कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Price) में फिर से आग लग गई है और इसकी बढ़ती कीमतों और रिटेल फ्यूल प्राइस में कोई बदलाव न होने का बड़ा असर देखने को मिल रहा है. इस संकट के चलते रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने अपने कुछ आउटलेट्स पर डीजल और पेट्रोल की बिक्री सीमित करना शुरू कर दिया है. नायरा के पेट्रोल पंपों पर अब 30 लीट से ज्यादा पेट्रोल नहीं लिया जा सकेगा.
पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर कैपिंग
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया है कि रियायंस बीपी और नायरा द्वारा उठाए गए पेट्रोल-डीजल सेल पर कैपिंग के इस कदम का उद्देश्य ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना और थोक खरीदारों को जमाखोरी करने से रोकना है. रिपोर्ट में मामले से जुड़े लोगों के हवाले से कहा गया है कि रूस की रोसनेफ्ट समर्थित Nayara Energy ने अपने फ्यूल स्टेशनों पर डीजल की खरीद 200 लीटर, जबकि पेट्रोल की खरीद सिर्फ 30 लीटर तक सीमित कर दी है.
रिलायंस इंडस्ट्रीज और बीपी के संयुक्त उद्यम, Reliance BP मोबिलिटी ने भी अपने कुछ आउटलेट्स पर डीजल की बिक्री प्रतिबंधित कर दी है. मिडिल ईस्ट संघर्ष के पहले चरण के दौरान अप्रैल में भी रिलायंस बीपी ने इसी तरह के प्रतिबंध लागू किए थे, जब होर्मुज स्ट्रेट से कच्चे तेल का प्रवाह बुरी तरह बाधित हो गया था. रिलायंस बीपी की ओर से कहा गया है कि ये उपाय ईंधन की समान उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा डिमांड की स्थितियों के जवाब में किए जा रहे हैं. खासतौर पर औद्योगिक और अन्य गैर-परिवहन उपयोगकर्ताओं से बढ़ती मांग के बीच ये कदम उठाए गए हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग
वेस्ट एशिया संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी सप्लाई में बाधाओं के कारण उत्पादन और व्यापार प्रभावित होने से वैश्विक गैसोलीन और डीजल की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है. कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर से उबाल आने लगा है. युद्ध की टेंशन कम नहीं हो रही है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता से जुड़े प्रस्ताव हर बार फेल हो रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर एक नजर डालें, तो Brent Crude Price करीब 107 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. मर्बन क्रूड का दाम तो 120 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया.
पेट्रोल पंपों पर मई से कीमतें स्थिर
रिपोर्ट की मानें, तो एक ओर जहां कच्चा तेल लगातार महंगा हो रहा है, तो वहीं पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कीमतें मई से अपरिवर्तित बनी हुई हैं. हालांकि रिफाइनर आधिकारिक तौर पर Petrol Pump पर कीमतें तय करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन सरकारी तेल कंपनियां आमतौर पर सरकार से परामर्श करके ही कीमतों में संशोधन करती हैं और निजी खुदरा विक्रेता भी आम तौर पर इसी मूल्य निर्धारण सिस्टम का पालन करते हैं.
पेट्रोल-डीजल पर कितना नुकसान?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने डीजल निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है और सितंबर के बाद भी इन प्रतिबंधों को बढ़ा सकता है. इसके साथ ही अमेरिका भी ईंधन निर्यात पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है. निजी रिटेल पेट्रोल-डीजल विक्रेता पहले से ही ईंधन को लागत मूल्य से कम पर बेच रहे थे. ICRA का अनुमान है कि बीते 9 सितंबर तक खुदरा विक्रेताओं को पेट्रोल पर लगभग 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 23 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा था.