scorecardresearch
 

शेयर बाजार बर्बाद, कुछ तो करो सरकार... 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने निकाले ₹4 लाख करोड़

Stock Market Inside Story: विदेशी निवेशक हर रोज अंधाधुंध पैसे भारतीय बाजार से निकाल रहे हैं. साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक निकाले चुके हैं.

Advertisement
X
शेयर बाजार में गिरावट से निवेशकों में हाहाकार. (Photo: ITG)
शेयर बाजार में गिरावट से निवेशकों में हाहाकार. (Photo: ITG)

अमेरिकी बाजार गिरते हैं, तो हम भी गिरते हैं... ये तो समझ में आता है, लेकिन जब अमेरिकी बाजार चढ़ते हैं, तब भी भारतीय बाजार में गिरावट सोचने के लिए मजबूर करती है. बाजार के लिए खबर अच्छी हो या बुरी, गिरना दोनों परिस्थितियों में तय लगता है. पिछले करीब 10 महीनों से हमारे शेयर बाजार के साथ यही हो रहा है.

याद कीजिए बजट का वो दिन, जब निवेशक देसी हो या विदेशी, सबकी निगाहें सरकार पर टिकी थीं. बाजार को कोई संजीवनी मिलेगी, लेकिन उम्मीदें तो पूरी नहीं हुईं. उल्टे फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस के ट्रेड पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) बढ़ा दिया गया, उस दिन भी इस फैसले से बाजार बिखर गया था. क्या STT में इजाफा करना उचित कदम था, अभी के परिदृश्य में देखें तो ये उचित नहीं लगता है? 

उसके बाद भी कई बार ऐसा लगा कि सरकार शेयर बाजार को संभालने के लिए कुछ करने वाली है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, वो उम्मीदें भी हवा होती गईं. इसी साल जब मार्च के महीने में बाजार में बड़ी गिरावट आई, तब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण यह कहती दिखीं कि सरकार इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स से बात कर रही है. जिसके बाद निवेशकों में एक उम्मीद बंधी थी कि शायद कैपिटल गेन्स टैक्स या एसटीटी में राहत मिल सकती है. लेकिन अफसोस कि उस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. उसके बाद महंगा कच्चा तेल और लगातार कमजोर पड़ती भारतीय करेंसी ने पूरा खेल बिगाड़ कर रख दिया.

Advertisement

विदेशी निवेशकों की बिकबाली बड़ी वजह

सभी को पता है कि बाजार क्यों गिर रहा है, सरकार को भी पता है... कारण सिर्फ एक है, लेकिन बहुत बड़ा है- विदेशी निवेशकों की बिकवाली. विदेशी निवेशक हर रोज अंधाधुंध पैसे भारतीय बाजार से निकाल रहे हैं. साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक निकाले चुके हैं. जो कि अपने आप निवेशकों को डराने वाला आंकड़ा है. महज पिछले 9 दिनों में ही विदेशी निवेशकों ने करीब 60 हजार करोड़ रुपये भारतीय बाजारों से निकाल डाले.
 
विदेशी निवेशकों की बेरुखी के बीच अगर आज हमारा बाजार किसी तरह से टिका हुआ है, तो उसमें घरेलू रिटेल निवेशकों का बड़ा योगदान है, जो कि पिछले कुछ वर्षों में एक ताकत बनकर उभरे हैं. डायरेक्ट इक्विटी मार्केट और म्यूचुअल फंड्स के जरिए आम भारतीयों ने बाजार में जो भरोसा जताया है, उसी के दम पर इंडेक्स बड़े हादसों से बच पा रहे हैं. लेकिन कड़वी सच्चाई यह भी है कि मौजूदा हालात में बगैर विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार को लंबे समय तक संभालना मुश्किल है. ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी बढ़ जाती है. 

