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पंजाब में नशे से जुड़े 3 मामलों पर केंद्र सख्त, गृह मंत्रालय ने मांगा जवाब, AAP-BJP में बढ़ा टकराव

पंजाब में नशे से जुड़े तीन मामलों पर गृह मंत्रालय ने भगवंत मान सरकार से रिपोर्ट मांगी है. झोटा हत्याकांड, गुलजार सिंह आत्महत्या और गुरदासपुर हमले पर AAP-BJP के बीच घमासान तेज हो गया. जानें क्या है पूरा मामला.

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इस मामले को लेकर BJP-AAP आमने-सामने है (फोटो-ITG)
इस मामले को लेकर BJP-AAP आमने-सामने है (फोटो-ITG)

पंजाब में नशे के कारोबार और उससे जुड़ी घटनाओं को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य में नशे से जुड़े तीन मामलों पर पंजाब सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. इनमें संगरूर में गुलजार सिंह की आत्महत्या, मानसा में परविंदर सिंह उर्फ झोटा की हत्या और गुरदासपुर जिले में हुआ हमला शामिल है. 

गृह मंत्रालय के आंतरिक सुरक्षा-I डिवीजन की ओर से गुरुवार को पंजाब के मुख्य सचिव को तीन अलग-अलग पत्र भेजे गए. इन पत्रों की प्रतियां पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी भेजी गई हैं. अंडर सेक्रेटरी सुबोध कुमार जयसवाल के हस्ताक्षर वाले इन पत्रों में घटनाओं के तथ्यों, अब तक की कार्रवाई और कानून-व्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी गई है.

गुलजार सिंह की आत्महत्या का मामला

गृह मंत्रालय के पहले पत्र में संगरूर के गुलजार सिंह की आत्महत्या का जिक्र है. गुलजार सिंह ने 8 सितंबर 2026 को कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. वह नशे की लत से जूझ रहे एक युवक के पिता थे. पत्र में उन आरोपों का उल्लेख किया गया है, जिनके मुताबिक गुलजार सिंह ने अपने इलाके में सिंथेटिक ड्रग्स की उपलब्धता पर सवाल उठाए थे और पंजाब सरकार के एक मंत्री पर भी आरोप लगाए थे. 

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यह भी आरोप है कि स्थानीय ग्राम पंचायत ने उन पर लगातार दबाव बनाया और उन्हें परेशान किया, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया. गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से इस पूरे मामले की विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है. इन आरोपों की पुष्टि होना अभी जरूरी है.

परविंदर सिंह उर्फ झोटा की हत्या पर भी जवाब तलब

गृह मंत्रालय के दूसरे पत्र में मानसा में 13 अक्टूबर को परविंदर सिंह उर्फ झोटा की हत्या का मामला उठाया गया है. पत्र में झोटा को पंजाब में नशीले पदार्थों की कथित खुलेआम बिक्री और उनके दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठाने वाला व्यक्ति बताया गया है. उनकी हत्या के बाद विरोध प्रदर्शन भी हुए थे. 

केंद्र ने राज्य सरकार से हत्या की परिस्थितियों, जांच और अब तक उठाए गए कदमों पर व्यापक रिपोर्ट मांगी है. इस मामले में गृह मंत्रालय ने केवल घटना की जानकारी ही नहीं मांगी, बल्कि नशे के खिलाफ केंद्र सरकार की ओर से साझा किए गए एक अहम दस्तावेज पर पंजाब की कार्रवाई का ब्योरा भी तलब किया है.

विजन डॉक्यूमेंट पर भी मांगा जवाब

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 10 अगस्त 2026 को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ 'नशीले पदार्थों के नियंत्रण पर विज़न दस्तावेज़ (2026-2029)' साझा किया था. इसका मकसद देश को नशामुक्त बनाने के लिए रणनीतिक प्राथमिकताएं तय करना है. इस दस्तावेज में समर्पित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के गठन या पुनर्गठन, नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में अनिवार्य वित्तीय जांच और NCORD बैठकों को नतीजों से जोड़ने जैसे कदम शामिल हैं. 

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इसके अलावा अभियोजन व्यवस्था और NDPS अदालतों को मजबूत करने, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति और अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया गया है. गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से पूछा है कि इस विजन डॉक्यूमेंट को लागू करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं.

गुरदासपुर के मारी पनवां में हमला

केंद्र के तीसरे पत्र में गुरदासपुर जिले के मारी पनवां गांव में हुए हमले का जिक्र है. यह गांव श्री हरगोबिंदपुर पुलिस थाने के अधिकार क्षेत्र में आता है. इस हमले में बिक्रमजीत सिंह की मौत हो गई, जबकि निशान सिंह और गुरमुख सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए. 

पत्र में आरोपों का उल्लेख है कि इस हमले का संबंध नशीले पदार्थों से था. गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से घटना के कारणों, जांच और की गई कार्रवाई के बारे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. इस मामले में नशे से संबंध होने का आरोप भी जांच के दायरे में है और इसे स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.

CM ने अधिकारियों के साथ की बैठक

गृह मंत्रालय के पत्रों के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने फिल्लौर में पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की. बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि चर्चा राज्य में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान पर केंद्रित रही. 

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मान ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी सरकार किसी भी नशा तस्कर या ड्रग्स कारोबार से जुड़े व्यक्ति को संरक्षण नहीं देती. उन्होंने कहा कि पंजाब में नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और नशे के पैसे से बनाई गई संपत्तियों को चिह्नित करने के लिए उन पर पीला रंग लगाया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने दावा किया कि नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के मामले में पंजाब देश में आगे है.

