जीडीपी (GDP) यानी सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product) किसी देश की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख संकेतक है. यह एक निश्चित समय अवधि (आमतौर पर एक वर्ष या तिमाही) में किसी देश में उत्पन्न सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य (Total Monetary Value) को दर्शाता है.
जीडीपी के मुख्य घटक होते हैं- निजी उपभोग (Private Consumption - C)- जनता द्वारा खरीदी गई वस्तुएं और सेवाएं. निवेश (Investment - I)- कंपनियों द्वारा मशीनरी, भवन, फैक्ट्री आदि में किया गया निवेश और सरकारी व्यय (Government Spending - G): सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि पर खर्च.
भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर अमेरिकी अर्थशास्त्री ने बड़ा अनुमान जताया है और कहा है कि आने वाले 25 सालों India अमेरिका को भी पीछे छोड़ नंबर-1 पायदान पर पहुंच जाएगा.
भारत की GDP ग्रोथ को लेकर जारी बहस के बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताजा टिप्पणी अहम है. IMF ने भारत के नए आर्थिक डेटा सिस्टम को सकारात्मक बताया है और कहा है कि अपडेटेड IIP और PPI सीरीज से GDP के अनुमान और बेहतर हो सकते हैं.
दूसरे देश किस तरह से जीडीपी को मापते हैं? इसी साल मई में UN के बनाए एक एक्सपर्ट ग्रुप ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. इस रिपोर्ट में GDP से हटकर तरक्की को मापने के लिए ग्लोबल नियम को लागू करने की सिफारिश की थी.
भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% की मजबूत GDP ग्रोथ दर्ज की है. इस शानदार आंकड़े के बीच GDP की गणना और नई सीरीज को लेकर सवाल भी उठे. पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और कांग्रेस ने आंकड़ों पर सवाल खड़े किए, जबकि दो बड़े अर्थशास्त्रियों सुरजीत भल्ला और मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने हेरफेर के आरोपों को खारिज किया. हालांकि, दोनों ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनने के लिए मौजूदा ग्रोथ से कहीं तेज आर्थिक रफ्तार जरूरी होगी.
मायावती ने जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उनका कहना है कि विकास का असली फायदा गरीब और मेहनतकश जनता को मिलना चाहिए. अगर विकास का फायदा लोगों को नहीं मिलेगा, उन्हें अपनी जिंदगी में बदलाव महसूस नहीं होगा, तो करीब 140 करोड़ लोगों को 'धनवान सरकार की गरीब जनता' होने का बोझ ढोना पड़ेगा.
भारत की रियल फील जीडीपी ग्रोथ काफी कम है, जबकि यूरोप का ये आंकड़ा काफी ज्यादा है. यह दावा शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा का है. उनका यह बयान तब आया है, जब जीडीपी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं.
भारत के सर्विस सेक्टर में अगस्त के दौरान कारोबार की रफ्तार थोड़ी बढ़ी है. HSBC इंडिया सर्विसेज PMI जुलाई के 53.3 से बढ़कर 54.1 पर पहुंच गया. नए ग्राहक और ऑर्डर मिलने से कंपनियों को सहारा मिला. रोजगार के मोर्चे पर भी अच्छी खबर रही और नई नौकरियां देने की रफ्तार 15 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई.
भारत की 7.8% GDP ग्रोथ पर पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और कांग्रेस की आलोचना को वर्ल्ड बैंक के ईडी नीलकंठ मिश्रा ने 'अल्पज्ञान और सरासर गलत' बताया. गर्ग के दावों का हवाला देते हुए कांग्रेस ने सरकार पर अर्थव्यवस्था की तस्वीर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप लगाया है. वहीं नीलकंठ मिश्रा ने वाहन बिक्री, कर्ज, टैक्स कलेक्शन और निवेश के आंकड़ों के आधार पर अर्थव्यवस्था की मजबूती का दावा किया है.
भारत की पहली तिमाही की GDP ग्रोथ 7.8% रहने के बाद आंकड़ों की गणना को लेकर बहस तेज हो गई है. आजतक के डिबेट शो 'दंगल' में पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार समिति के सदस्य गौरव वल्लभ इस मुद्दे पर अपने-अपने तर्क रखे. गर्ग ने पुराने और नए आंकड़ों के अंतर का हवाला देते हुए 2.6% ग्रोथ का दावा किया, जबकि वल्लभ ने नई GDP सीरीज और बदली गणना पद्धति का बचाव किया.
PM Narendra Modi ने इस साल मई महीने में सोने की खरीदारी सिर्फ जरूरत पर करने की अपील की थी और मंगलवार को फिर इसे दोहराया है. इसके बाद ज्वेलरी इंडस्ट्री की चिंता बढ़ गई है.
