भाई या बहन के साथ मिलकर घर खरीदना कई लोगों के लिए घर का सपना पूरा करना आसान बना सकता है. दो लोगों की आय जोड़ने से होम लोन की पात्रता बढ़ सकती है और घर खरीदने का बजट भी बड़ा हो सकता है. लेकिन संयुक्त रूप से घर खरीदने का मतलब यह भी है कि प्रॉपर्टी और लोन से जुड़े बड़े फैसलों पर दोनों भाई-बहनों की सहमति जरूरी होगी, इसलिए घर खरीदने से पहले यह भी सोच लेना चाहिए कि भविष्य में अगर किसी की परिस्थितियां या योजनाएं बदलती हैं, तो उसका असर इस साझा निवेश पर क्या होगा.
बेसिक होम लोन के CEO और को-फाउंडर अतुल मोंगा का कहना है कि भाई-बहन के साथ मिलकर प्रॉपर्टी खरीदने पर सामान्य तौर पर कोई कानूनी रोक नहीं है. हालांकि, भाई और बहन को संयुक्त रूप से होम लोन मिलेगा या नहीं, यह संबंधित बैंक या लेंडर की नीति और लोन की संरचना पर निर्भर करता है. कुछ लेंडर कुछ शर्तों के साथ भाई-बहन को सह-उधारकर्ता के रूप में होम लोन लेने की अनुमति दे सकते हैं.
उदाहरण के लिए, मान लीजिए ₹1 करोड़ का घर खरीदा जा रहा है. दोनों भाई-बहन मिलकर ₹20 लाख की डाउन पेमेंट करते हैं और बाकी ₹80 लाख का होम लोन लेते हैं. अगर दोनों बराबर-बराबर EMI चुकाते हैं, तो शुरुआत में यह व्यवस्था अच्छी तरह चल सकती है. लेकिन पांच साल बाद इनमें से एक भाई या बहन किसी दूसरे शहर में चला जाए, शादी हो जाए, किसी दूसरे निवेश के लिए पैसों की जरूरत पड़ जाए या वह इस व्यवस्था से बाहर निकलना चाहे, तो स्थिति बदल सकती है.
इसीलिए घर खरीदने से पहले ही यह तय कर लेना बेहतर है कि प्रॉपर्टी में किसका कितना हिस्सा होगा, डाउन पेमेंट और EMI में कौन कितना योगदान देगा और अगर भविष्य में कोई इस व्यवस्था से बाहर निकलना चाहे तो क्या प्रक्रिया होगी. इन बातों पर चर्चा किसी विवाद के बाद करने के बजाय शुरुआत में ही कर लेना समझदारी है.
यह समझना भी जरूरी है कि को-ऑनर और सह-उधारकर्ता हमेशा एक ही व्यक्ति नहीं होते. प्रॉपर्टी में मालिकाना हक उसके दस्तावेजों से तय होता है, जबकि Co-Borrower की जिम्मेदारी लोन की रकम चुकाने की होती है. कई लोन व्यवस्थाओं में प्रॉपर्टी के सभी Co-Owners का Co-Applicant होना भी जरूरी होता है.
अगर एक भाई या बहन प्रॉपर्टी बेचना चाहे तो?
कोई एक भाई या बहन अपनी मर्जी से पूरी संयुक्त प्रॉपर्टी बेचने का फैसला नहीं कर सकता, क्योंकि दूसरे मालिक के अधिकार भी जुड़े होते हैं. इसलिए पहले से यह तय करना बेहतर है कि अगर एक व्यक्ति बाहर निकलना चाहे तो क्या दूसरा उसकी हिस्सेदारी खरीद सकेगा, प्रॉपर्टी की कीमत कैसे तय होगी और अगर उस समय होम लोन अभी बाकी है, तो उससे बाहर निकलने का तरीका क्या होगा.
अगर एक भाई या बहन घर किराये पर देना चाहे तो?
दोनों मालिकों की सहमति होनी चाहिए कि प्रॉपर्टी को किराये पर दिया जाएगा या नहीं. साथ ही यह भी पहले से तय कर लेना चाहिए कि किराये की आमदनी और मेंटेनेंस का खर्च किस अनुपात में बांटा जाएगा, किरायेदार से जुड़ी जिम्मेदारियां कौन संभालेगा और अगर एक भाई या बहन खुद उस घर में रहना चाहे, जबकि दूसरा उसे किराये पर देना चाहता हो, तो ऐसी स्थिति में क्या किया जाएगा.
अगर एक भाई या बहन EMI देना बंद कर दे तो?
यह संयुक्त होम लोन से जुड़ा सबसे बड़ा जोखिम हो सकता है. अगर दोनों भाई-बहन Co-Borrower हैं, तो एक व्यक्ति के EMI में योगदान न देने से उसकी लोन चुकाने की जिम्मेदारी अपने आप खत्म नहीं हो जाती. EMI मिस होने की स्थिति में दूसरे Borrower को बकाया रकम पूरी करनी पड़ सकती है. लगातार भुगतान में चूक होने पर दोनों Borrowers के क्रेडिट रिकॉर्ड पर भी असर पड़ सकता है.
इसके अलावा कुछ और परिस्थितियों के लिए भी पहले से तैयारी करना जरूरी है. मसलन, अगर किसी एक भाई या बहन की मृत्यु हो जाए, वह आर्थिक परेशानी में आ जाए या लोन की अवधि के दौरान इस संयुक्त व्यवस्था से बाहर निकलना चाहे, तो क्या होगा?
इसलिए एक स्पष्ट समझौते में प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी, डाउन पेमेंट और EMI में योगदान, मेंटेनेंस का खर्च, किराये की आय, इंश्योरेंस, विरासत से जुड़े अधिकार और बाहर निकलने की प्रक्रिया जैसी बातों को पहले से शामिल करना बेहतर है.