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दुनिया को तेल संकट में डालने वाले ट्रंप 'डीजल' से क्यों परेशान? ये हैं आंकड़े

अमेरिका में डीजल की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद ट्रंप प्रशासन की चिंता बढ़ गई है. अमेरिका में डीजल का औसत दाम 5.85 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गया है और कुछ महीनों में कीमत करीब 55 फीसदी बढ़ी है. महंगे डीजल ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को परेशान कर दिया है.

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अमेरिका में डीजल की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद ट्रंप प्रशासन की चिंता बढ़ गई है. (File Photo: Reuters)
अमेरिका में डीजल की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद ट्रंप प्रशासन की चिंता बढ़ गई है. (File Photo: Reuters)

अमेरिका में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के बाद ट्रंप प्रशासन की चिंता बढ़ गई है. देश में डीजल का औसत दाम 5.85 डॉलर प्रति गैलन के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि कुछ समय पहले यह 3.76 डॉलर प्रति गैलन के आसपास था. यानी अमेरिका में डीजल पिछले कुछ महीनों में करीब 55 फीसदी महंगा हो चुका है. इस बढ़ती कीमत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को निशाने पर लिया है.

ट्रंप ने जेलेंस्की से रूस की ऑयल रिफाइनरियों और डीजल प्रोडक्शन से जुड़े ठिकानों पर हमले रोकने को कहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से डीजल की कमी को लेकर बात की है. ट्रंप के मुताबिक, जेलेंस्की को रूस में डीजल ईंधन के ठिकानों पर हमले रोकने चाहिए. उनका आरोप है कि यूक्रेन के लगातार हमलों की वजह से रूस में डीजल की सप्लाई प्रभावित हुई है और इसका असर पूरी दुनिया के फ्यूल मार्केट पर पड़ रहा है. उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों की मुख्य वजह ईरान युद्ध है.

रूस की रिफाइनरियों पर लगातार हमले

यूक्रेन इन गर्मियों में रूस की 20 से ज्यादा रिफाइनरी और तेल से जुड़े ठिकानों को निशाना बना चुका है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी मान चुके हैं कि इन हमलों से रूसी अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ा है. 7 सितंबर को भी यूक्रेन ने रूस के ऊर्जा ढांचे पर हमला किया था. जेलेंस्की ने इन हमलों को रूस के यूक्रेन पर किए जा रहे हमलों के जवाब के तौर पर सही ठहराया है. यूक्रेन के हमलों के बाद रूस ने भी सितंबर के अंत तक डीजल के निर्यात पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल की सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ी है.

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महंगे डीजल के लिए ईरान युद्ध जिम्मेदार?

ट्रंप का कहना है कि अमेरिका में डीजल की मौजूदा तेजी रूस-यूक्रेन संघर्ष की वजह से है, न कि ईरान युद्ध की वजह से. हालांकि, इससे पहले ट्रंप खुद ईरान युद्ध और ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच संबंध की बात कर चुके हैं. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने के बाद से अमेरिका में डीजल की कीमत करीब 55 फीसदी बढ़ चुकी है. युद्ध के दौरान मध्य पूर्व में तेल की सप्लाई और टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है.

खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में पैदा हुई बाधाओं ने वैश्विक तेल बाजार पर दबाव बढ़ाया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का बेंचमार्क ब्रेंट 14 सितंबर को 107 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था. युद्ध शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था. कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर डीजल और पेट्रोल की कीमतों पर पड़ता है.

अमेरिका डीजल पर इतना निर्भर क्यों है?

अमेरिका में डीजल सिर्फ ट्रकों और बसों में इस्तेमाल होने वाला ईंधन नहीं है. देश की सप्लाई चेन का बड़ा हिस्सा डीजल पर निर्भर है. सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने वाले बड़े ट्रक, डिलीवरी व्हीकल, मालगाड़ियां और कई औद्योगिक मशीनें डीजल से चलती हैं. अमेरिका के कृषि क्षेत्र में भी डीजल की बड़ी भूमिका है. किसान ट्रैक्टर और दूसरे कृषि उपकरणों के लिए डीजल का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में डीजल महंगा होने का असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खेती, माल ढुलाई और उत्पादन की लागत भी बढ़ जाती है. यही वजह है कि डीजल के दाम लंबे समय तक ऊंचे रहने पर अमेरिका में खाने-पीने की चीजों से लेकर कपड़े, फर्नीचर और कॉस्मेटिक्स तक महंगे हो सकते हैं. ऑनलाइन सामान की डिलीवरी फीस भी बढ़ सकती है.

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मिड टर्म इलेक्शन में महंगाई बनेगी मुद्दा?

अमेरिका के सामने एक तरफ ईंधन की बढ़ती कीमतों की चुनौती है, तो दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन पर महंगाई और ईरान युद्ध को लेकर राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है. ट्रंप की टैरिफ नीतियों और ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद वैसे ही अमेरिका में महंगाई बढ़ी है. अब डीजल की कीमतों में तेजी के कारण महंगाई और बढ़ने की पूरी संभावना है. डीजल की कीमत अगर लंबे समय तक ऊंची रहती है तो इसका असर अमेरिका की पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले महंगा ईंधन अमेरिकी मतदाताओं के लिए बड़ा मुद्दा बन सकता है. यही कारण है, जो ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ा रहा है.

यूएस में डीजल सप्लाई पर दोहरा दबाव

अमेरिका में डीजल के दाम बढ़ने की एक बड़ी वजह कम स्टोरेज भी है. अगस्त के अंत में फ्यूल स्टोरेज इस समय के लिए बेहद निचले स्तर पर थे. अमेरिका के पूर्वी तट पर स्थिति और ज्यादा गंभीर है, जहां डीजल और हीटिंग ऑयल का स्टोरेज रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया. आने वाले महीनों में दबाव और बढ़ सकता है. सर्दियां शुरू के साथ किसान फसल की कटाई के लिए ज्यादा डीजल इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा सर्दियों के पहले हीटिंग फ्यूल की मांग भी बढ़ती है. अमेरिकी रिफाइनरियां डीजल का उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं और उनकी प्रोडक्शन कैपेसिटी कई वर्षों के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है. इसके बावजूद दुनिया के दूसरे हिस्सों में रिफाइनरी से जुड़ी दिक्कतों और सप्लाई में कमी के कारण इंटरनेशनल मार्केट में पर्याप्त ईंधन नहीं पहुंच पा रहा है.

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