अपना घर होना हर किसी का सपना होता है और भारत में इस सपने को पूरा करने का सबसे सुलभ जरिया होम लोन है. हालांकि, कई बार बैंक लोन के आवेदन को खारिज कर देते हैं, जिससे न केवल घर खरीदने की योजना लटक जाती है, बल्कि आवेदक को भारी मानसिक तनाव और वित्तीय हताशा का सामना करना पड़ता है.
लोन रिजेक्ट होने के पीछे बैंक की कुछ सख्त शर्तें और आवेदक की कुछ छोटी गलतियां होती हैं. अगर आप सावधानी से योजना बनाएं, तो लोन अप्रूवल की संभावना को 100% तक बढ़ाया जा सकता है. जानते हैं कि होम लोन की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
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सिबिल (CIBIL) स्कोर को मजबूत बनाएं
होम लोन के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक आपका क्रेडिट स्कोर है. भारत में बैंक आमतौर पर 750 या उससे अधिक के सिबिल स्कोर को आदर्श मानते हैं. लोन आवेदन से कम से कम 6 महीने पहले अपना क्रेडिट स्कोर चेक करें. अगर स्कोर कम है, तो पुराने क्रेडिट कार्ड के बिल और मौजूदा ईएमआई (EMI) का समय पर भुगतान करें. बार-बार नए क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन न करें, क्योंकि इससे स्कोर गिरता है.
'डेट-टू-इनकम' (DTI) रेशियो का संतुलन
बैंक यह देखता है कि आपकी कुल कमाई का कितना हिस्सा पहले से चल रहे लोन की ईएमआई में जा रहा है. अगर आप अपनी आय का 50% से अधिक हिस्सा लोन चुकाने में खर्च कर रहे हैं, तो बैंक नया लोन देने से कतराते हैं. नया होम लोन लेने से पहले छोटे लोन को बंद करने की कोशिश करें. इससे आपकी लोन चुकाने की क्षमता बेहतर दिखेगी.
डाउन पेमेंट की राशि बढ़ाएं
बैंक आमतौर पर संपत्ति के मूल्य का 75% से 90% तक ही लोन देते हैं. अगर आप न्यूनतम डाउन पेमेंट की योजना बनाते हैं, तो बैंक को जोखिम अधिक लगता है. अगर आप 20% से 30% तक डाउन पेमेंट खुद करने की स्थिति में हैं, तो बैंक आपको कम जोखिम वाला ग्राहक मानता है और लोन जल्दी अप्रूव कर देता है, इससे आपकी मासिक ईएमआई का बोझ भी कम हो जाता है.
कई बार आवेदक की प्रोफाइल सही होने के बावजूद लोन रिजेक्ट हो जाता है, क्योंकि संपत्ति विवादित होती है या उसके पास जरूरी क्लीयरेंस नहीं होते. अगर आपकी आय कम है या क्रेडिट स्कोर थोड़ा कमजोर है, तो किसी परिवार के सदस्य को सह-आवेदक बनाना एक मास्टरस्ट्रोक हो सकता है.
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