया में अमेरिका के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग. (Photo: Reuters)

वेनेजुएला (2026): 3 जनवरी को ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व में अमेरिका ने हमला किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अस्थायी रूप से वेनेजुएला चलाएगा. अमेरिकी तेल कंपनियां वहां की तेल संरचना सुधारेंगी तथा तेल बेचेंगी. वेनेजुएला के अधिकारियों ने इसे 'कॉलोनी बनाने की कोशिश' बताया, क्योंकि देश में दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार हैं, साथ ही सोना और तांबा.

ग्रीनलैंड (2025): अमेरिका ने ग्रीनलैंड खरीदने की बात फिर शुरू की. ट्रंप ने इसे सुरक्षा के लिए जरूरी बताया. वजह है रणनीतिक स्थान और संसाधन. अमेरिकी सदन में खरीद के लिए विधेयक पेश हुआ.

बोलिविया: 2025-2026 में केंद्र-दक्षिणपंथी सरकार ने रूस से करार तोड़कर अमेरिका से लिथियम सौदे की कोशिश की. अमेरिका इसे 'दुनिया के लिए खोलना' कहता है.

मैक्सिको: ऊर्जा पर विवाद. ट्रंप प्रशासन मैक्सिकन बाजारों तक पहुंच चाहता है. इतिहास में मैक्सिकन युद्ध से अमेरिका ने बड़ी भूमि ली.

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ताइवान: अमेरिका सैन्य मदद देता है, ताकि सेमीकंडक्टर उद्योग सुरक्षित रहे. द्वितीय विश्व युद्ध में आक्रमण की योजना थी, लेकिन नहीं हुआ.

पाकिस्तान: यहां 6-8 ट्रिलियन डॉलर के खनिज हैं, जैसे तांबा, सोना, कोयला. रेको डिक प्रोजेक्ट बड़ा है. अमेरिका निवेश चाहता है, लेकिन स्थानीय विरोध है. 

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प्रभावित देशों के नेता और विश्लेषक कहते हैं कि अमेरिका संसाधन-समृद्ध देशों को कॉलोनी बनाना चाहता है. सीधे शासन न करके आर्थिक दबाव से नियंत्रण रखता है. वेनेजुएला जैसे मामलों में मादुरो ने इसे कॉलोनियल युद्ध कहा.

अमेरिका का कहना है कि ये कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता के लिए हैं. लेकिन इतिहास दिखाता है कि संसाधन मुख्य वजह रहे हैं. 2026 में वेनेजुएला की घटना से बहस तेज हो गई है कि क्या अमेरिका पुरानी नीतियां दोहरा रहा है? 

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