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मुंबई में छोटा राजन गैंग के नाम पर बिल्डर से ₹11 करोड़ की रंगदारी मांगने का आरोप, महिला समेत 5 गिरफ्तार

मुंबई के बांद्रा में बिल्डर से ₹11 करोड़ की रंगदारी मांगने के आरोप में महिला समेत 5 लोग गिरफ्तार हुए हैं. आरोपियों ने हत्या और रेप के झूठे केस में फंसाने की धमकी दी थी. पढ़ें पूरी कहानी.

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इस मामले की जांच अभी भी जारी है (फाइल फोटो-ITG)
इस मामले की जांच अभी भी जारी है (फाइल फोटो-ITG)

मुंबई के बांद्रा से रंगदारी और धमकी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी एक्सटॉर्शन सेल ने एक बिल्डर से कथित तौर पर 11 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों में एक महिला भी शामिल है. आरोप है कि आरोपियों ने बिल्डर को जान से मारने की धमकी दी और रेप के झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर करोड़ों रुपये वसूलने की कोशिश की.

पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने बांद्रा वेस्ट के पेरेरा रोड स्थित एक प्रॉपर्टी के पुनर्विकास को लेकर बिल्डर पर दबाव बनाया था. इस मामले में पहले 32 करोड़ रुपये की मांग की गई थी, लेकिन बाद में कथित तौर पर 11 करोड़ रुपये में सौदा तय हुआ. इसकी पहली किस्त के तौर पर 25 लाख रुपये 1 सितंबर को देने की बात हुई थी. इसी रकम को लेने के लिए आरोपी जब बांद्रा स्थित डेवलपर के ऑफिस पहुंचे, तो पुलिस ने जाल बिछाकर उन्हें पकड़ लिया.

एंटी एक्सटॉर्शन सेल ने इस कार्रवाई में एथेल और डैनियल, नसीर शेख, अब्दुल्ला खान और रेमी फर्नांडीस को गिरफ्तार किया है. शुरुआत में तीन आरोपियों को 25 लाख रुपये की पहली किस्त लेते हुए मौके पर पकड़ा गया, जबकि दो अन्य आरोपियों को बाद में गिरफ्तार किया गया. इस मामले की FIR में कुल आठ लोगों के नाम और अन्य लोगों का भी जिक्र है. इनमें राजविंदर सिंह का नाम भी सामने आया है, जिसका कथित तौर पर चेंबूर में छोटा राजन गैंग से संबंध बताया गया है.

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जांच के दौरान पुलिस के सामने कुछ और नाम भी आए हैं. इनमें रेमी को कथित तौर पर मुख्य भूमिका निभाने वाला व्यक्ति बताया जा रहा है. पुलिस के मुताबिक Remi को पहले भी एंटी एक्सटॉर्शन सेल गिरफ्तार कर चुकी है. इसके अलावा कुर्ला के अब्दुल खान, उल्हासनगर के राजविंदर सिंहऔर एथेल, डैनियल के परिवार के कुछ सदस्यों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. बांद्रा का एक NGO सदस्य भी इस मामले में आरोपी के तौर पर सामने आया है.

जिस प्रॉपर्टी को लेकर यह पूरा विवाद हुआ, वह बांद्रा वेस्ट के पेरेरा रोड पर स्थित थी और करीब 50 साल पुरानी थी. यह संपत्ति बॉम्बे का आर्चडायसिस की थी. इसके पुनर्विकास के लिए प्रशासन ने टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी, जिसमें दिलजय प्रॉपर्टीज़ को सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी के तौर पर चुना गया. इसके बाद जरूरी एनओसी और चैरिटी कमिश्नर कार्यालय से अनुमति लेने के बाद प्रॉपर्टी  पुनर्विकास के लिए डेवलपर को सौंप दी गई.

इमारत काफी पुरानी और जर्जर हालत में पहुंच चुकी थी. साल 2024 में बृहन्मुंबई नगर निगम यानी BMC ने इसे C-1 यानी खतरनाक और जर्जर श्रेणी में घोषित कर दिया था. इसके बाद सुरक्षा को देखते हुए नगर निगम ने पूरी प्रॉपर्टी की बिजली और पानी की सप्लाई काट दी थी. जून 2026 तक इमारत की हालत बेहद खतरनाक हो चुकी थी, जिसके बाद BMC और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में निरीक्षण और पंचनामा किया गया.

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पुलिस के मुताबिक एथेल, डैनियल और उनके परिवार के कुछ सदस्य इस प्रॉपर्टी में कथित तौर पर अवैध रूप से रह रहे थे. इमारत को खतरनाक घोषित किए जाने के बाद वहां मौजूद केयरटेकर  और टोनी के परिवार का सामान नियमानुसार बाहर निकाला गया. इसके बाद तय प्रक्रिया के तहत जर्जर और खतरनाक इमारत को गिरा दिया गया. लेकिन आरोप है कि तोड़फोड़ के बाद विवाद खत्म होने के बजाय और ज्यादा बढ़ गया.

इमारत गिराए जाने के बाद एथेल और डैनियल के परिवार के लोग समय-समय पर साइट पर आने लगे. पुलिस का आरोप है कि उनके साथ आपराधिक प्रवृत्ति वाले कुछ लोग भी आते थे. इनमें चेंबूर और कुर्ला जैसे इलाकों से जुड़े कुछ लोग शामिल थे, जिनका कथित तौर पर छोटा राजन गैंग से संबंध बताया जाता था. आरोप है कि इन लोगों ने साइट पर तैनात डेवलपर के सुरक्षा कर्मचारियों और दूसरे स्टाफ के साथ मारपीट की और उन्हें धमकाया.

