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चेन्नई से आगरा तक 2 हजार किलोमीटर का सफर... ऐसे खुला तमिलनाडु एक्सप्रेस में मिले लाल सूटकेस का खूनी राज!

तमिलनाडु एक्सप्रेस के जनरल डिब्बे में मिले लावारिस लाल सूटकेस का राज खुला तो 38 साल की हयात उन निशा की हत्या का मामला सामने आ गया. इस खौफनाक कत्ल की साजिश को हयात के प्रेमी और उसकी लिवइन पार्टनर ने रचा था. पढ़ें ये खौफनाक कहानी.

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इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG)
इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG)

तमिलनाडु एक्सप्रेस के जनरल डिब्बे में रखा एक लाल रंग का सूटकेस शायद आम यात्रियों के लिए महज एक लावारिस सामान था, लेकिन इसी सूटकेस ने एक ऐसी खौफनाक कहानी का खुलासा किया, जिसे सुनकर हर कोई दहल उठा. ट्रेन चेन्नई से दिल्ली के जाने के लिए रवाना हुई थी और जब ये ट्रेन करीब 2 हजार किलोमीटर का सफर करने के बाद आगरा पहुंची तो इस सूटकेस के अंदर का बंद राज खुल गया. जब सूटकेस खोला गया तो खूनी सच सामने आ गया. उसमें एक महिला के लाश के टुकड़े थे. यहीं से शुरू होती है ये कहानी.

तमिलनाडु एक्सप्रेस 3 अगस्त को चेन्नई सेंट्रल से नई दिल्ली के लिए रवाना हुई थी. दो दिन बाद यानी 5 अगस्त को उसे आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर पहुंचना था. इसी बीच तमिलनाडु एक्सप्रेस तय वक्त पर ग्वालियर पहुंची और जैसे ही ट्रेन वहां से चली तो एक मुसाफ़िर ने स्टाफ को शिकायत करते हुए बताया कि ट्रेन के पिछले हिस्से के जनरल कंपार्टमेंट में लाल रंग का एक ट्रॉली बैग लावारिस हालत में पड़ा है. उसके आसपास से बदबू आ रही है. 

जैसे ही ग्वालियर जीआरपी यानि गवर्मेंट रेलवे पुलिस को ये खबर मिली, तो फ़ौरन आगरा कंट्रोल रूम को इस बात की खबर दी गई. क्योंकि ट्रेन का अगला स्टॉपेज आगरा था. ग्वालियर से आगरा तक की दूरी एक घंटे में तय की जानी थी.

5 अगस्त की सुबह 5 बजे तमिलनाडु एक्सप्रेस ट्रेन आगरा कैंट के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर पहुंची. जहां आगरा जीआरपी की टीम पूरी तैयारी के साथ तमिलनाडु एक्सप्रेस का इंतज़ार कर रही थी. सूचना के आधार पर अब रेलवे पुलिस की टीम उसी जनरल कंपार्टमेंट में दाखिल हुई. ख़बर सही निकली. कंपार्टमेंट के पिछले हिस्से में एक लाल रंग का ट्रॉली बैग रखा था. बैग के नीचे से शायद ख़ून रिस रहा था. रेलवे पुलिस ने ट्रॉली बैग को ख़ोलने का फैसला किया. फिर जैसे ही बैग खोला गया अंदर से वही बाहर आया, जिसका डर था. ट्रॉली बैग में एक लाश के टुकड़े थे.

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लाश का चेहरा गायब था क्योंकि बैग में सिर था ही नहीं. अब बिना चेहरे वाली लाश के टुकड़े की शिनाख्त कैसे हो. फिर अब तक ये भी पता नहीं ता कि लाश वाला ये बैग ट्रेन में आया कहां से. इसे किस स्टेशन पर रखा गया. लेकिन तभी रेलवे पुलिस की नज़र उस रैपर पर पड़ी जिसमें लाश के टुकड़े लपेटे गए थे. उस रैपर पर चेन्नई के किसी प्रोडक्ट का लोगो लगा हुआ था.

अब इस सनसनीखेज मामले की तफ्तीश शुरु हुई. दो चीजें ये इशारा कर रहीं थी कि इस लाश का कोई ना कोई कनेक्शन चेन्नई से हो सकता है. पहली, जिस रैपर में लाश लिपटी थी उस पर चेन्नई का लोगो और दूसरी तमिलनाडू एक्सप्रेस चेन्नई से ही चलती है. आगरा पुलिस ने अब फौरन चेन्नई की जीआरपी से संपर्क साधा. ट्रेन नंबर 12621 तमिलनाडू एक्सप्रेस तीन अगस्त की रात 10 बजे चेन्नई रेलवे स्टेशन से नई दिल्ली के लिए रवाना हुई थी. 

अब सबसे पहले पुलिस ने 3 अगस्त की रात चेन्नई रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4 के सीसीटीवी फुटेज को खंगालना शुरु किया. ये देखने के लिेए कि जनरल अपार्टमेंट में लाल रंग की ट्रॉली बैग के साथ कौन मुसाफिर सवार हुआ. चेन्नई स्टेशन से ही सवार हुआ या फिर किसी और स्टेशन से. इधर इसी बीच चेन्नई के अलावा ग्वालियर और ग्वालियर से पहले के स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज को भी पुलिस खंगालने में जुट चुकी थी.

