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पुलिस की तेज तफ्तीश, बाइक का '1 नंबर' सुराग... ऐसे हुआ सलीम वास्तिक के हमलावरों का मैनहंट, फ‍िर एनकाउंटर

चर्चित यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर प‍िछले हफ्ते जानलेवा हमला करने वाले आरोप‍ियों तक पहुंचना पुल‍िस के ल‍िए आसान नहीं था. हमलावरों को एनकाउंटर में मार जरूर द‍िया गया है, लेक‍िन सलीम पर हमले से लेकर हमलावरों के एनकाउंटर के बीच बहुत कुछ ऐसा घटा, ज‍िसे गाजियाबाद पुलिस का सबसे बड़ा मैनहंट कहा जा रहा है.

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पुलिस के दोनों आरोपियों तक पहुंचने की कहानी कम दिलचस्प नहीं (फोटो-ITG)
पुलिस के दोनों आरोपियों तक पहुंचने की कहानी कम दिलचस्प नहीं (फोटो-ITG)

Ghaziabad Police Manhunt & Encounter: अपराध की दुन‍िया में एक बात जरूर कही जाती है क‍ि अपराधी क‍ितना भी चालाक हो, वह अपने पीछे कोई न कोई सुराग तो छोड़ ही जाता है. लोनी के रहने वाले चर्च‍ित यूट्यूबर सलीम वास्‍ति‍क पर जानलेवा हमला करने वाले हमलावरों ने भी अपनी पहचान छुपाने के ल‍िए सारा सयानापन लगा ल‍िया था. उन्‍हें ढूंढने के ल‍िए पुल‍िस ने CCTV और अपने सूचना तंत्र के सभी र‍िसोर्स इस्‍तेमाल कर ल‍िए थे. फ‍िर एक ऐसा सुराग हाथ लगा, जो धीरे धीरे अपराध‍ियों की परतें खोलता चला गया. और पुल‍िस उनके करीब पहुंचती चली गई.

गाजियाबाद के लोनी में 27 फरवरी की सुबह व‍िवाद‍ित यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर जानलेवा हमला होने के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी, आरोपियों की पहचान और उनकी ग‍िरफ्तारी. इस बेहद चर्च‍ित कांड में पुलिस की चुनौती इसल‍िए भी बढ़ गई थी, क्‍योंक‍ि बाइक पर आए हमलावरों ने वारदात करते समय अपना हेलमेट उतारा ही नहीं था. उन्‍होंने बाइक की पहचान छुपाने के ल‍िए उसके नंबरों को भी टेप से ढंक द‍िया था.

हमलावरों के मैनहंट की कहानी शुरू करें, इससे पहले ये जान लेते हैं कि आखिर 27 फरवरी को लोनी में क्या हुआ था? इस्‍लाम पर बेबाक और व‍िवाद‍ित बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले यूट्यूबर सलीम वास्तिक लोनी थाना क्षेत्र की अशोक विहार कॉलोनी में मौजूद अपने घर/ऑफिस के सोफे पर लेटे हुए मोबाइल फोन देख रहे थे. तभी हेलमेट पहने दो युवक भीतर दाखिल हुए. सलीम पहले समझ पाते, कुछ ही पल में दृश्‍य बदल गया.

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CCTV फुटेज में द‍िखाई द‍िया क‍ि कुर्ता-पायजामा पहने हमलावरों में से एक ने जेब से पेपर कटर जैसा तेज हथियार निकाला और सलीम पर टूट पड़ा. कुछ ही सेकंड में उस कमरे में चीखें गूंजने लगीं और हर तरफ खून फैल गया. दोनों हमलावरों ने सलीम के पेट और गर्दन पर ताबड़तोड़ वार किए. करीब चार मिनट तक चले इस हमले में सलीम के जिस्म पर 14 गहरे जख्म लगे. बात यहीं खत्म नहीं हुई. हमलावरों ने सलीम का गला काटने की कोशिश भी की. इससे पहले कि लोग वहां जमा होते, दोनों हमलावर मौके से भाग निकले.

सलीम के भाई और पुलिस को खबर की गई. गंभीर जख्‍ती सलीम को अस्पताल ले जाया गया. जहां वो चमत्कारिक रूप से बचा ल‍िए गए. लेक‍िन, इन सबके बीच पुल‍िस ने एक ऐसे ऑपरेशन को अंजाम द‍िया जो कई लेवल पर चला. इस केस को सुलझाने के लिए एसएचओ से लेकर डीसीपी तक सभी मुस्तैदी के साथ जुटे रहे. बहमलावरों की धरपकड़ के लिए 10 टीमें बनाईं गईं. आरोपियों के मूवमेंट का एक संभावित रूट मैप तैयार किया गया. फिर करीब 150 क‍िमी के दायरे में मौजूद CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई. 

