बॉम्बे हाई कोर्ट ने एंटीलिया बम केस के मुख्य आरोपी और मुंबई पुलिस के बर्खास्त अधिकारी सचिन वाझे की जेल से रिहाई पर 7 अक्टूबर तक रोक लगा दी है. वाझे पांच साल से ज्यादा समय से ठाणे सेंट्रल जेल में बंद हैं. विशेष NIA अदालत ने उन्हें जमानत दी थी, जिसके खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया. जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की बेंच ने फिलहाल उनकी रिहाई पर अंतरिम रोक लगा दी है. अब 7 अक्टूबर को NIA की उस याचिका पर सुनवाई होगी, जिसमें विशेष अदालत के जमानत आदेश को चुनौती दी गई है.
सचिन वाझे की कुंडली
सचिन वाझे का नाम एंटीलिया केस के बाद देशभर में चर्चा में आया, लेकिन मुंबई पुलिस में उसका सफर कई साल पहले शुरू हो चुका था. 1990 में वह महाराष्ट्र पुलिस में सब इंस्पेक्टर के तौर पर भर्ती हुआ था. उसकी पहली पोस्टिंग नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली इलाके में हुई थी. इसके बाद 1992 में उसका तबादला ठाणे सिटी पुलिस में कर दिया गया. यहीं से अपराध की दुनिया से जुड़े मामलों में उसकी सक्रियता और पहचान बढ़ती चली गई.
ठाणे क्राइम ब्रांच की स्पेशल टीम में काम करने के दौरान सचिन वाझे ने कई मुठभेड़ों में हिस्सा लिया. वह एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा की कार्यशैली से प्रभावित बताया जाता था. कुछ एनकाउंटर के बाद उसकी पहचान भी एक 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' के तौर पर बन गई. वह उस टीम का हिस्सा रहा, जिसके बारे में रिपोर्टों में कहा गया कि मुंबई और ठाणे इलाके में 60 से ज्यादा कथित अपराधी मुठभेड़ों में मारे गए थे. उस दौर में वाझे का नाम और तस्वीरें मीडिया में भी लगातार दिखाई देती थीं.
लेकिन पुलिस की यह चमक ज्यादा लंबे समय तक नहीं चली. साल 2004 में ख्वाजा यूनुस एनकाउंटर केस में सचिन वाझे को गिरफ्तार किया गया था. यूनुस की 2003 में पुलिस हिरासत में मौत और उसके बाद उसके लापता होने के मामले की जांच बाद में महाराष्ट्र CID को सौंपी गई थी. CID ने इसे हिरासत में मौत का मामला माना और वाझे समेत चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या और सबूत नष्ट करने जैसे आरोपों में मामला दर्ज किया. यह मामला वाझे के करियर का एक बड़ा मोड़ साबित हुआ.
ख्वाजा यूनुस मामले में कार्रवाई के बाद वाझे को निलंबित कर दिया गया था. इसके बाद 30 नवंबर 2007 को उसने पुलिस विभाग से इस्तीफा दे दिया. हालांकि, उसका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया था, जिससे आगे चलकर उसकी सेवा में वापसी का रास्ता खुला रहा. इस मामले में आरोपी तीन अन्य पुलिसकर्मी राजेंद्र तिवारी, राजाराम निकम और सुनील देसाई भी थे. 6 जून 2020 को एक कार्यकारी आदेश के जरिए इन पुलिसकर्मियों को बहाल किया गया और 14 अन्य पुलिसकर्मियों का निलंबन भी रद्द किया गया.
पुलिस सेवा से अलग होने के बाद सचिन वाझे ने राजनीति का रुख किया. साल 2008 में उसने महाराष्ट्र की क्षेत्रीय पार्टी शिवसेना की सदस्यता ली. हालांकि, राजनीति में जाने के बाद भी उसका तकनीक और अपराध से जुड़े मामलों में काम जारी रहा. वाझे को तकनीकी जानकारी रखने वाला पुलिस अधिकारी भी माना जाता था. साल 2010 में उसने 'लाई भरी' नाम से एक सोशल नेटवर्किंग साइट शुरू की थी और कथित तौर पर एक सॉफ्टवेयर भी विकसित किया था.