अमित शाह पर कॉपी-पेस्ट का आरोप

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्हें पंजाबी भाषा की जानकारी नहीं है और उन्होंने पंजाब से मिले संदेश को कॉपी-पेस्ट कर दिया. मान ने पंजाब के 50 किलोमीटर के सीमा क्षेत्र में सीमा सुरक्षा बल (BSF) की भूमिका का जिक्र करते हुए केंद्र की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए. उन्होंने गुजरात, राजस्थान और हरियाणा जैसे बीजेपी शासित राज्यों से भी बड़ी मात्रा में ड्रग्स आने का आरोप लगाया. 

हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने इस बयान में कोई विस्तृत आंकड़ा पेश नहीं किया. मान ने पूर्व अकाली-बीजेपी सरकार के दौरान पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया पर भी आरोप लगाए और दावा किया कि 2007 से 2017 के बीच उनके वाहन में नशीले पदार्थ ले जाए जाते थे. ये आरोप राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं और इन्हें संबंधित जांच या न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

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CBI की कार्रवाई और प्रदर्शन पर भी बोले मान

मुख्यमंत्री मान ने CBI की छापेमारी को लेकर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले इस तरह की कार्रवाई का सिलसिला जारी रहेगा और दूसरे राज्यों में भी ऐसी कार्रवाई देखने को मिली है. दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री पर तंज कसा. 

मान ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किए गए. उन्होंने प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें साढ़े 12 साल के कार्यकाल के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी चाहिए. इन बयानों के जरिए मुख्यमंत्री ने नशे के मुद्दे पर केंद्र और बीजेपी की भूमिका पर सवाल उठाए.

अमित शाह का पलटवार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि पंजाब नशे, गैंगस्टरवाद और संगठित अपराध के बढ़ते खतरे से जूझ रहा है. उन्होंने दिर्बा में आत्महत्या और मानसा में हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि गृह मंत्रालय इन दोनों घटनाओं पर पंजाब सरकार से जवाब मांगेगा. शाह ने सवाल उठाया कि पंजाब के लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा. 

उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी सत्ता में आने पर पंजाब को नशामुक्त और गैंगस्टरमुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन समेत पार्टी के अन्य नेताओं ने लगातार सामने आ रही हत्याओं को आम आदमी पार्टी सरकार के तहत बिगड़ती कानून-व्यवस्था का संकेत बताया. विपक्ष का आरोप है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को निशाना बनाया जा रहा है और सरकार उनकी सुरक्षा करने में नाकाम है.

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AAP का पलटवार

बीजेपी के आरोपों पर आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई ने भी जवाब दिया. पार्टी ने बीजेपी नेताओं पर एक परिवार के दुख का राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाया. AAP ने गुरदासपुर में मारे गए बिक्रमजीत सिंह के भाई के बयान का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने साफ किया था कि झगड़े और मौत का संबंध नशे से नहीं था. इस बयान के जरिए पार्टी ने गुरदासपुर की घटना को नशे से जोड़ने के बीजेपी के आरोप पर सवाल उठाए. 

इस तरह तीन घटनाओं को लेकर केंद्र, विपक्ष और पंजाब सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं. हालांकि, अलग-अलग मामलों में नशे से संबंध और घटनाओं के पीछे की परिस्थितियों का अंतिम निष्कर्ष जांच के तथ्यों के आधार पर ही निकलेगा.

95 हजार से ज्यादा NDPS FIR

नशे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पंजाब पुलिस ने भी आंकड़े जारी किए हैं. पुलिस के मुताबिक, 16 मार्च 2022 से 'युद्ध नशियां विरुद्ध' अभियान के तहत NDPS कानून के अंतर्गत 95,644 FIR दर्ज की गई हैं और 1.27 लाख से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इस अवधि में 7,265 किलोग्राम हेरोइन बरामद करने का दावा किया गया है. 

पुलिस के अनुसार, 1 मार्च 2025 से अब तक 8,617 सप्लायर और 88,434 पेडलर के खिलाफ कार्रवाई की गई है. पुलिस ने NDPS मामलों में 90 प्रतिशत दोषसिद्धि दर होने की भी जानकारी दी है. इसके अलावा नशे से जुड़ी 902 करोड़ रुपये की संपत्तियां फ्रीज करने, 60 करोड़ रुपये की ड्रग मनी बरामद करने और 374 अवैध संपत्तियों को ध्वस्त करने का दावा किया गया है.

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60 दिन का एक्शन प्लान

पंजाब पुलिस ने नशे के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए 60 दिन की विशेष कार्ययोजना का भी जिक्र किया है. इसके तहत राज्य में चिह्नित 435 ड्रग हॉटस्पॉट को नशे के कारोबार से मुक्त कराने का लक्ष्य रखा गया है. इस अभियान में सूचीबद्ध 2,913 पेडलर और 312 सप्लायर पर कार्रवाई केंद्रित की जाएगी. 

पुलिस के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य नशे की बिक्री के प्रमुख ठिकानों पर कार्रवाई तेज करना और सप्लाई नेटवर्क को कमजोर करना है. एक तरफ केंद्र सरकार ने तीन मामलों और नशा नियंत्रण विजन डॉक्यूमेंट पर रिपोर्ट मांगी है, तो दूसरी तरफ पंजाब सरकार अपनी कार्रवाई के आंकड़े पेश कर रही है. चुनाव से पहले नशे का मुद्दा अब पंजाब में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही की बड़ी लड़ाई बनता दिखाई दे रहा है.

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