सलीम वास्‍त‍िक पर हुआ हमला कई ल‍िहाज से बेहद संवेदनशील था. इसे लेकर सोशल मीड‍िया पर हंगामा चल रहा था. एक धड़ा सलीम की वकालत कर रहा था, तो दूसरा उन्‍हें ही झगड़े की जड़ बता रहा था. लेक‍िन पुल‍िस के ल‍िए चुनौती कानून के राज को स्‍थाप‍ित करने की थी. उसे यह साब‍ित करना था क‍ि व‍िवाद कोई भी हो, कोई भी शख्‍स कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता. ऐसे में जरूरी थी हमलावरों की जल्‍द से जल्‍द ग‍िरफ्तारी. उन हमलावरों की, ज‍िनका चेहरा क‍िसी ने देखा ही नहीं. पुल‍िस के ल‍िए इसल‍िए भी चैलेंज‍िंग था, क्‍योंक‍ि हमले का मोट‍िव मोटे तौर पर क्‍ल‍ियर था. यह कोई न‍िजी रंज‍िश का नतीजा नहीं था. इसल‍िए, हमलावर कोई भी हो सकता था. कहीं का भी हो सकता था.

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27 फरवरी 2026: CCTV से गुत्थी सुलझी, और फ‍िर उलझी भी
 
पुल‍िस टीमों के सामने पहला टास्‍क था आरोपियों की शिनाख्त का. लोनी एसीपी स‍िद्धार्थ गौतम बताते हैं, "घटना के फौरन के बाद पुलिस एक्शन में आ चुकी थी. 10 अलग अलग टीमों का गठन किया गया. सभी टीमों को CCTV खंगालने के ल‍िए इलाके बांट द‍िए गए. मौका-ए-वारदात और वहां तक आने वाले रास्ते पर लगे सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल शुरू हुई. करीब 130 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई. जांच का सारा काम बहुत तेजी से हो रहा था." इलाके के डीसीपी एसएन तिवारी खुद पूरी जांच की निगरानी कर रहे थे.

ACP स‍िद्धार्थ के मुताबिक, कुछ कैमरों की फुटेज में एक संदिग्ध बाइक पर हेलमेट पहने दो लोग दिखाई दिए. सड़क पर लगे फ्रंट कैमरों में बाइक का नंबर नहीं आया. इसलिए पुलिस ने बैकवर्ड ट्रैफिक कैमरों की फुटेज भी खंगाली तो पुलिस को कामयाबी मिल गई. लेक‍िन, ये कामयाबी भी जल्‍द ही गुत्‍थी बन गई. पड़ताल के बाद पुल‍िस को इतना तो अंदाजा हो गया क‍ि बाइक पर सवार दोनों लोग हमलावर ही हैं. लेक‍िन, उन्‍होंने ज‍िस तरह चेहरा छुपाने के ल‍िए अपना हेलमेट नहीं उतारा, उसी तरह बाइक की पहचान छुपाने के ल‍िए नंबर प्‍लेट पर टेप लगाया हुआ था.

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28 फरवरी 2026: बाइक के '1' नंबर ने बताया गुनाहगारों का ठ‍िकाना

असल में हमलावरों ने बाइक की अगली नंबर प्‍लेट को तो पूरी तरह छुपा ल‍िया था, लेक‍िन प‍िछली नंबर प्‍लेट पर चार में से तीन अंकों पर ही टेप लगी थी. चार अंकाें की नंबर प्‍लेट पर स‍िर्फ पहला अंक '1' ही द‍िखाई दे रहा था. नंबर प्‍लेट छुपाने की करतूत ने यह संदेश तो दूर कर द‍िया क‍ि बाइक पर सवार हमलावर ही हैं, लेक‍िन अब पुल‍िस के सामने गुत्‍थी ये थी क‍ि बाइक का नंबर 1000 से 1999 तक कुछ भी हो सकता है. यानी, उसके सामने था 999 वाहन माल‍िकों के बीच हमलावर ढूंढने का चैलेंज. 

पुल‍िस ने RTO ऑफिस से मदद मांगी. उन्‍हें बताया गया क‍ि डार्क ग्रे रंग की TVS Raider बाइक है, ज‍िसका पहला नंबर '1' है. 28 फरवरी की देर शाम आरटीओ दफ्तर ने पुलिस को ऐसे 30 वाहनों की लिस्ट सौंपी, जो बाइक के थे, उनकी सीरीज मेल खा रही थी ओर उनका पहला नंबर भी '1' था. इन 30 वाहनों को खंगालने पर उस बाइक के माल‍िक का नाम पता चल गया, ज‍िसकी पुल‍िस को तलाश थी.

नोएडा-गाज‍ियाबाद सीमा पर मौजूद खोड़ा के रहने वाले संद‍िग्‍ध तक पहुंचने के ल‍िए पुल‍िस ने जाल ब‍िछाया. पुलिस बाइक के मालिक के घर पहुंची तो पता चला क‍ि वो और उसका भाई गायब हैं. दोनों की पहचान जिशाना और गुलफाम के रूप में हुई. सगे भाई. पेशे से कारपेंटर. दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया. पुलिस ने चार से ज्यादा जगहों पर रेड डाली और संदिग्धों के मोबाइल, सोशल मीडिया और रिश्तेदारों की गतिविधियों पर नजर रखी.