साइट पर लगातार हो रही कथित मारपीट और धमकियों को लेकर बांद्रा पुलिस स्टेशन में पहले भी शिकायतें दर्ज कराई गई थीं. इस मामले में दो FIR भी दर्ज हुईं. पहली FIR नंबर 1393, 11 जुलाई 2026 को दर्ज की गई थी, जबकि दूसरी FIR नंबर 1564, 29 जुलाई 2026 को दर्ज हुई. इसके बावजूद आरोपियों की गतिविधियां कथित तौर पर जारी रहीं.

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पुलिस के मुताबिक जब डेवलपर प्लॉट पर सुरक्षा के लिए घेराबंदी का काम करा रहा था, तभी एथेल और डैनियल अपने कुछ साथियों के साथ वहां पहुंचे. आरोप है कि उन्होंने काम रुकवाने की कोशिश की और कहा कि वे किसी भी हालत में साइट पर काम नहीं होने देंगे. इसी दौरान कथित तौर पर बिल्डर को जान से मारने की धमकी देते हुए करोड़ों रुपये की मांग की गई.

आरोपियों ने कथित तौर पर बिल्डर से कहा कि वे राजविंदर सिंह, अब्दुल्ला खान, रेमी और नज़ीर जैसे लोगों से जुड़े हुए हैं और जरूरत पड़ने पर सभी मिलकर उसकी हत्या कर सकते हैं. आरोप है कि उन्होंने धमकी दी कि अगर बिल्डर को अपनी जान बचानी है और प्रॉपर्टी पर काम करना है तो उसे 32 करोड़ रुपये देने होंगे. लगातार मिल रही धमकियों के बाद डेवलपर ने बांद्रा पुलिस स्टेशन में इस मामले की शिकायत की.

इसके बाद 24 अगस्त 2026 को आरोपी कथित तौर पर बांद्रा स्थित कंपनी के ऑफिस पहुंचे. वहां उन्होंने दिलजय डेवलपर्स के डायरेक्टर गगन शर्मा से मुलाकात की. आरोपियों ने इसे अंतिम चेतावनी बताते हुए रकम को लेकर बातचीत का दबाव बनाया. इसके बाद कथित तौर पर 11 करोड़ रुपये में मामला 'सेटल' करने की बात तय हुई. तय हुआ कि 1 सितंबर को 25 लाख रुपये की पहली किस्त दी जाएगी और बाकी रकम अगले चार हफ्तों में पूरी करने की मांग की गई.

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लगातार धमकियों और करोड़ों रुपये की मांग से परेशान डेवलपर को अंदेशा हुआ कि मामला अब जान के खतरे तक पहुंच सकता है. इसके बाद उसने धमकियों से जुड़ी रिकॉर्डिंग, तस्वीरें और पहले दर्ज कराई गई FIR की कॉपियां जुटाईं. इन सभी सबूतों के साथ मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच के ज्वाइंट कमिश्नर अनिल कुंभारे से मुलाकात की गई और पूरी शिकायत दर्ज कराई गई.

पुलिस अधिकारियों ने मामले को बेहद संवेदनशील माना. इसके बाद इसकी जांच एंटी एक्सटॉर्शन सेल को सौंप दी गई. पुलिस ने आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ने के लिए पूरी योजना बनाई. 1 सितंबर को जैसे ही एथेल, डैनियल और उनके साथी बांद्रा स्थित डेवलपर के ऑफिस में 25 लाख रुपये की पहली किस्त लेने पहुंचे, पुलिस टीम पहले से तैयार थी.

एंटी एक्सटॉर्शन सेल ने आरोपियों को कथित तौर पर 25 लाख रुपये की रकम लेते हुए गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक ट्रैप मनी में 24.95 लाख रुपये बच्चों के खेलने वाली नकली करेंसी थी, जबकि ऊपर की तरफ 500 रुपये के असली नोट लगाए गए थे, जिनकी कुल कीमत 5,000 रुपये थी. इस तरह पुलिस ने आरोपियों को कथित तौर पर पैसे स्वीकार करते समय मौके पर ही पकड़ लिया.

गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है. जांच का फोकस इस बात पर है कि आरोपियों के दूसरे अपराधियों और कथित गैंग सदस्यों से कितने गहरे संबंध हैं. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इससे पहले आरोपियों ने कितने लोगों को जान से मारने की धमकी दी और कितने लोगों से इसी तरह रंगदारी या ब्लैकमेलिंग के जरिए पैसे वसूले.

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इस मामले में गिरफ्तार पांचों आरोपियों को मुंबई मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने सभी आरोपियों को 5 सितंबर तक पुलिस कस्टडी रिमांड में भेज दिया है. पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर कथित रंगदारी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगा रही है. जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों के नाम और उनकी भूमिका स्पष्ट हो सकेगी.

पुलिस की शुरुआती जांच में रेमी समेत कई नाम सामने आए हैं और कथित तौर पर छोटा राजन गैंग से जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है. हालांकि, इन सभी कनेक्शनों और आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी. फिलहाल मुंबई क्राइम ब्रांच यह पता लगाने में जुटी है कि 11 करोड़ रुपये की कथित रंगदारी की इस कोशिश के पीछे असल नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं.

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