अगर आप भी पीएफ में कंट्रीब्यूशन करते हैं और हर महीने अपनी सैलरी से एक महत्वपूर्ण योगदान देते हैं तो आपके लिए एक खास नियम जारी हुआ है. कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना, 2026 ने स्पष्ट किया है कि अनिवार्य कर्मचारी कंट्रीब्यूशन 1800 रुपये हर महीने या 15,000 रुपये की सैलरी वालों के लिए 12 फीसदी रहेगा.
अगर इससे ज्यादा का कंट्रीब्यूशन करना चाहते हैं तो इसे आपकी मर्जी पर निर्भर करेगा. जो कर्मचारी मौजूदा समय में अपने पूरे बेसिक पर ईपीएफ में कंट्रीब्यूशन दे रहे हैं, उनके लिए यह स्पष्टीकरण एक ऑप्शन ओपेन करता है. अब आप योगदान कम करके मंथली सैलरी बढ़ा सकते हैं या रिटायरमेंट के लिए ज्यादा बचत कर सकते हैं. EPFO की ओर से यह अपडेट दोनों लोगों के लिए दरवाजे खोलता है...
अगर आप भी सिर्फ 1800 रुपये ही पीएफ में जमा करना चाहते हैं तो आपको कुछ बातों को करीब से जानने की कोशिश करना चाहिए. आइए जानते हैं...
आपकी उम्र और रिटायरमेंट का समय
पीएफ में योगदान आपकी उम्र सबसे बड़े फैक्टर में से एक है. 20 से 30 साल की आयु के कर्मचारियों के पास आम तौर पर रिटायरमेंट से पहले कई दशक होते हैं, जिससे वे लंबी अवधि के चक्रवृद्धि ब्याज से लाभ उठाने के लिए उच्च ईपीएफ योगदान कर सकते हैं. उच्च वेतन पर भी योगदान जारी रखने से रिटायमेंट फंड में काफी बढ़ोतरी हो सकती है.
दूसरी ओर, सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच रहे व्यक्ति को ज्यादा कैश की जरूरत होती है. अगर उनका रिटायरमेंट फंड पहले से ही पर्याप्त है तो 1800 रुपये तक ही आप पीएफ कंट्रीब्यूशन को सीमित कर सकते हैं.
आपका रिटायरमेंट टारगेट
ज्यादा पैसा पीएफ में जमा करना इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपको रिटायमेंट पर कितना चाहिए और आप सिर्फ पीएफ जैसे निवेश पर ही निर्भर हैं, अन्य किसी भी तरह का निवेश नहीं कर रहे हैं. अगर आप पीएफ पर ही निर्भर हैं तो आपको अपने रिटायरमेंट टारगेट के हिसाब से कंट्रीब्यूशन को तेजी से बढ़ाना चाहिए.
मंथली सैलरी की जरूरत
वहीं कुछ कर्मचारियों को अपने महीने के बजट को पूरा करने के लिए ज्यादा मंथली बजट की आवश्यकता होती है, लेकिन पीएफ में कंट्रीब्यूशन देने से उनका महीने का बजट गड़बड़ हो जाता है. ऐसे में पीएफ का कंट्रीब्यूशन आप मिनिमम कर सकते हैं. अगर आप ऐसा करते हैं तो नए नियम के मुताबिक आपकी इन-हैंड सैलरी बढ़ जाएगी.
टैक्स बचत भी एक फैक्टर
ईपीएफ पर टैक्स छूट संबंधी लाभ मिलते रहते हैं, फिर भी कर्मचारियों को कंट्रीब्यूशन बढ़ाने से पहले लागू टैक्स प्रावधानों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्वैच्छिक अंशदान की अनुमति है, लेकिन आयकर अधिनियम के तहत टैक्स संबंधी प्रभावों पर भी विचार किया जाना चाहिए.
इसलिए, जो कर्मचारी अनिवार्य राशि से काफी अधिक योगदान देने की योजना बना रहे हैं, उन्हें रिटायरमेंट लाभों के साथ-साथ टैक्स संबंधी नियमों का भी वैल्यूवेशन करना चाहिए.