सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54% और खाद्य महंगाई 7.74% पर पहुंच गई. एक साल में प्याज, चीनी और खाने के तेल की कीमतों में बड़ा इजाफा हुआ है.
रसोई का बजट बिगड़ने लगे तो इसका असर पूरे घर के खर्च पर पड़ता है. सरकारी प्राइस मॉनिटरिंग डेटा के मुताबिक, जिन 42 जरूरी सामानों की कीमतों की तुलना की गई, उनमें से 41 के खुदरा दाम बीते एक साल में बढ़े हैं. प्याज की कीमत में सबसे ज्यादा उछाल दर्ज किया गया, जबकि आलू के दाम में गिरावट आई है. इसी बीच सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54% हो गई, जो करीब दो साल का ऊंचा स्तर है. खाद्य महंगाई दर भी 7.74% दर्ज की गई.
प्याज के दाम में करीब 113% बढ़ोतरी
सरकारी प्राइस मॉनिटरिंग डेटा के मुताबिक, प्याज की खुदरा कीमत एक साल में करीब 113% बढ़ी है. 12 अक्टूबर को इसका अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव 53.37 रुपये प्रति किलो था. चीनी के दाम में करीब 22% और सूरजमुखी तेल की कीमत में लगभग 18% की बढ़ोतरी हुई है. महाराष्ट्र में खरीफ प्याज के उत्पादन में 5-7% गिरावट का अनुमान व्यापारिक सूत्रों ने जताया है. हालांकि, सरकार की 7 अक्टूबर की जानकारी के मुताबिक, देश के कुछ प्रमुख उत्पादक राज्यों में नई खरीफ प्याज की आवक शुरू हो चुकी थी. सरकार ने कहा था कि बढ़ती आवक से मंडियों में प्याज की कीमतों में नरमी के संकेत मिले हैं. ऐसे में आगे कीमतों में राहत नई फसल की उपलब्धता और बाजार में सप्लाई पर निर्भर करेगी.
दालों की कीमत भी बढ़ी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, तूर दाल का औसत खुदरा भाव एक साल पहले करीब 113 रुपये प्रति किलो था, जो 12 अक्टूबर को बढ़कर लगभग 129 रुपये प्रति किलो हो गया. देश के चार बड़े महानगरों में इसकी कीमत 140 से 145 रुपये प्रति किलो के बीच दर्ज की गई. चना दाल का औसत भाव भी एक साल में करीब 6.4% बढ़कर 85 रुपये से 91 रुपये प्रति किलो पहुंच गया. दालों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर उन परिवारों के बजट पर पड़ सकता है, जिनके रोजाना के खाने में दाल की अहम भूमिका है.
खाने के तेल में भी महंगाई की मार
रसोई में इस्तेमाल होने वाले खाने के तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सूरजमुखी तेल का औसत खुदरा भाव करीब 191 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया, जो एक साल पहले के मुकाबले लगभग 18% ज्यादा है. पाम तेल की कीमत में 15.2% और सोया तेल के दाम में 14.6% की बढ़ोतरी हुई है. सरसों तेल का औसत भाव भी एक साल पहले के 188 रुपये से बढ़कर 204 रुपये प्रति लीटर हो गया. खाने के तेल की कीमतें बढ़ने से घरेलू खर्च के साथ खाद्य उत्पादों की लागत पर भी असर पड़ सकता है.
चावल और चीनी के दाम भी बढ़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, नियमित चावल का औसत खुदरा भाव करीब 12% बढ़कर 47 रुपये प्रति किलो पहुंच गया. चीनी का औसत भाव 56 रुपये प्रति किलो से ज्यादा रहा. हालांकि, चीनी की कीमत एक महीने पहले के करीब 59 रुपये प्रति किलो से नीचे आई है, लेकिन एक साल पहले के मुकाबले अब भी लगभग 22% ज्यादा है. गेहूं और आटे की कीमतों में इस दौरान अपेक्षाकृत मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई.
12 अक्टूबर के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, टमाटर का औसत खुदरा भाव एक साल पहले के 36 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 42 रुपये प्रति किलो हो गया. इसके उलट, आलू की कीमत में एक साल के दौरान 6% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. 42 जरूरी वस्तुओं में आलू एकमात्र ऐसी वस्तु रही, जिसके दाम सालाना आधार पर घटे.
सितंबर में खाद्य महंगाई बढ़ने और कई जरूरी वस्तुओं के दाम सालाना आधार पर ऊपर रहने से घरेलू बजट पर दबाव बना हुआ है. प्याज की कीमतों में आगे राहत नई फसल की आवक और बाजार में सप्लाई पर निर्भर करेगी. वहीं, दाल, खाने के तेल और चावल जैसी जरूरी वस्तुओं के दाम पर भी परिवारों की नजर रहेगी.