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1 लाख रुपये सैलरी है तो कितने का घर खरीदना समझदारी? जानें पूरा हिसाब

1 लाख रुपये की सैलरी वाले घर खरीदार के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि बैंक कितना लोन देगा? बल्कि यह होना चाहिए कि EMI चुकाने के बाद भी क्या आराम से अपनी बाकी जिंदगी के खर्च और वित्तीय लक्ष्यों को पूरा किया जा सकेगा.

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1 लाख की सैलरी में 40, 50 या 60 लाख का घर, जानें कितना होम लोन लेना सही (Photo-ITG)
1 लाख की सैलरी में 40, 50 या 60 लाख का घर, जानें कितना होम लोन लेना सही (Photo-ITG)

अगर आपकी हर महीने टेक-होम सैलरी 1 लाख रुपये है और आप घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो सिर्फ बैंक कितने रुपये का होम लोन देने को तैयार है, यह देखना काफी नहीं है. आपको यह भी देखना होगा कि EMI चुकाने के बाद आपके पास घर का खर्च, निवेश, आपातकालीन जरूरतों और दूसरे वित्तीय लक्ष्यों के लिए पर्याप्त पैसा बच रहा है या नहीं.

होम लोन की पात्रता तय करते समय बैंक आय, मौजूदा EMI, क्रेडिट प्रोफाइल, उम्र, नौकरी और अन्य देनदारियों जैसे कई पहलुओं को देखते हैं. 

1 लाख रुपये की सैलरी पर कितनी EMI रखना ठीक?

EMI को मासिक आय के 40% से अधिक नहीं रखना चाहिए. इसका मतलब है कि 1 लाख रुपये की मासिक आय पर करीब 40,000 रुपये तक की कुल EMI एक संदर्भ सीमा हो सकती है. हालांकि, यह कोई अनिवार्य सीमा नहीं है और वास्तविक क्षमता व्यक्ति के खर्च और दूसरी देनदारियों पर निर्भर करेगी.

मसलन, अगर किसी व्यक्ति पर पहले से कार लोन की 10,000 रुपये EMI चल रही है, तो होम लोन के लिए उपलब्ध EMI बजट को उसी हिसाब से कम करना होगा.

30,000, 35,000 या 40,000 रुपये EMI में कितना होम लोन?

मान लीजिए कि होम लोन की ब्याज दर 8% सालाना है, ऐसे में 20 साल की अवधि पर 30,000 रुपये की मासिक EMI से करीब 35.9 लाख रुपये का लोन लिया जा सकता है, जबकि 25 साल की अवधि में यही EMI करीब 38.9 लाख रुपये के लोन के बराबर होगी, इसी तरह 35,000 रुपये की EMI पर 20 साल के लिए करीब 41.8 लाख रुपये और 25 साल के लिए करीब 45.3 लाख रुपये का लोन मिल सकता है. वहीं 40,000 रुपये की मासिक EMI पर 20 साल की अवधि में करीब 47.8 लाख रुपये और 25 साल की अवधि में करीब 51.8 लाख रुपये का लोन बनता है.

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ये गणनाएं 8% वार्षिक ब्याज दर के आधार पर अनुमानित हैं, वास्तविक EMI और पात्रता बैंक की दर, प्रोफाइल और अन्य शर्तों के अनुसार अलग हो सकती है.

तो 1 लाख रुपये सैलरी पर कितने का घर खरीदना चाहिए?

यहीं पर होम लोन और घर की कीमत के बीच का अंतर समझना जरूरी है. अगर आपकी EMI क्षमता करीब 30,000-40,000 रुपये है, तो 20-25 साल की अवधि में लगभग 36 लाख से 52 लाख रुपये तक का लोन बन सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको इतने ही लोन पर घर खरीद लेना चाहिए, घर की कुल कीमत में आपकी डाउन पेमेंट भी शामिल होती है.

उदाहरण के लिए, अगर आप करीब 45 लाख रुपये का घर खरीदते हैं और 35 लाख रुपये का होम लोन लेते हैं, तो बाकी राशि आपको अपनी बचत से जुटानी होगी, इसके अलावा स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, दस्तावेजी खर्च, इंटीरियर और अन्य खरीद लागत के लिए भी अलग रकम की जरूरत हो सकती है.

RBI के मौजूदा आवास-ऋण ढांचे में LTV यानी Loan-to-Value की सीमाएं लागू होती हैं. उदाहरण के तौर पर 20 लाख रुपये से ऊपर और 75 लाख रुपये तक के व्यक्तिगत आवास ऋण के लिए 80% तक LTV का प्रावधान बताया गया है, जबकि 75 लाख रुपये से ऊपर के लिए 75% तक की सीमा है. यानी हर मामले में बैंक से घर की पूरी कीमत का लोन मिलना जरूरी नहीं है.

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50 लाख रुपये का घर खरीदने पर कितना पैसा चाहिए?

मान लेते हैं कि घर की कीमत 50 लाख रुपये है, अगर लोन का हिस्सा 80% के आसपास रहता है, तो करीब 40 लाख रुपये का लोन और लगभग 10 लाख रुपये अपनी तरफ से लगाने पड़ सकते हैं, लेकिन यहां सिर्फ 10 लाख रुपये की व्यवस्था करना पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए. खरीदार को स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन और दूसरे खर्चों के लिए भी अलग से पैसा रखना होगा. RBI के दिशा निर्देशों में भी LTV की गणना में स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन और अन्य दस्तावेजी शुल्क को सामान्य तौर पर संपत्ति की लागत में शामिल नहीं करने की बात कही गई है.

इसलिए 50 लाख रुपये की प्रॉपर्टी खरीदने वाले व्यक्ति को केवल डाउन पेमेंट के बराबर बचत रखकर घर खरीदने का फैसला नहीं करना चाहिए. यानी 1 लाख रुपये की टेक-होम सैलरी का लगभग 40% सिर्फ EMI में चला जाएगा.
इसके बाद बिजली-पानी, राशन, बच्चों की पढ़ाई, बीमा, निवेश, यात्रा, मेडिकल जरूरतें और अन्य खर्चों के लिए करीब 60,000 रुपये बचेंगे. अगर व्यक्ति पर पहले से कोई दूसरी EMI है, तो दबाव और बढ़ जाएगा.

इस तरह 1 लाख रुपये की टेक-होम सैलरी वाले व्यक्ति के लिए घर की कीमत तय करते समय केवल यह नहीं देखना चाहिए कि बैंक कितना लोन मंजूर कर सकता है. EMI के बाद हर महीने कितनी रकम वास्तव में उपलब्ध रहेगी, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है.

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25 साल का लोन लेने से EMI कम होगी, लेकिन ब्याज बढ़ेगा

लंबी अवधि का फायदा यह है कि EMI कम हो जाती है, उदाहरण के लिए 40 लाख रुपये के लोन पर 8% ब्याज मानें तो 20 साल में EMI करीब 33,500 रुपये होगी, जबकि 25 साल में यह घटकर करीब 30,900 रुपये के आसपास आ सकती है.
लेकिन कम EMI के बदले लोन ज्यादा लंबे समय तक चलता है और कुल ब्याज भुगतान बढ़ जाता है. इसलिए केवल EMI कम करने के लिए बहुत लंबी अवधि चुनना हमेशा सही रणनीति नहीं माना जा सकता. अपनी आय, उम्र, भविष्य के खर्च और निवेश लक्ष्यों को देखकर अवधि तय करना बेहतर है.
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