सैलरी भी बढ़ रही है, लेकिन पैसे बच नहीं रहे हैं. अधिकतर लोगों की ये आम शिकायत है. ये बहाने तभी सामने आते हैं, जब सेविंग की बात होती है. 30 हजार सैलरी वाले भी ये बहाने बनाते हैं, और 1 लाख सैलरी वाले भी यही तर्क देते.
दरअसल, आखिर ऐसा होता क्यों है? ऐसे लोगों के पास पैसा टिकता क्यों नहीं, और ऐसे लोगों सेविंग क्यों नहीं कर पाते? आज हम इन्हीं सवालों के जवाब जानने की कोशिश करेंगे.
नौकरीपेशा लोग कहां करते हैं फिजूलखर्ची?
एक उदाहरण से समझते हैं, प्रकाश की 50 हजार रुपये मंथली सैलरी है, लेकिन बचता कुछ नहीं. सारा खर्च हो जाता. अब समाधान निकालने के लिए सबसे पहले देखेंगे कि प्रकाश का पैसा खर्च होता कहां है. क्या उन खर्चों पर अंकुश लगाया जा सकता है.
प्रकाश से बातचीत में पता चला कि उन्हें घूमने और बाहर खाने का शौक है. हफ्ते में 3-4 बार बाहर से खाना मंगाना या रेस्टोरेंट में जाकर खाने की आदत है. जिसमें 4 से 5 हजार रुपये महीने खर्च हो जाता है.
इसके अलावा प्रकाश ने OTT प्लेटफॉर्म, म्यूजिक ऐप्स, गेमिंग और जिम की ऐसी सदस्यताएं जिनका नियमित उपयोग नहीं होता है, इन चीजों पर वो हर महीने 2,000 रुपये तक खर्च कर देते हैं.
बातचीत में पता चला कि हर महीने वो ऐसी चीजें भी खरीद लेते हैं, जिन चीजों की उन्हें जरूरत नहीं है, केवल ऑफर और सेल के चक्कर में खरीदते हैं. इन चीजों पर 4-5 हजार रुपये महीना खर्च हो जाता है.
इसके अलावा दैनिक छोटे-मोटे खर्च बढ़ते जा रहे हैं. रोजाना ऑफिस के दौरान कॉफी, पैक्ड स्नैक्स और फैंसी ड्रिंक्स जैसी आदतों पर महीने में आसानी से 2000 रुपये तक खर्च हो जाते हैं. अब इन सभी छोटे-बड़े फिजूलखर्चों को जोड़ें, तो प्रकाश हर महीने औसतन 10 हजार से 12 हजार रुपये बेफिजूल की चीजों पर खर्च कर देता है. एक आम फॉर्मूला है, हर कई अपनी सैलरी की 10 से 15 फीसदी राशि बेफिजूल मदों पर खर्च कर देता है. जिसपर आसानी से लगाम लगाया जा सकता है, आप भी खुद सोच के देखिए आप अपनी सैलरी का कितना हिस्सा बेफिजूल की चीजों पर खर्च कर देते हैं, क्या उसपर लगाम लगाया जा सकता है?
एक फैसला और बदल सकता है खेल
मान लीजिए कि प्रकाश ने आज ही फैसला ले लिया कि अब इन चीजों पर अब 50% ही खर्च करेंगे. इन फिजूलखर्ची पर लगाम लगाकर प्रकाश हर महीने करीब 5,000 रुपये बचा लेता है. अगर इस बचत को सीधे सेविंग्स अकाउंट में रखने के बजाय म्यूचुअल फंड में निवेश किया जाए, तो लंबी अवधि में इसका परिणाम आश्चर्यजनक हो सकता है.
औसतन 12% वार्षिक रिटर्न का अनुमान लगाते हुए 5 साल में 3 लाख रुपये के निवेश पर ब्याज समेत बढ़कर 4.12 लाख रुपये हो जाएगा. 10 साल अनुमानित फंड बढ़कर 11.62 लाख रुपये हो जाएगा, और 15 साल में 12 फीसदी सालाना रिटर्न के हिसाब अनुमानित फंड बढ़कर 25.23 लाख रुपये हो जाएगा. 20 साल की लंबी अवधि में महज 5 हजार का मंथली निवेश और ब्याज समेत बढ़कर 50 लाख रुपये का फंड बन जाएगा. अब आप सोचिए केवल 5 हजार की सेविंग पर इतना मोटा फंड बना सकते हैं. तो फिर जैसे-जैसे सैलरी बढ़ेगी, उसी हिसाब से निवेश बढ़ने पर प्रकाश कितना बड़ा फंड बना सकता है.
ये तो रही प्रकाश की बात, लेकिन आप क्या कर सकते हैं.
50/30/20 का नियम अपनाएं: अपनी इन-हैंड सैलरी का 50% अनिवार्य आवश्यकताओं (किराया, राशन, बिल) पर, 30% लाइफस्टाइल पर और कम से कम 20% बचत कर उसे सही जगह पर निवेश करें.
अगर पैसा नहीं बचता है तो फिर सबसे बढ़िया फॉर्मूला है. 'पहले निवेश, फिर खर्च' की आदत डालें. सैलरी आते ही सबसे पहले अपनी SIP और बचत की किश्तें कटने दें, बची हुई राशि में से ही महीना चलाएं.
फिजूल खर्च रोकने के लिए क्या करें?
- बाहर खाना कुछ दिन के लिए कम या बंद करें, घूमने के शौकीन हैं तो फिर अगर साल में दो बार जाते हैं तो कोशिश करें कि साल में एक बार जाएं. इसके अलावा महंगे कपड़े पहनने से कोई बड़ा आदमी नहीं बन जाता है. इसलिए महंगे कपड़ों पर खर्च करना कम करें. इसके अलावा ऑफर और सेल के चक्कर में वो चीजें मत खरीदें जो आपकी जरूरत की न है, केवल खरीद कर घर में रख देने से पैसा फंस जाता है.
ऐसे में जो लोग ये शिकायत करते हैं कि सैलरी कम है, और बचत नहीं कर पाते हैं, सबसे पहले वो फिजूलखर्ची पर लगाम लगाएं. इन्हीं पैसों को निवेश करना शुरू करें. चंद वर्षो में अच्छे रिजल्ट देखने को मिलेंगे.