आज का दंगल देश के विकास पर है, विकास की नई दर पर है. 2 दिन पहले देश में पहली तिमाही के आंकडे आए हैं. पिछले 3 साल के मुकाबले इस बार पहली तिमाही सबसे शानदार रही है. 7.8 फीसदी की विकास दर मिली है. पीएम मोदी खुश हैं. सारे मंत्री खुश हैं. पूरी बीजेपी खुश है कि मोदी सरकार के फैसलों के कारण यूकेन से लेकर ईरान युद्ध के संकट, सप्लाई चेन में रुकावट और तमाम चुनौतियों के बावजूद भारत की विकास की गति 8 फीसदी को छू रही है...लेकिन विपक्ष इस कामयाबी को सच नहीं मान रहा. विपक्ष कह रहा है कि इस विकास में देश का गरीब-नौजवान-बेरोजगार-किसान शामिल नहीं है. देखें...
अप्रैल-जून तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रही, जो RBI के 7% अनुमान से ज्यादा है. लेकिन इस आंकड़े पर अब सियासी और आर्थिक बहस छिड़ गई है. पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने ग्रोथ 2.6% बताकर सवाल उठाए, तो सरकार ने उनकी इस गणना को आंकड़ों के लिहाज से बेमतलब बताया.
भारत की पहली तिमाही की GDP ग्रोथ 7.8% रही, जो उम्मीद से बेहतर है. लेकिन क्या यह रफ्तार आगे भी कायम रह पाएगी? प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने ग्लोबल अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों और अल नीनो को अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौतियां बताया है.
GDP ग्रोथ की रेस में भारत ने एक बार फिर बड़े बड़ों को पछाड़ दिया है। पहली तिमाही के GDP ग्रोथ के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे। RBI के अनुमान से भी ज्यादा निकले। दुनिया में चलते 2-2 युद्ध के बीच भारतीय इकॉनमी ने साबित कर दिया कि भारत हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है…
आज आपको हम विकास की उस रेस से खबरदार करेंगे, जहां प्रधानमंत्री ने निराशवादी सियासत करने वालों पर वार किया है. आपको हम महंगाई की उस रेस से खबरदार करेंगे, जो GDP की रफ्तार के सामने चुनौती है. नौकरी की रेस में लगे बेरोजगारों की खबर भी है. और भ्रष्टाचार की रेस से भी खबरदार होना जरूरी है क्योंकि यूपी में पंजाब नेशनल बैंक की एक ब्रांच में दावा है कि 17 करोड़ के नकली नोट मिले हैं. देखें...
बीते कुछ महीनों में हंगामा इस बात का मचा था कि भारत की अर्थव्यवस्था में क्या तूफान आने वाला है ? लेकिन जब कल आए आंकड़ों में 2026-27 की पहली तिमाही की विकास दर 7.8% आयी तो आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोरदार पलटवार किया. प्रधानमंत्री ने अपने वीडियो संदेश में कहा - " भारत के भीतर, निराशा की गर्त में डूबे हुए लोग, झूठ की गूंज, चारों तरफ निराशा फैलाने में लगे हुए हैं " प्रधानमंत्री मोदी के ये शब्द - झूठ की गूंज, बहुत अहम है. राहुल गांधी इन दिनों छात्रों की गूंज कार्यक्रम कर रहे हैं, जिसमें उनके दावों को बीजेपी झूठ की गूंज कह रही है. राहुल गांधी ने ही 19 मई को भारत में आर्थिक तूफान आने का बयान दिया था. देखें...
Indian Economy तेज रफ्तार से भाग रही है, तो वहीं जीएसटी कलेक्शन से लगातार सरकार का खजाना भर रहा है. दो दिन में ही PM Modi Govt के लिए दो गुड न्यूज आई हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 सितंबर को भारत की 7.8% जीडीपी ग्रोथ पर खुशी जताते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने आत्मनिर्भरता और स्वदेशी को बढ़ावा देने की अपील करते हुए जरूरत न होने पर सोना खरीदने, विदेश में शादी और अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने की सलाह दी।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के जीडीपी के आंकड़े जारी किए गए हैं. इसमें देश की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7.8 फीसदी है.. जो अनुमान से भी ज्यादा है. इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को बधाई दी है. कहा है कि ये आंकड़े देश की तरक्की की गवाही दे रहे हैं.
PM Narendra Modi ने भारत की 7.8 फीसदी जीडीपी ग्रोथ को लेकर कहा है कि बड़ी-बड़ी चुनौतियों के बीच भी इंडियन इकोनॉमी तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है. इसके साथ ही उन्होंने स्वदेशी अपनाने पर भी जोर दिया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त को भारत की पहली तिमाही में जोरदार जीडीपी ग्रोथ को लेकर खुशी जाहिर की. उन्होंने कहा तमाम ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद देश की इकोनॉमी तेज रफ्तार के साथ आगे बढ़ रही है.