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पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाना पड़ रहा भारी, परविंदर झोटा से पहले इन एंट्री ड्रग एक्टिविस्ट लोगों की गई जान

पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या कर दी गई. इससे पहले भी राम गोपाल, हरभगवान सिंह, जसवीर सिंह और मोहिंदर सिंह की हत्या के मामले सामने आए. जानिए इन मामलों की पूरी टाइमलाइन और जांच से जुड़ी अहम बातें.

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इन सभी मामलों में पुलिस की जांच जारी है (फोटो-ITG)
इन सभी मामलों में पुलिस की जांच जारी है (फोटो-ITG)

पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने एक बार फिर नशा-विरोधी अभियान से जुड़े लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. झोटा मानसा में नशा विक्रेताओं के खिलाफ अभियान चलाते थे और सोशल मीडिया पर भी सक्रिय थे. हालांकि, पंजाब में यह पहला मामला नहीं है, जिसमें नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले किसी व्यक्ति की मौत हुई हो. इससे पहले भी अलग-अलग जिलों में नशा-विरोधी समितियों से जुड़े लोगों और नशे के कारोबार का विरोध करने वालों की मौत के मामले सामने आए हैं. 

इन घटनाओं में कुछ मामलों को लेकर नशा तस्करी का विरोध करने की वजह से हत्या किए जाने के आरोप लगे, लेकिन हर मामले में आरोप और जांच के नतीजों को अलग-अलग समझना जरूरी है. चलिए सिलसिलेवार जानते हैं इन मामलों की कहानी.

राम गोपाल की हत्या, जालंधर (जनवरी 2023)

जनवरी 2023 में जालंधर जिले के लखनपाल गांव में राम गोपाल की हत्या का मामला सामने आया था. वह गांव के नंबरदार थे और आसपास के 13 गांवों के लोगों की ओर से बनाए गए नशा विरोधी फ्रंट से जुड़े थे. रिपोर्टों के मुताबिक, 28 जनवरी की रात कुछ हमलावर इनोवा गाड़ी से आए और उन पर लकड़ी के पटरे से हमला किया. उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.

ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि नशा तस्करी का विरोध करने की वजह से उनकी हत्या की गई. घटना के बाद लोगों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया था. हालांकि, नशा तस्करी का विरोध ही हत्या की निर्णायक वजह थी या नहीं, इसे जांच के नतीजों के आधार पर ही तय किया जा सकता है.

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हरभगवान सिंह की हत्या, फरीदकोट (अगस्त 2023)

अगस्त 2023 में फरीदकोट जिले के ढिलवां गांव में हरभगवान सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वह गांव की एंटी-ड्रग एक्शन कमेटी के सदस्य थे और इलाके में नशे की बिक्री के खिलाफ आवाज उठाते थे. जानकारी के मुताबिक, वह नशा बेचने वाले एक संदिग्ध व्यक्ति के घर उसे रोकने के लिए गए थे. इसी दौरान उन पर गोली चला दी गई. इस घटना के बाद परिवार और ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे. 

एक रिपोर्ट के मुताबिक, हत्या के बाद उनकी पत्नी वीरपाल कौर और बच्चों को गांव छोड़ना पड़ा और परिवार को आजीविका के लिए संघर्ष करना पड़ा. नशा तस्करी का विरोध हत्या की वजह होने का आरोप लगा था, लेकिन इस दावे को पुलिस और अदालत के नतीजों से अलग करके देखना जरूरी है.

जसवीर सिंह की हत्या, बठिंडा (सितंबर 2023)

सितंबर 2023 में बठिंडा जिले के सिधाना गांव में जसवीर सिंह की हत्या का मामला सामने आया. वह गांव की नशा-विरोधी एक्शन कमेटी से जुड़े थे और रात में गांव में पहरा दे रहे थे, ताकि नशा तस्करी से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके.

जानकारी के मुताबिक, दो बाइक सवार लोगों को रोकने की कोशिश के दौरान उन पर लोहे की रॉड से हमला किया गया. घटना के बाद पुलिस ने संदिग्धों की गिरफ्तारी की जानकारी दी थी. इस मामले ने गांवों में नशे के खिलाफ स्थानीय स्तर पर अभियान चलाने वाले लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए. 

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मोहिंदर सिंह की मौत, जालंधर (मार्च 2026)

मार्च 2026 में जालंधर जिले के बुट्टे दीआ छन्ना गांव के सरपंच और जम्हूरी किसान सभा के नेता मोहिंदर सिंह की मौत हो गई. उन पर 28 फरवरी 2026 को हमला हुआ था, जिसमें उनके सिर पर गंभीर चोटें आई थीं. इलाज के दौरान 6 और 7 मार्च की दरमियानी रात उनकी मौत हो गई. जानकारी के मुताबिक, किसान संगठन के नेताओं ने आरोप लगाया कि हमले के पीछे नशा तस्करों का हाथ था. 

