रेपो रेट को लेकर SBI रिसर्च की एक पूर्व नीति रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया गया है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि RBI की 3 से 5 अगस्त के बीच होने वाली मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में रेपो रेट को अनचेंज रखने की संभावना है. इसके साथ ही इस बात के भी संकेत मिले हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था अप्रैल-जून तिमाही में उम्मीद से कहीं अधिक तेजी से बढ़ी है.
SBI रिसर्च की इस रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि 7% से अधिक होने की संभावना है, लेकिन स्थिर महंगाई, बाहरी अनिश्चितताओं और मुद्रा दबावों के कारण केंद्रीय बैंक के लिए सबसे संभावित परिणाम स्थिर हैं.
महंगाई पर अलर्ट RBI?
SBI रिसर्च का अनुमान है कि MPC अस्थिर ग्लोबल नजरिए के बावजूद यथास्थिति बनाए रखेगी. उसका अनुमान है कि अप्रैल-जून तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी से ज्यादा हो सकती है, जो गलोबल इकोनॉमी में भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका में धीमी ग्रोथ के बावजूद उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन है.
हालांकि, रिपोर्ट का मानना है कि महंगाई एक प्रमुख बाधा बनी हुई है. इसमें अनुमान लगाया गया है कि कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन (CPI) अगले 2 तिमाहियों में 5 फीसदी से ऊपर रहेगी और वित्त वर्ष 2027 के लिए एवरेज महंगाई लगभग 5 फीसदी के आसपास रहने की संभावना है. इन अनुमानों को देखते हुए, रिपोर्ट में कहा गया है कि RBI द्वारा नरम रुख अपनाने की संभावना नहीं है, क्योंकि तेल की ऊंची कीमतें, रुपये पर दबाव और अस्थिर कैपिटल फ्लो रिस्क पैदा करते रहेंगे.
कैपिटल फ्लो से भारत की बाहरी स्थिति मजबूत होगी
रिपोर्ट में बाह्य क्षेत्र में हो रहे सुधार पर भी प्रकाश डाला गया है. अनुमान है कि जुलाई के अंत तक लगभग 35 अरब डॉलर के कैपिटल से आरबीआई 24 जुलाई तक 12.5 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने में सक्षम रहा, साथ ही साथ बकाया अल्पकालिक एडवांस लोन को लगभग 13 अरब डॉलर तक कम करने में भी सफल रहा. SBI रिसर्च के अनुसार, इन उपायों से रुपये पर दबाव कम करने में मदद मिली है.
मजबूत हो सकता है रुपया
करेंसी के मोर्चे पर, रिपोर्ट का तर्क है कि रुपये में गिरावट आर्थिक मूलभूत सिद्धांतों की अपेक्षा कहीं अधिक हो चुका है. इसमें कहा गया है कि केंद्रीय बैंक ने बाजार के शॉर्ट टर्म बॉन्ड पर दबाव कम करने के लिए अपने फॉरवर्ड बुक की संरचना में सक्रिय रूप से बदलाव किया है और रुपये को मजबूत होने की अनुमति दी जानी चाहिए.
मानसून करेगा बाजार को सपोर्ट
एसबीआई रिसर्च घरेलू परिस्थितियों में सुधार की ओर भी इशारा करता है, जिससे विकास को समर्थन मिल सकता है. जुलाई में मानसून की अधिक बारिश से देशव्यापी वर्षा की कमी घटकर 13% रह गई है, जलाशयों का जलस्तर सामान्य हो गया है और खरीफ की बुवाई पिछले साल की तुलना में मामूली रूप से कम है, जो बेहतर फसल की संभावना दर्शाती है.
ग्लोबल स्तर पर रिस्क
ग्लोबल स्तर पर रिपोर्ट सतर्कता का रुख अपनाती है. इसमें वेस्ट एशिया संकट से हुए अनिश्चितता, सप्लाई में रुकावट, वस्तुओं की ऊंची कीमतें और अमेरिका की धीमी आर्थिक बढ़ोतरी को ऐसे फैक्टर्स के तौर पर बताया गया है, जो ग्लोबल फाइंनेशियल कंडीशन को कम बनाए रख सकते हैं.
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और लगातार व्यापार तनाव को भी बाजार में अस्थिरता बढ़ाने वाला कारक माना जा रहा है. कुल मिलाकर, SBI रिसर्च का निष्कर्ष है कि हालांकि भारत के विकास का नजरिया मजबूत बना हुआ है, लेकिन महंगाई के रिस्क, विनिमय दर संबंधी चिंताओं और वैश्विक अनिश्चितता के मौजूदा मिश्रण से आगामी एमपीसी बैठक में आरबीआई द्वारा नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखने की संभावना है.