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यूपी में 6 महीने में बने 46,000 नए मकान, अटके प्रोजेक्ट्स के विवाद भी सुलझे

उत्तर प्रदेश में हजारों नए घर तो बने ही हैं साथ ही कई नए प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है. खास बात ये है कि अब बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी नए-नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च हो रहे हैं.

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यूपी के रियल एस्टेट में उछाल, खरीदार राहत में (Photo-ITG)
यूपी के रियल एस्टेट में उछाल, खरीदार राहत में (Photo-ITG)

उत्तर प्रदेश में नए मकानों का निर्माण तेजी से बढ़ रहा है, जिससे खरीदारों को राज्य के पारंपरिक रियल एस्टेट हॉटस्पॉट्स से इतर भी कई विकल्प मिल रहे हैं. इसके साथ ही, देरी से चल रही परियोजनाओं में फंसे हजारों गृह खरीदारों को उनके पैसे वापस मिल रहे हैं और पुराने विवादों का समाधान हो रहा है. 

उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP-RERA) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2026 की पहली छमाही के दौरान 143 नई आवासीय परियोजनाएं रजिस्टर्ड की गईं. इन परियोजनाओं के तहत ₹31,952 करोड़ के अनुमानित निवेश के साथ 46,049 नए आवास प्रस्तावित हैं, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में प्राधिकरण ने 35,082 आवासों वाली 134 परियोजनाओं का पंजीकरण किया था.

लखनऊ सबसे अधिक 37 नई परियोजनाओं के पंजीकरण के साथ शीर्ष पर रहा, जिसके तहत ₹3,834 करोड़ के निवेश से 9,872 मकान बनाए जाने का प्रस्ताव है. वहीं, गौतम बुद्ध नगर सबसे बड़े निवेश गंतव्य के रूप में उभरा है. इस जिले में 27 परियोजनाओं के तहत 13,160 आवासीय इकाइयों के लिए ₹15,678 करोड़ का भारी निवेश प्रस्तावित किया गया है. इसके अलावा, गाजियाबाद में ₹3,989 करोड़ के अनुमानित निवेश के साथ 19 परियोजनाओं में 9,500 आवास दर्ज किए गए हैं.

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छोटे और उभरते शहरों तक विकास का प्रसार

ताजा आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि राज्य में नया आवासीय विकास अब केवल कुछ गिने-चुने बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया है. आगरा और मथुरा दोनों शहरों में 10-10 नई आवासीय परियोजनाएं दर्ज की गई हैं. वाराणसी में 7 नई परियोजनाएं सामने आई हैं, जबकि झांसी, बाराबंकी, बरेली और प्रयागराज जैसे शहरों में 3-3 नई परियोजनाएं पंजीकृत की गई हैं.

यूपी-रेरा के आंकड़े पिछले तीन वर्षों में राज्य के रियल एस्टेट सेक्टर की लगातार वृद्धि की पुष्टि करते हैं. इस क्षेत्र में पूंजीगत निवेश वर्ष 2023 के ₹28,411 करोड़ से बढ़कर 2025 में ₹68,328 करोड़ तक पहुंच गया. इसी समयावधि के दौरान, वार्षिक परियोजना पंजीकरण की संख्या 197 से बढ़कर 308 हो गई, जबकि प्रस्तावित आवासों की संख्या 2023 के 55,297 से बढ़कर 2025 में 84,976 हो गई, जो वर्ष 2024 की तुलना में 22.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है.

नया हाउसिंग स्टॉक उपलब्ध कराने के साथ-साथ यूपी-रेरा ने अटकी हुई परियोजनाओं के पीड़ितों को राहत पहुंचाना जारी रखा है. प्राधिकरण ने 8,212 मामलों में ₹2,173.78 करोड़ की वसूली सुनिश्चित कराई, जिसमें से ₹1,623.28 करोड़ सीधे आवंटियों के बैंक खातों में भेजे गए और ₹550.50 करोड़ रिकवरी सर्टिफिकेट के माध्यम से वसूल किए गए. इसके अलावा, विवाद निवारण प्रणालियों के माध्यम से 11,558 मामलों में ₹6,032.42 करोड़ के विवादों का समाधान किया गया. इसमें से ₹1,958 करोड़ (3,237 मामले) रेरा बेंचों द्वारा, ₹657 करोड़ (1,648 मामले) सुलह मंच द्वारा और ₹3,417.42 करोड़ (6,673 मामले) पोर्टल पर आपसी सहमति से सुलझाए गए.
 

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