प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने FY27 की पहली तिमाही में जीडीपी की तेज रफ्तार पर खुशी जाहिर करते हुए मंगलवार को देशवासियों को स्वदेशी का मंत्र दिया था. उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अगर जरूरत न हो, तो सोना न खरीदें (PM Modi Appeal On Gold), उनकी इस अपील के बाद ज्वेलरी इंडस्ट्री में हड़कंप सा मच गया है और खासतौर पर छोटे ज्वैलर्स और आभूषण कारीगरों को कारोबार ठप होने का डर सताने लगा है. इसे लेकर चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी CTI ने भी बड़ी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि देश में सोने की खपत घटकर 500 टन पर आ सकती है.
Gold की बिक्री पर होगा सीधा असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से गैर-जरूरी सोने की खरीदारी (Gold Buying) से बचने की अपील की है और इसके बाद देश की ज्वेलरी इंडस्ट्री में चिंता गहरा गई है. दिल्ली समेत देशभर के ज्वैलर्स, छोटे सर्राफा कारोबारी, गोल्ड मेकिंग से जुड़े कारीगर और ज्वेलरी मैन्युफैक्चरर्स का कहना है कि इस अपील का सीधा असर उनकी बिक्री और कारोबार पर पड़ सकता है.
व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के मुताबिक, प्रधानमंत्री की दूसरी अपील के बाद ज्वेलरी कारोबार से जुड़े सैकड़ों व्यापारियों ने अपनी चिंता जाहिर की है. इसक अध्यक्ष बृजेश गोयल के मुताबिक, कई कारोबारियों का कहना है कि शादी में सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि भारतीय परिवारों की परंपरा और सामाजिक जरूरत से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में खरीदारी में बड़ी गिरावट का असर सीधे ज्वैलर्स से लेकर मैन्युफैक्चरर्स, कारीगरों और सप्लाई चेन तक दिखाई दे सकता है.
शादी के सीजन से पहले बढ़ी चिंता
ज्वेलरी कारोबारियों की टेंशन आने वाले शादियों और त्योहारी सीजन को लेकर है. अक्टूबर-नवंबर से शादियों का सीजन शुरू होना है और परिवारों ने सोने और गहनों की खरीदारी की तैयारी अभी से शुरू कर दी है. CTI चेयरमैन बृजेश गोयल का कहना है कि ऐसे समय में सोना न खरीदने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील से ग्राहकों के बीच असमंजस और इंतजार की स्थिति पैदा हो सकती है. जबकि कई ग्राहक यह सोचकर खरीदारी टाल रहे हैं कि आने वाले समय में सोने के दाम और नीचे जा सकते हैं.
सबसे ज्यादा असर ज्वेलरी इंडस्ट्री से जुड़े छोटे कारोबारियों पर देखने को मिल सकता है. उनका कहना है कि बड़ी कॉरपोरेट ज्वेलरी कंपनियां आर्थिक रूप से मजबूत हैं, लेकिन हमारे लिए बिक्री गिरना बड़ी समस्या बन सकता है.
इतनी घट जाएगी सोने की खपत
भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है. CTI का कहना है कि देश में त्योहारों और शादियों के सीजन में Gold Jewellery की डिमांड तेज होती है. फिलहाल की बात करें, तो देश में हर साल करीब 700 से 800 टन सोने की खपत होती है. वहीं प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद कारोबारियों को आशंका है कि मौजूदा माहौल में यह खपत घटकर करीब 500 टन तक आ सकती है.
कारीगरों की सैलरी-किराये पर भी संकट
सोने के कारोबारियों के मुताबिक, अगर लंबे समय तक सोने की बिक्री प्रभावित रही, तो छोटे दुकानदारों के लिए कर्मचारियों की सैलरी, दुकान का किराया और अन्य खर्च निकालना तक मुश्किल हो सकता है. इससे रोजगार पर भी असर पड़ने की आशंका है. कुछ कारोबारियों ने दावा किया है कि PM Narendra Modi की इससे पहले मई महीने में की गई पहली अपील के बाद ही छोटे मैन्युफैक्चरर्स और रिटेलर्स के कारोबार में 60 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली है, अब फिर से उनके द्वारा की गई अपील से स्थिति और खराब हो सकती है.
अंगूठी-झुमके तक की खरीदारी टल रही
CTI के मुताबिक कई रिटेल ज्वैलर्स ने रिपोर्ट दी है कि ग्राहक अब छोटी खरीदारी भी टालने लगे हैं. उनका कहना है कि ग्राहक सोने के भाव में और गिरावट की उम्मीद में पहले से ही खरीदारी रोक रहे हैं. रिटेल कारोबारियों का दावा है कि बीते कुछ दिनों में ग्राहकों की आवाजाही बेहद कम रही है, जिससे उन्होंने नया स्टॉक मंगाना भी कम या बंद कर दिया है. हालात ये हैं कि 'जरूरत के बिना सोना न खरीदने' की पीएम की पहली अपनी के बाद ही कई पारंपरिक सोना कारीगरों ने कथित तौर पर ई-रिक्शा चलाना या कुलचा-छोले बेचना शुरू कर दिया. ऐसे में कारोबारी असमंजस में हैं इस दूसरी अपील के बाद आखिर क्या होगा.
CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने पीएम की अपील को ज्वेलरी इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका बताया है. उन्होंने कहा कि ऐसे समय में उद्योग को मौजूदा परिस्थितियों में अपनी व्यापारिक रणनीति बदलनी होगी. CTI महासचिव गुरमीत अरोड़ा और रमेश आहूजा का कहना है कि भारत में सोना सिर्फ एक कमोडिटी नहीं, बल्कि संस्कृति-परंपरा और खासतौर पर शादी-ब्याह से गहराई से जुड़ा हुआ है. ऐसे में सोने की खरीदारी में लंबे समय तक गिरावट का असर लाखों लोगों की आजीविका पर पड़ सकता है.