मोहिंदर सिंह इलाके में चिट्टा यानी हेरोइन की बिक्री के खिलाफ पुलिस से कार्रवाई की मांग कर रहे थे. जानकारी के अनुसार, पुलिस ने आठ लोगों को आरोपी बनाया और तीन गिरफ्तारियों की जानकारी दी थी. मामले में हत्या की धारा भी जोड़ी गई थी. हालांकि, आरोपियों के खिलाफ आरोपों और अदालत में साबित तथ्यों के बीच अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है.

परविंदर सिंह झोटा की हत्या, मानसा (अक्टूबर 2026)

13 अक्टूबर 2026 को पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला सामने आया. झोटा कथित नशा विक्रेताओं से सवाल करते हुए सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो बनाते थे. रिपोर्टों के मुताबिक, घटना से पहले उनका एक मेडिकल स्टोर के मालिक अश्वनी कुमार से सामना हुआ था. झोटा उस व्यक्ति पर सिंथेटिक ड्रग्स बेचने का आरोप लगा रहे थे. 

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जानकारी के अनुसार, वीडियो में आरोपी को पिस्तौल से धमकाते और फिर गोली चलाते देखा गया. झोटा के एक साथी को भी गोली लगने से गंभीर चोट आई. उस दौरान आरोपी फरार था और पुलिस उसकी तलाश कर रही थी. झोटा ने अपनी मौत से कुछ दिन पहले मानसा में कथित अवैध नशीली दवाओं की बिक्री की जांच के लिए सीबीआई से भी अपील की थी.

इनके अलावा ये दो मामले भी रहे चर्चा में 

गुलजार सिंह की मौत, संगरूर (सितंबर 2026)

सितंबर 2026 में संगरूर में गुलजार सिंह की मौत का मामला भी चर्चा में आया था. उन्होंने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के सामने अपने बेटे की नशे की लत और इलाके में चिट्टा मिलने का मुद्दा उठाया था. रिपोर्टों के मुताबिक, 7 सितंबर को उनकी मौत हुई और पुलिस इसे आत्महत्या के मामले के तौर पर देख रही थी.

उनके परिजनों और अन्य लोगों ने धमकी तथा उत्पीड़न के आरोप लगाए. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मामले में संबंधित दस्तावेज मांगे थे. चूंकि इस मामले को हत्या के रूप में स्थापित नहीं किया गया था, इसलिए इसे नशा-विरोधी कार्यकर्ताओं की हत्या की गिनती में शामिल करना उचित नहीं होगा.

सिमरनजीत सिंह की हत्या, फगवाड़ा (मई 2026)

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मई 2026 में फगवाड़ा में आरटीआई एक्टिविस्ट और वकील सिमरनजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने शुरुआती तौर पर उनके चचेरे भाई के साथ लेन-देन के विवाद को हत्या से जोड़ा था और अन्य पहलुओं की भी जांच की थी.

हालांकि, उनकी हत्या और नशा-विरोधी अभियान के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए उपलब्ध रिपोर्टों में पर्याप्त आधार नहीं मिला. इसलिए इस मामले को नशा तस्करी के खिलाफ आवाज उठाने के कारण हुई हत्या के तौर पर गिनना सही नहीं होगा.

नशा-विरोधी कार्यकर्ता निशाने पर

इन घटनाओं में एक समान बात यह है कि कई मृतक गांवों में नशे की बिक्री रोकने, कथित नशा तस्करों का विरोध करने या स्थानीय स्तर पर नशा-विरोधी अभियान चलाने में सक्रिय थे. कुछ मामलों में परिजनों, ग्रामीणों या किसान संगठनों ने आरोप लगाया कि नशा तस्करी का विरोध करने की वजह से हमले किए गए. लेकिन हर घटना में हत्या का मकसद एक जैसा था, ऐसे नतीजे पर पहुंचने के लिए पुख्ता जानकारी जरूरी है. 

कुल मिलाकर परविंदर सिंह झोटा से पहले कम से कम चार ऐसे लोगों की मौत के मामले सामने आए हैं, जिनका नशा-विरोधी गतिविधियों से सीधा संबंध बताया गया है. जिनमें राम गोपाल, हरभगवान सिंह, जसवीर सिंह और मोहिंदर सिंह के नाम शामिल हैं. झोटा की हत्या के बाद इस कड़ी में पांच मामले शामिल हो गए. लेकिन पंजाब पुलिस आरोपियों पर शिकंजा कसने में नाकाम दिख रही है.

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