सचिन वाझे की पहचान सिर्फ पुलिस अधिकारी या राजनेता तक सीमित नहीं रही. उसने लेखन में भी हाथ आजमाया और तीन किताबें लिखीं. उसकी एक किताब शीना बोरा हत्याकांड से जुड़ी थी, जबकि दूसरी में 26/11 मुंबई आतंकी हमले और लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेटिव डेविड हेडली से जुड़े घटनाक्रम का जिक्र था. इसके अलावा उसने मुंबई के 26/11 आतंकी हमलों पर आधारित 'जिन्कुन हरेली लढाई' नाम की किताब भी लिखी.
इसके बाद जून 2020 में सचिन वाझे की पुलिस सेवा में वापसी हुई. उसे मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच की क्रिमिनल इंटेलिजेंस यूनिट यानी CIU में जिम्मेदारी मिली. यहां रहते हुए उसने कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच की. इसी दौरान उसका नाम TRP घोटाले की जांच से भी जुड़ा. 24 दिसंबर को उसकी टीम ने BARC के पूर्व CEO पार्थ दास दासगुप्ता समेत कुल 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया था.
वाझे उस पुलिस टीम का भी हिस्सा था, जिसने अक्टूबर 2020 में मुंबई के लोअर परेल इलाके से रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को अनवय नाइक आत्महत्या मामले में उनके घर से गिरफ्तार किया था. इसके अलावा दिसंबर 2020 में उसने स्पोर्ट्स कार डिजाइनर दिलीप छाबड़िया को कथित इंटरस्टेट कार घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया. जांच के दौरान पुलिस ने पुणे स्थित वर्कशॉप पर छापा मारा और जनवरी 2021 में 14 कार और 40 इंजन जब्त किए थे.
सचिन वाझे ने बॉलीवुड से जुड़े एक चर्चित मामले की जांच भी की थी. अभिनेता ऋतिक रोशन और अभिनेत्री कंगना रनौत के बीच ईमेल के आदान-प्रदान से जुड़े विवाद में ऋतिक रोशन ने 2016 में साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. बाद में यह मामला आगे की जांच के लिए CIU को सौंपा गया. इसी मामले में वाझे ने ऋतिक रोशन का बयान भी दर्ज किया था. इस तरह पुलिस में अपनी दूसरी पारी के दौरान वाझे कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच से जुड़ा रहा.
फिर मार्च 2021 में सचिन वाझे का नाम एंटीलिया केस से जुड़ गया. दक्षिण मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के पास एक संदिग्ध स्कॉर्पियो कार मिलने और उसमें विस्फोटक पाए जाने के बाद मामला बेहद गंभीर हो गया. इस केस की जांच आगे चलकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने संभाली. जांच के दौरान सचिन वाझे को गिरफ्तार किया गया और वह लंबे समय से ठाणे सेंट्रल जेल में बंद है.
एंटीलिया मामले के बाद सचिन वाझे एक बार फिर देश की राजनीति और जांच एजेंसियों के केंद्र में आ गया. उस समय महाराष्ट्र की तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार को लेकर भी राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ. विपक्ष ने वाझे के सरकार में प्रभाव और उसकी भूमिका को लेकर सवाल उठाए थे. तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उस समय कहा था कि वाझे कोई ओसामा बिन लादेन नहीं है और किसी व्यक्ति को पहले निशाना बनाकर फिर जांच करना उचित नहीं है.
अब विशेष NIA अदालत से जमानत मिलने के बाद वाझे की जेल से बाहर आने की राह खुली थी, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने 7 अक्टूबर तक उस पर रोक लगा दी है. NIA ने विशेष अदालत के जमानत आदेश को चुनौती दी है और हाई कोर्ट अब इस याचिका पर सुनवाई करेगा. इस तरह कभी मुंबई पुलिस में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर पहचान बनाने वाला सचिन वाझे एक बार फिर कानूनी प्रक्रिया और एंटीलिया केस को लेकर सुर्खियों में है.