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400 करोड़ की खरीद, 1200 करोड़ की बिक्री... कफ सिरप सिंडिकेट पर STF का बड़ा शिकंजा, आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट

उत्तर प्रदेश STF ने करोड़ों रुपये के कोडीनयुक्त कफ सिरप सिंडिकेट मामले में विभोर राणा समेत छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. जांच में 1200 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध बिक्री और नेपाल-बांग्लादेश तक फैले नेटवर्क का खुलासा हुआ है. जानें पूरा मामला.

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विभोर राणा समेत 6 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है (फोटो-ITG)
विभोर राणा समेत 6 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है (फोटो-ITG)

उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने करोड़ों रुपये के कोडीनयुक्त कफ सिरप सिंडिकेट मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है. इस मामले में जीआर ट्रेडिंग के मालिक विभोर राणा समेत कई आरोपी लंबे समय से जांच एजेंसियों के निशाने पर थे. एसटीएफ पिछले छह महीनों से पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही थी. 

जांच के दौरान बैंक खातों, दवा कंपनियों और फर्मों के रिकॉर्ड खंगाले गए. पुख्ता सबूत मिलने के बाद अब सभी आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश की गई है. फिलहाल सभी आरोपी जेल में बंद हैं और मामले की आगे भी जांच जारी है. इस बड़े सिंडिकेट का खुलासा पिछले साल उत्तर प्रदेश एसटीएफ और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में हुआ था. 

जांच में सामने आया कि विभोर राणा के अलावा मारुति मेडिकोज के सचिन कुमार और एबी फार्मास्युटिकल के अभिषेक शर्मा समेत अन्य आरोपी अवैध कारोबार में शामिल थे. एजेंसियों ने जब इनके लेनदेन और व्यापारिक रिकॉर्ड की जांच की तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए. चार वर्षों के भीतर करीब 400 करोड़ रुपये की खरीद और 1200 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री का खुलासा हुआ. 

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जांच एजेंसियों का कहना है कि यह नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था. एसटीएफ के मुताबिक आरोपी एबॉट कंपनी से कोडीनयुक्त कफ सिरप की बड़ी खेप खरीदते थे. इसके बाद इस सिरप को अलग-अलग राज्यों में सप्लाई किया जाता था. जांच में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क का कनेक्शन नेपाल और बांग्लादेश तक फैला हुआ था. सिंडिकेट के सदस्य अवैध तरीके से दवाओं को सीमापार भेजते थे. 

एसटीएफ ने पूरे सप्लाई नेटवर्क, पैसों की ट्रेल और तस्करी के रूट का खुलासा किया है. मामले में कई बैंक खातों और करोड़ों के लेनदेन की डिटेल को विवेचना का हिस्सा बनाया गया है. इस मामले में बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह, अमित टाटा और विकास समेत कई अन्य आरोपी भी जेल में बंद हैं. जांच एजेंसियों का कहना है कि इनके खिलाफ जल्द ही पूरक चार्जशीट दाखिल की जाएगी. 

एसटीएफ अब पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है. जांच के दौरान कई अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत भी एजेंसियों के हाथ लगे हैं. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं. वहीं विदेश में बैठे सिंडिकेट के कथित सरगना शुभम जायसवाल, गौरव और वरुण सिंह को भारत लाने की तैयारी भी तेज कर दी गई है. 

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जांच एजेंसियों ने इनके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी कर दिया है. साथ ही इनके पासपोर्ट भी निरस्त कर दिए गए हैं ताकि ये आरोपी विदेश से फरार न हो सकें. एसटीएफ अब इंटरनेशनल नेटवर्क और विदेशों में मौजूद कनेक्शन की भी जांच कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि इस सिंडिकेट से जुड़े हर आरोपी को कानून के दायरे में लाया जाएगा.
 

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