एनर्जी सेक्टर के इतिहास में शुक्रवार को एक अहम मोड़ आया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुए समझौते के बाद पहली बार रूस का डीजल अमेरिका के लिए जा रहा है. क्रेमलिन ने शुक्रवार को बताया कि एक नए आयात समझौते के तहत रूसी डीजल लेकर पहला टैंकर अमेरिका के लिए रवाना हो गया है. यह घटनाक्रम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के दो हफ्ते बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बावजूद उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक समझौता किया है.
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा, "पहला तेल टैंकर ग्राहकों के लिए रवाना हो गया है, और आगे भी रेगुलर सप्लाई जारी रहेगी."
रूस की समाचार एजेंसी 'इंटरफैक्स' के अनुसार रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने इस हफ्ते की शुरुआत में बताया था कि पहली खेप में 40,000 टन डीजल होगा.
समुद्री फर्म 'केप्लर' के अनुसार, जहाज के संकेतों से पता चलता है कि वह न्यूयॉर्क की ओर जा रहा है और 7 नवंबर तक वहां पहुंच जाएगा.
जुलाई 2023 के बाद से अमेरिका पहुंचने वाली यह पहली रूसी डीजल खेप होगी.
यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि अमेरिका रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए भारत समेत दूसरे देशों पर टैरिफ लगा रहा था. माना जा रहा है कि इस डीजल से अमेरिकी एनर्जी मार्केट को राहत मिलेगी. जहां बढ़ी ईंधन की कीमते ट्रंप के लिए तनाव का कारण बनी हुई है.
इससे पहले अमेरिका ने यूक्रेन पर हमला करने के लिए रूस पर प्रतिबंध लगाया था. लेकिन अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतों को कंट्रोल करने के लिए ट्रंप ने रूस से ये सौदा किया है.
40,000 टन डीजल की इस खेप में लगभग 300,000 बैरल डीजल है. यह मात्रा अमेरिका की अर्थव्यवस्था में एक दिन में खपत होने वाले लगभग 40 लाख (4 मिलियन) बैरल डीजल का लगभग 7% है.
ऊर्जा नीति विशेषज्ञों का मानना है कि इस आयात समझौते से जिसके तहत ट्रंप का कहना है कि आने वाले महीनों में लाखों टन और रूसी डीजल अमेरिका पहुंचेगा ईंधन कीमतों में कोई खास कमी आने की संभावना नहीं है.
यूक्रेन द्वारा रूस की तेल रिफाइनरियों पर लगातार किए जा रहे लंबी दूरी के ड्रोन हमलों के कारण रूस के डीजल उत्पादन पर दबाव पड़ा है. इन हमलों की वजह से ईंधन की कमी हो गई थी, जो अब कुछ हद तक कम हो गई है. पिछले महीने ट्रंप ने कीव से इन हमलों को रोकने के लिए कहा था.
डीजल को लेकर अमेरिका के इस फैसले से यूक्रेन में चिंता और निराशा है. यूक्रेन ने अन्य देशों से अपील की है कि वे रूस पर प्रतिबंध और कड़े करें ताकि रूस की कमाई कम हो और वो युद्ध बंद करने पर मजबूर हो.
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने ट्रंप के इस फैसले को "मजबूत साझेदारों द्वारा लिया गया एक कमजोर फैसला" बताया है. डीज़ल समझौता नीति में एक अचानक आया बदलाव था. यह ट्रंप द्वारा एक व्यापक प्रतिबंध पैकेज पर कानून के रूप में हस्ताक्षर करने के कुछ ही हफ्तों बाद हुआ, जिसमें उन्हें रूसी तेल या प्राकृतिक गैस के टॉप पांच आयातकों पर 100% तक शुल्क लगाने का निर्देश दिया गया था. बाद में उन्होंने इन उपायों को रोक दिया.