खासकर विदेशी निवेशकों की अंधाधुंध बिकवाली रोकने के लिए सरकार को असरदार कदम उठाने की जरूरत है. विदेशी निवेशकों को कोसने से कुछ नहीं होगा. विदेशी निवेशक आखिर पैसे वहीं लगाते हैं, जहां उन्हें बेहतर रिस्क-टू-रिवार्ड और ठोस रिटर्न की संभावना ज्यादा दिखती है. आखिरकार क्यों उन्हें अब भारतीय बाजार पहले जैसा आकर्षक नहीं लग रहा है? इस बुनियादी सवाल का जवाब ढूंढ़ना होगा, और हल भी तलाशना होगा. इस गंभीर स्थिति से मुंह फेरने से हालात सुधरेंगे नहीं, बल्कि और ज्यादा बिगड़ सकते हैं. भारतीय शेयर बाजार का प्रमुख इंडेक्स निफ्टी अपने हाई से 15 फीसदी से ज्यादा लुढ़क चुका है. निवेशकों के पोर्टफोलियो को लहूलुहान करने के लिए ये आंकड़ा काफी है.

Advertisement

भारतीय बाजार से क्यों मोहभंग

जानकार मानते हैं कि भारतीय बाजार में जटिल और टैक्स जाल से विदेशी निवेशक मायूस और निराश हैं. भारत में लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) 12.5% और शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) 20% है, जो कि FII को चुभता है. इसके अलावा F&O पर बढ़ा हुआ STT विदेशी फंडों के मार्जिन को और कम कर देता है. रही सही कसर कमजोर रुपया पूरी कर रहा है. 

अगर शेयर बाजार स्थिर रहे या मामूली गिरे और रुपया तेजी से गिर जाए, तो विदेशी निवेशकों को डॉलर में सीधा नुकसान यानी निगेटिव रिटर्न का डर सताने लगता है. असली बात ये है कि जब तक रुपया स्थिर नहीं होता, तब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में बड़ी खरीदारी करने से कतराते रहेंगे. इस बीच अमेरिका में ज्यादा ब्याज मिलना, और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से विदेशी निवेशकों को बिना किसी रिस्क के 5% से ज्यादा सुरक्षित रिटर्न डॉलर में ही मिल जाता है. ऐसे में कमजोर होते रुपये वाले इमर्जिंग मार्केट के रिस्की इक्विटी मार्केट में उन्हें पैसे लगाए रखना फायदे का सौदा नहीं लग रहा है. 

बाजार में भूचाल के बीच सवाल अब उठ रहा है कि आखिर सरकार को विदेशी निवेशकों के विश्वास जीतने के लिए जो कदम उठाए जाने चाहिए, उनमें इतनी देरी क्यों हो रही है? सबसे पहले सरकार को उन प्राथमिक कारणों की तह तक जाना चाहिए कि विदेशी निवेशक भारतीय मार्केट से अपना बोरिया-बिस्तर क्यों समेट रहे हैं? उनकी असली दिक्कतें क्या हैं? क्या LTCG की दरें उन्हें परेशान कर रही हैं या फिर F&O पर बढ़ाया गया STT और बायबैक पर बदले गए टैक्स रूल उनके रिटर्न को कम रहे हैं? टैक्स संरचना में कहां कटौती या ढील देकर उन्हें रोका जा सकता है, इस पर तुरंत नीतिगत फैसला लेना होगा. 

Advertisement

तुरंत कदम उठाने की जरूरत

दूसरी तरफ, अगर रिटेल निवेशक आज के दौर में बाजार की असली ताकत बनकर उभरे हैं, तो फिर उन्हें इस तरह अनिश्चितता के मझधार में क्यों छोड़ा जा रहा है? पिछले करीब 2 वर्षों से बाजार एक सीमित दायरे में फंसा हुआ है और लगातार नीचे की ओर फिसल रहा है. ऊपर से हर मोर्चे पर लगता टैक्स का बोझ छोटे निवेशकों के मुनाफे को निचोड़ रहा है.

अब तो रिटेल निवेशकों को भी इस गिरावट से गहरा दर्द हो रहा है. उन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई, अपनी बचत का पैसा देश की अर्थव्यवस्था पर भरोसा करके बाजार में लगाया है. जब अब बाजार में चौतरफा अनिश्चितता का माहौल है, तो फिर उम्मीदें सरकार पर टिकी हैं, और अब वक्त भी कह रहा है कि ठोस कदम उठाए जाएं. टैक्स से लेकर दूसरे सुधारों पर समीक्षा नहीं, फैसला हो. अगर अब भी कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया, तो रिटेल निवेशकों का भी भरोसा टूटने लगेगा, जो कि भारतीय वित्तीय बाजार के ढांचे के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा.
 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement