जीडीपी (GDP) यानी सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product) किसी देश की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख संकेतक है. यह एक निश्चित समय अवधि (आमतौर पर एक वर्ष या तिमाही) में किसी देश में उत्पन्न सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य (Total Monetary Value) को दर्शाता है.
जीडीपी के मुख्य घटक होते हैं- निजी उपभोग (Private Consumption - C)- जनता द्वारा खरीदी गई वस्तुएं और सेवाएं. निवेश (Investment - I)- कंपनियों द्वारा मशीनरी, भवन, फैक्ट्री आदि में किया गया निवेश और सरकारी व्यय (Government Spending - G): सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि पर खर्च.
अगस्त से कई रोजमर्रा के सामान और उपभोक्ता उत्पाद महंगे हो सकते हैं. बाजार विशेषज्ञों और कंपनियों के संकेतों के अनुसार एफएमसीजी उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, कारें और कुछ अन्य वस्तुओं की कीमतों में चरणबद्ध बढ़ोतरी की संभावना है. बढ़ती लागत, वैश्विक बाजार की स्थिति और सप्लाई चेन पर दबाव को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है. इससे आम लोगों के मासिक बजट पर असर पड़ सकता है.
China Economic Crisis: चीन की इकोनॉमी की रफ्तार धीमी पड़ती जा रही है. अप्रैल-जून तिमाही में China GDP Growth के आंकड़ों ने ड्रैगन की चिंता बढ़ाने का काम किया है, जबकि चीनी निर्यात में उछाल आया है.
France Debt Burden: दुनिया के अमीर देशों का बुरा हाल है. जहां अमेरिका कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है, तो वहीं अब एक्सपर्ट फ्रांस को लेकर बड़ी चेतावनी देते हुए नजर आ रहे हैं.
पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले 12 सालों में भारत की GDP, एयरपोर्ट और विश्वविद्यालयों की संख्या दोगुनी हुई है, जबकि एक्सपोर्ट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई. उन्होंने डिजिटल हेल्थ आईडी, आधार और यूपीआई जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का डिजिटल मॉडल दुनिया के कई देशों के लिए अध्ययन का विषय बन रहा है.
दुनियाभर में कोरोना महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व के संकट से विकास की रफ्तार धीमी पड़ गई है, लेकिन इन सबके बीच भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेज गति से आगे बढ़ रही है. भारत अब दुनिया भर के विकास का इंजन बन चुका है. इन 8 बड़ी वजहों से आज भारत पूरी दुनिया में सबसे आगे निकल रहा है.
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव की वजह से वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है जिससे अनिश्चितता भी बढ़ी है. यह अनिश्चितता आर्थिक विकास को प्रभावित कर रही है और आम जनता को आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
World Bank को भारत पर भरोसा है और अपनी ताजा रिपोर्ट में वैश्विक निकाय ने कहा है कि तमाम ग्लोबल चुनौतियों के बाद भी ये दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा.
वित्त वर्ष 2025 26 में भारत की अर्थव्यवस्था के लिए जीडीपी में 7.60 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है. यह वृद्धि आर्थिक विकास के संकेत हैं जो देश में आर्थिक सुधारों और नीतिगत समर्थन का परिणाम हो सकते हैं. वित्तीय वर्ष 2025 26 के दौरान यह वृद्धि भारत के आर्थिक प्रदर्शन को बेहतर स्थिति में दर्शाएगी और विकास के नए अवसर प्रदान करेगी.
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की इकोनॉमी ग्रोथ शानदार रही है. भारत की अर्थव्यवस्था इस वित्तीय वर्ष के दौरान 7.7 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी है. चौथी तिमाही में भी तेजी अच्छी रही है.
Warning For India: मिडिल ईस्ट युद्ध के असर से दुनिया के तमाम देशों में तेल-गैस का संकट है. भारत में भी इसका असर देखने को मिला है. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने क्रूड की कीमतों को लेकर भारत के लिए बड़ी चेतावनी दी है.
UN Report On Indian Economy: संयुक्त राष्ट्र की ओर से भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक रिपोर्ट आई है, जिसमें अर्थशास्त्रियों ने भारत के जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में कटौती की है. इसके साथ ही एक Good News भी दी है.
एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने भारत की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में बड़ी कटौती की है और इसके पीछे का बड़ा कारण अमेरिका-ईरान युद्ध से पैदा हुई रुकावट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बताया है.
वर्ल्ड वॉर-II के बाद पहली बार अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज GDP से आगे निकल गया है. ट्रंप के सामने बढ़ते कर्ज, ब्याज भुगतान और आर्थिक दबाव नई बड़ी चुनौती बनते दिख रहे हैं.
UBS Cuts India Growth Rate: विदेशी ब्रोकरेज फर्म यूबीएस ने भारत की जीडीपी ग्रोथ को लेकर अपनी रिपोर्ट जारी की है और इसमें India GDP Rate के पूर्वानुमान में बड़ी कटौती की है.
IMF की ओर से जारी दुनिया के तमाम देशों की जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों पर नजर डालें, तो इसमें भारत नंबर-1 पायदान पर काबिज है और इसकी ग्रोथ रेट चीन-अमेरिका से कहीं ज्यादा रहने का अनुमान है.
भारत में मुफ्त योजनाओं का पैमाना और वित्तीय भार तेजी से बढ़ रहा है, जिससे राज्यों का कर्ज और सब्सिडी बिल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. वहीं, कैश ट्रांसफर से गरीब परिवारों को लाभ भी मिला है. राजनीतिक रूप से मुफ्त योजनाएं चुनावी जीत का माध्यम बन गई हैं.
आईएमएफ की वर्ल्ड इकोनॉमी आउटलुक के नए आंकड़ों से पता चलता है कि भारत जीडीपी रैंकिंग में फिसलकर छठे पायदान पर पहुंच गया है. इस लिस्ट में सबसे ऊपर अमेरिका और उसके बाद चीन है.
भारत की अर्थव्यवस्था के विकास अनुमान को आईएमएफ ने बढ़ा दिया है और अनुमान लगाया है कि कैलेंडर वर्ष 2026 में भारत की जीडीपी 6.5 फीसदी की रफ्तार से बढ़ेगी.
विदेश से भारत के लिए आई गुड न्यूज, ग्लोबल टेंशन के बावजूद जानें किस रफ्तार से भागेगी इंडियन इकोनॉमी. World Bank ने कहा है कि इंडियन इकोनॉमी Fiscal Year 2026-27 में 6.6 फीसदी की रफ्तार से भागेगी
World Bank ने भारत के लिए गुड न्यूज दी है और अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि इंडियन इकोनॉमी तमाम वैश्विक चुनौतियों के बाद भी तेज रफ्तार से भागेगी. FY27 में इसका जीडीपी ग्रोथ रेट पहले के अनुमान से ज्यादा 6.6% रहेगी.
गोल्डमैन सैक्स ने भारत के विकास अनुमान, रुपये में गिरावट और महंगाई को लेकर बड़ी चेतावनी दी है. भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट अनुमान को घटाकर 5.9 फीसदी कर दिया है, जबकि युद्ध शुरू होने से पहले यह 7 फीसदी था.