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पर कामयाबी चेन्नई रेलवे स्टेशन से ही मिली. तीन अगस्त की रात तमिलनाडू एक्सप्रेस जिस प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर खड़ी थी उस प्लेटफॉर्म पर दो लोग बिल्कुल वैसा ही ट्रॉली बैग लिए दिखाई देते हैं. इनमें से एक महिला थी और दूसरा पुरुष. हालाकि ये दोनों ट्रेन में सवार नहीं हुए यानि बैग ट्रेन के जनरल कंपार्टमेंट में रखने के बाद दोनों वापस चले गए. जब चेन्नई स्टेशन के बाकी सीसीटीवी कैमरों को खंगाला गया तो पता चला कि ये दोनों गुडुवांचेरी से आने वाली एक ट्रेन से चेन्नई स्टेशन पहुंचे थे. 

अब पुलिस के पास कातिल के तौर पर दो चेहरे थे. कैमरे में कैद यही दो चेहरे. लेकिन ये कौन थे? इनका नाम क्या है? कहां रहते हैं? इसकी कोई जानकारी नहीं थी. पर चूंकि दोनों चेन्नई रेलवे स्टेशन पर दिखे तो पुलिस अंदाजा लगा रही थी कि ये चेन्नई में ही कहीं मिलेंगे. अब दोनों की तलाश शुरु होती है. वक्त बीतता जाता है. पर पुलिस ना उन दोनों को ढूंढ पाती है और ना ही ये पता लगा पाती है कि बैग में मिली लाश आखिर किसकी थी. हालांकि कोशिश जारी थी. 

पूरे 19 दिन बाद आखिरकार पुलिस को पहली कामयाबी हाथ लगी. कैमरे में कैद दोनों आरोपियों का पता मिल जाता है. पता चलता है कि ये दोनों चेन्नई के गुडुवांचेरी के एक घर में रहते हैं. पुलिस की टीम फ़ौरन उस घर पर दबिश डालती है. वो दोनों तो वहां नहीं मिलते लेकिन घर के अंदर पुलिस को जो कुछ मिलता है, उसे देखकर खुद पुलिस सिहर उठती है. 

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असल में पुलिस जब उस घर में पहुंची तो आसपास भीड़़ इकट्ठी हो चुकी थी, जो जानना चाहती थी कि अंदर पुलिस क्यों है?  और उधर घर के अंदर मौजूद पुलिस घर का कोना-कोना तलाश रही थी. घर के बेड, फ्रिज, अलमारी जब सबकी तलाशी ले ली फिर भी कुछ नहीं मिला तब पुलिस किचन में दाखिल होती है. किचन में एक बड़ा सा बर्तन कहें, पतीला कहें या देग कहें रखा हुआ था. अब पुलिस ने जैसे ही उस बर्तन का ढकक्न हटाया खुद पुलिस सकते में आ गई. उस बर्तन के अंदर इंसानी सिर और लाश के कुछ टुकड़े थे.

अब पुलिस की टीम उस बर्तन को लेकर घर के बाहर आई. तब तक बर्तन मे इंसानी सिर और लाश के टुकड़े पड़े होने की खबर इलाके में फैल चुकी थी. इसके साथ ही आनन फानन में ये अफवाह उड़ गई कि इस बर्तन में इंसानी मांस को पकाया गया है. हालांकि बाद में खुद चेन्नई पुलिस ने इसे महज एक अफवाह बताया. वो घर जहां ये बर्तन मिला, वो मनिकउद्दीन लस्कर नाम के शख्स का था. जहां वो भगवती माझी नाम की महिला के साथ लिव-इन में रहता था. 

पुलिस ने जब आस पड़ोस में लोगों से मनिकउद्दीन के बारे में पूछताछ की तो पता चला कि पिछले 20 दिनों से वो घर नहीं आया है. साथ ही भगवती भी तभी से गायब है. जब पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे में कैद तस्वीरें पड़ोसियों को दिखाई तो उन्होने फ़ौरन पहचान लिया कि ये मनिकउद्दीन और भगवती ही है. इसी दौरान पड़ोसियों ने ये बताया कि करीब महीने भर पहले उसी घर में एक और महिला किराए पर रहने आई थी. उसका नाम हयात उन निशा था. वो भी पिछले 20 दिनों से गायब है. ऐसे में सवाल उठना लाजमि था कि क्या ट्रॉली बैग में मिली लाश हयात उन निशा की थी?

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अब पुलिस गुडुवांचेरी में तफ्तीश आगे बढ़ा ही रही थी कि तभी लोकल पुलिस से जानकारी मिली कि हयात उन निशा की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में लिखाने एक लड़का आया था. पुलिस ने जब वो रिपोर्ट पढ़ी तो पता चला कि रिपोर्ट लिखाने वाला 17 साल का एक लड़का है और हयात उन निशा उसकी मां है. अब पुलिस ने हयात उन निशा के बेटे से पूछताछ की तो आधी कहानी सामने आ गई. 