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फ‍िर शुरू हुआ CCTV चैलेंज, 150 किमी के दायरे में पहुंची खोजबीन

देखा जाए तो सलीम वास्‍तिक के घर लोनी और हममावरों के ठ‍िकाने खोड़ा के बीच 30 क‍िमी की दूरी है, लेक‍िन हमलावरों को ट्रेस करने के ल‍िए पुलिस को 150 किलोमीटर के दायरे में लगे CCTV कैमरे खंगाल पड़े.  27 फरवरी की सुबह 7 बजकर 54 मिनट पर जीशान और उसका बड़ा भाई गुलफाम सलीम के घर में घुसे और उन पर हमला क‍िया. जांच में पता चला कि बाइक सवार हमलावर वजीराबाद बॉर्डर के रास्ते दिल्ली में दाखिल हुए थे.

यहां से पुलिस ने सड़क किनारे लगे कैमरों की मदद से उनकी लोकेशन ट्रेस करना शुरू क‍िया. फुटेज से पता चला कि दोनों गाजियाबाद-Delhi बॉर्डर के पास खोड़ा के मंगल बाजार इलाके में पहुंचे. वहां अपने कमरे में गए, कपड़े बदले और करीब छह मिनट रुकने के बाद एक बैग लेकर निकल गए.

इसके बाद दोनों गाजियाबाद से होते हुए दिल्ली-मुरादाबाद-लखनऊ हाईवे पर हापुड़ बॉर्डर पार कर ब्रिजघाट पहुंचे. ब्रिजघाट के बाद अमरोहा के गजरौला में संभल रोड पर लगे CCTV कैमरों में भी उनकी बाइक दिखी दी. रास्ते में वे हसनपुर में भी 5 से 10 मिनट के लिए रुके थे. इसके बाद दोनों संभल रोड से अपने गांव सैद नगली पहुंच गए. कुछ घंटों बाद जीशान वहां से फरार हो गया. जबकि गुलफाम 28 फरवरी को घर से निकला था. इसी पड़ताल से साफ हुआ कि हमलावर अमरोहा जिले के रहने वाले हैं.

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1 मार्च 2026, देर रात
पहला एनकाउंटर: अंधेरे में जिशान ढेर
पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी जिशान लोनी इलाके में देखा गया है. पुलिस इस मौके को खोना नहीं चाहती थी, लिहाजा फौरन उस इलाके में घेराबंदी की गई. रात करीब 9 बजे बाइक पर सवार दो लोग पुलिस को दिखाई दिए. पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी. इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए गोलीबारी कर दी. दोनों तरफ से हुई गोलीबारी में दो पुलिसकर्मी भी घायल हो गए. इसी मुठभेड़ में अचानक जिशान को गोली लग गई और वो लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा. पुलिस ने उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. वहीं बाइक पर सवार दूसरा आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकला. अभी उसकी तलाश जारी थी.

3 मार्च 2026, देर रात
दूसरा एनकाउंटर: गुलफाम का अंत
जिशान की मौत के बाद पुलिस का पूरा ध्यान उसके भाई गुलफाम पर था. लंबी तलाश के बाद क्राइम ब्रांच को मुखबिर से सूचना मिली कि वह इंदिरापुरम इलाके में छिपा हुआ है. एडीसीपी क्राइम पीयूष सिंह और क्राइम ब्रांच प्रभारी इंस्पेक्टर अनिल राजपूत के नेतृत्व में टीम ने इलाके में घेराबंदी की. सड़कों पर निगरानी की जा रही थी. वाहन चेक किए जा रहे थे. देर रात एक सड़क पर एक बाइक आती दिखाई दी. पुलिस ने उसे रोकने की कोशिश की तो बाइक पर सवार आरोपी ने फायरिंग कर दी. जवाबी कार्रवाई में गोली चली और बाइक फिसल गई. इसी दौरान गुलफाम को गोली लगी. उसे घायल हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इस तरह से सलीम वास्तिक पर हमला करने वाले दोनों मुख्य आरोपी अलग-अलग पुलिस मुठभेड़ में मारे गए.

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इस पूरी कहानी का अंत ऐसे होता है क‍ि हमलावर जिस सलीम की हत्‍या करने आए थे, वह अभी भी जिंदा है. जबक‍ि, हमलावर एनकाउंटर में ढेर होने के बाद दफन हो चुके हैं. डॉक्टरों के मुताबिक, सलीम वास्तिक के जिस्म पर 14 गहरे घाव थे और उसका गला रेंतने की भी कोशिश हुई थी. पुलिस अब इस हमले के पीछे की पूरी साजिश और संभावित सहयोगियों की जांच पड़ताल में जुटी है.

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