जंग का असर केवल रणभूमि तक सीमित नहीं रहता. इसकी कीमत आम लोगों को भी चुकानी पड़ती है. ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव ने दुनियाभर के तेल बाजार को झटका दिया है. नतीजा ये हुआ है कि कई देशों में पेट्रोल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और इसका असर लोगों के रोजमर्रा के खर्च पर भी दिखने लगा है. दुनियाभर में पेट्रोल, डीजल, बिजली और प्राकृतिक गैस की खुदरा कीमतों को ट्रैक करने वाली अंतरराष्ट्रीय वेबसाइट 'GlobalPetrolPrices' के मुताबिक 170 में से 145 देशों में फरवरी में शुरु हुई जंग के बाद पेट्रोल महंगा हो गया है. इस दौरान भारत में भी कीमतें तो बढ़ीं हैं, लेकिन इसका असर दूसरे देशों के मुकाबले सीमित रहा है.
दुनिया के 145 देशों में पेट्रोल महंगा
GlobalPetrolPrices के मुताबिक फरवरी के आखिर से अगस्त के बीच दुनिया के ज्यादातर देशों में पेट्रोल महंगा हुआ है. इस दौरान 170 देशों में से 145 देशों में पेट्रोल के दाम बढ़े हैं. म्यांमार में कीमतों में 56 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. भूटान में 55 परसेंट और क्यूबा में 51 फीसदी का उछाल आया. UAE में 50 परसेंट और नाइजीरिया में 48 फीसदी तक दाम बढ़ गए हैं.
अमेरिका में भी महंगाई का झटका
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका में भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है. अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 2.94 डॉलर से 39 फीसदी बढ़कर 4.09 डॉलर प्रति गैलन हो गई है. पहले जहां 50 डॉलर में करीब 718 किलोमीटर की ड्राइविंग संभव थी, वहीं अब उतनी ही रकम में करीब 536 किलोमीटर की दूरी तय हो रही है जिससे पहले के मुकाबले उतनी ही रकम में 182 किलोमीटर कम सफर संभव हो पा रहा है.
भारत भी इसके असर से पूरी तरह अछूता नहीं रहा. मध्य पूर्व में बढ़े तनाव और कच्चे तेल की महंगाई का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है. दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की कीमत फरवरी के मुकाबले करीब साढ़े सात रुपये प्रति लीटर बढ़ी. हालांकि दुनिया के कई देशों में जहां पेट्रोल 40 से 50 फीसदी तक महंगा हुआ, वहीं भारत में ये इजाफा महज 8 फीसदी का रहा.
हर सेक्टर पर पड़ रहा असर
तेल की कीमत बढ़ने का असर केवल गाड़ी चलाने तक सीमित नहीं रहता है. खेती से लेकर फैक्ट्री और ट्रांसपोर्ट तक, तकरीबन हर सेक्टर किसी ना किसी तौर पर ईंधन पर निर्भर है. यही वजह है कि कच्चा तेल महंगा होते ही सामान बनाने और उसे बाजार तक पहुंचाने की लागत भी बढ़ जाती है. जानकारों के मुताबिक दुनिया की अर्थव्यवस्था की असली ताकत ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन है. जब ऊर्जा महंगी होती है तो उसका असर पूरी आर्थिक गतिविधि पर पड़ता है.
तेल सिर्फ ईंधन नहीं, कई उत्पादों की बुनियाद
तेल का इस्तेमाल फूड पैकेजिंग, प्लास्टिक बोतलें और मेडिकल सिरिंज बनाने में होता है. वहीं पॉलिएस्टर और नायलॉन जैसे सिंथेटिक कपड़ों की अहम कच्ची सामग्री भी तेल ही है. जबकि लिपस्टिक, वैसलीन और कई कॉस्मेटिक उत्पादों में पेट्रोलियम आधारित तत्व का यूज होता है. डिटर्जेंट, पेंट और कई घरेलू उत्पाद भी तेल पर निर्भर हैं.
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लंबे समय तक बनी तेजी केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहती. इसका असर ट्रांसपोर्ट, खाद, पैकेजिंग, रोजमर्रा के सामान और आखिरकार महंगाई पर भी पड़ सकता है. यानी मध्य पूर्व की जंग जितनी लंबी खिंचेगी, उसकी आर्थिक कीमत भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को उतनी ही ज्यादा चुकानी पड़ सकती है.
GlobalPetrolPrices क्या है?
GlobalPetrolPrices एक वेबसाइट है जो दुनियाभर में पेट्रोल, डीजल, बिजली और प्राकृतिक गैस की खुदरा कीमतों को ट्रैक करती है. यह 150 से ज्यादा देशों में ईंधन की कीमतों का साप्ताहिक अपडेट देती है. इसके आंकड़े मैन्युअली कई स्रोतों से जुटाए और क्रॉस-चेक किए जाते हैं. मीडिया और अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा अक्सर इसके डेटा का इस्तेमाल किया जाता है.