वो आधी कहानी ये थी कि हयात उन निशा उड़ीसा के जगतसिंहपुर की रहने वाली थी. चेन्नई में एक कंपनी में नौकरी करती थी. बेटा साथ रहा करता था. लेकिन फिर हयात उन निशा मनिकउद्दीन के करीब आ गई. बेटे को ये बात पसंद नहीं आई. अब वो मां से अलग रहने लगा. और मां मनिकउद्दीन के साथ उसी के घर में किराएदार के तौर पर रहने लगी. हालांकि मनिकउद्दीन पहले से ही भगवती के साथ लिव-इन में रह रहा था. पर अब हयात के साथ भी उसके रिश्ते बन चुके थे.

अब चेन्नई पुलिस की एक टीम फौरन उड़ीसा के लिए रवाना होती है. जगतसिंहपुर जाने के बाद ये साबित हो जाता है कि आगरा रेलवे स्टेशन पर बैग में जो लाश मिली थी, वो हयात उन निशा की ही थी. गुडुवांचेरी के जिस घर में बर्तन में इंसानी सिर मिला उससे ये भी साबित हुआ कि हयातुन निशा का कत्ल उसी घर मे किया गया था. कत्ल के बाद बैग में आधी अधूरी लाश डालकर मनिकउद्दीन और भगवती चेन्नई रेलवे स्टेशन पहुंचे और फिर तमिलनाडू एक्सप्रेस ट्रेन के जनरल कंपार्टमेंट में बैग रखकर वहां से निकल गए. फिलहाल वो दोनों ही फरार हैं. पुलिस उन्हें पकड़ने के लिए एक साथ कई जगहों पर दबिश डाल रही है.

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अब जब तक मनिकउद्दीन और भगवती गिरफ्त में नहीं आ जाते तब तक कहानी का क्लाइमेक्स अधूरा ही रहेगा. क्लाइमेक्स ये कि आखिर हयात का कत्ल क्यों हुआ. चेन्नई से आगरा तक के इस सफर की असलियत क्या थी? इसी असलियत का पता लगाने चेन्नई पुलिस चेन्नई से 2000 किमी दूर मणिपुर पहुंची. मणिपुर में जीरीबाम में मनिकुद्दीन और भगवती के छुपने की खबर मिली थी. खबर तो पक्की थी. पर दोनों मिल नहीं रहे थे. 

पूरे सात दिन लग गए चेन्नई पुलिस की टीम जीरीबाम के इलाके में भटकती रही. फिर आखिरकार 28 अगस्त को कामयाबी मिली. दोनों उसी जीरीबाम इलाके से पकड़े गए. उन दोनों को मणिपुर की एक कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड लिया गया और फिर उन्हें चेन्नई लाया गया. चेन्नई पुलिस सूत्रों के मुताबिक शुरुआती पूछताछ में दोनों ने जो कहानी सुनाई वो कुछ यूं थी- 

चेन्नई के करीब गुडुवांचेरी के इस घर में दो महीने पहले हयात उन निशा बतौर किराएदार रहने आई थी. उस घर में दो कमरे थे. एक कमरे में मनिकुद्दीन और भगवती रहते थे. दूसरे कमरे में हयात. हयात के पास पिछली नौकरी के करीब 4 लाख रुपये बैंक में मौजूद थे. इसके अलावा उसके पास सोने के कुछ जेवर भी थे. हयात उन निशा की शिनाख्त होने के बाद चेन्नई पुलिस ने जब तफ्तीश की, तो पाया कि उसके बैंक के पैसे और जेवर दोनों गायब हैं. 

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चेन्नई पुलिस सूत्रों के मुताबिक मनिकुद्दीन और भगवती ने उन्हीं पैसों के लिए हयात उन निशा को घर के अंदर ही मार डाला. फिर लाश को ठिकाने लगाने के लिए उसके कई टुकड़े किए. पर टुकड़े किेए जाने के बाद भी लाश एक बैग में नहीं आ रही थी. लिहाजा, आधी लाश बैग में भर कर दोनों ने उसे चेन्नई से नई दिल्ली जाने वाली तामिलनाडु एक्सप्रेस में रख दिया और गायब हो गए.

दोनों की प्लानिंग गजब थी. लेकिन दोनों ये भूल गए कि रेलवे स्टेशन पर जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं. फिर दोनों ने अपने चेहरे भी नहीं छुपाए थे. लिहाजा, कैमरे में कैद हो गए. दोनों ने दूसरी गलती ये की कि लाश को जिस रैपर में लपेटा, उसमें चेन्नई की एक कंपनी का लोगो था. और बस यही दो चीजें आखिरकार उनकी गिरफ्तारी की वजह बन गई और इस तरह चेन्नई टू आगरा के सफर के साथ-साथ ये कहानी भी अपने अंजाम तक जा पहुंची.

(आगरा से अरविंद शर्मा और चेन्नई से प्रमोद माधव का इनपुट)

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