जगह नीदरलैंड में एम्सटलवीन का वेगनर स्टेडियम और मौका था हॉकी वर्ल्डकप में भारत और पाकिस्तान के बीच अहम मुकाबले का. यह मुकाबला पाकिस्तान के लिए करो या मरो जैसा था, क्योंकि अगर पाकिस्तानी टीम हारी तो उसका टूर्नामेंट से बाहर होना तय था. यही हुआ भी. भारत ने पाकिस्तान को 5-3 हराकर पड़ोसी देश को हॉकी वर्ल्डकप की रेस से बाहर कर दिया. लेकिन, असली खेल यही से शुरू होता है. यहां वह सब हुआ, जो क्रिकेट वाली देशभक्ति और राष्ट्रवाद में इन दिनों सख्त मनाही है. खेल को खेल की भावना से खेला गया. उसमें कुछ और नहीं देखा गया.
इस मुकाबले के बाद भारत और पाकिस्तान टीम के खिलाड़ियों ने बाकायदा हाई-फाइव किया. वो औपचारिकताएं पूरी की, जो किसी खिलाड़ी को करनी चाहिए. लेकिन यहां किसी ने कोई आपत्ति नहीं जताई. जरा सोचिए... भारत-पाकिस्तान की हॉकी प्रतिद्वंद्विता क्रिकेट जितनी ही पुरानी है. ऐतिहासिक रूप से देखें तो कहीं ज्यादा कड़ी और प्रतिस्पर्धी भी रही है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भी दोनों टीमें कई बार एक-दूसरे के खिलाफ खेल चुकी हैं. सीनियर से लेकर अंडर-19 और जूनियर स्तर पर तक. इन तमाम मुकाबलों में खिलाड़ियों ने हाई-फाइव किए, गले मिले और खेल के दौरान कभी-कभार एक-दूसरे की पीठ भी थपथपाई. लेकिन किसी ने इस पर नाराजगी नहीं जताई. न ही हॉकी इंडिया या टीम की देशभक्ति पर सवाल उठाए.
ऐसे में सवाल उठता है कि सिर्फ क्रिकेट को ही क्यों निशाना बनाया जाता है. मई 2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट और हॉकी के कई मुकाबले हुए. क्रिकेट में (जैसे सितंबर 2025 एशिया कप) भारतीय खिलाड़ियों ने राजनीतिक तनाव के चलते पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने से परहेज किया. भारतीय खिलाड़ियों की पाकिस्तानियों से नो-हैंडशेक पॉलिसी यहीं से ही शुरू हुई थी, जब सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली भारतीय क्रिकेट टीम ने सलमान अली आगा से हाथ नहीं मिलाया था. भारतीय क्रिकेट टीम ने पहलगाम हमले के पीड़ितों के प्रति एकजुटता दिखाते हुए पाकिस्तानी खिलाड़ियों के साथ पारंपरिक हाथ मिलाने की प्रक्रिया से दूरी बनाए रखी. आईसीसी विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भी नो हैंडशेक पॉलिसी देखने को मिली. टॉस के समय भारतीय कैप्टन हरमनप्रीत कौर ने पाकिस्तानी कप्तान फातिमा सना से हाथ नहीं मिलाया.
हालांकि, जब यही खिलाड़ी विदेश में लीड खेल रहे होते हैं, तो उन्हें कोई परहेज नहीं होता. इंग्लैंड में द हंड्रेड लीग के एक मुकाबले के बाद मैदान से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा. नॉर्दर्न सुपरचार्जर्स की ओर से खेलने वाली भारतीय स्टार बैटर जेमिमा रोड्रिग्स और बर्मिंघम फिनिक्स की पाकिस्तानी ऑलराउंडर फातिमा सना मैच खत्म होने के बाद एक-दूसरे से गर्मजोशी से गले मिलती नजर आईं. 23 जून 2026 को भारत और पाकिस्तान की हॉकी टीमों के बीच लंदन में प्रो-लीग मुकाबला खेला गया था. उस मैच के दौरान भी दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच हाई-फाइव देखने को मिला था.
फिर सवाल वही उठता है कि आखिर समस्या कहां है? एक तरफ हम पड़ोसी मुल्क की हरकतों का जवाब देने के लिए एक-दूसरे के देश में जाकर क्रिकेट में द्विपक्षीय सीरीज खेलने पर पाबंदी लगाते हैं. दूसरी तरफ आईसीसी के आयोजनों में खेलने से हमें कोई दिक्कत नहीं होती. जिस बात को लेकर हम क्रिकेट के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं, क्या वह संवदेनशीलता दूसरे खेलों में कम हो जाती है. भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मुकाबला होते ही खिलाड़ियों के हर हाव-भाव को राष्ट्रवाद की कसौटी पर तौला जाने लगता है. हाथ मिलाया तो सवाल, नहीं मिलाया तो वाहवाही. मुस्कुरा दिए तो बहस, बात कर ली तो देशभक्ति पर सवाल. ऐसा लगता है जैसे क्रिकेट का मैदान खेल का मैदान कम और राष्ट्रवाद की अग्निपरीक्षा का केंद्र ज्यादा बन जाता है. यही कसौटी जब हॉकी, कबड्डी या दूसरे खेलों में भारत-पाकिस्तान के खिलाड़ियों पर लागू नहीं होती, तो सवाल उठना स्वाभाविक है.
दरअसल, यह समझना जरूरी है कि प्रतिद्वंद्विता और दुश्मनी एक ही चीज नहीं हैं. खेल का मूल ही यही है कि मैदान पर आप पूरी ताकत से मुकाबला करें, लेकिन मुकाबला खत्म होने के बाद सामने वाले खिलाड़ी के कौशल और मेहनत का सम्मान करें. एक खिलाड़ी का दूसरे खिलाड़ी से हाथ मिला लेना उसके देश के प्रति प्रेम को कम नहीं करता और न ही हाथ न मिलाना अपने आप में देशभक्ति का अंतिम प्रमाण बन जाता है. इस लिहाज से बहस यह नहीं होनी चाहिए कि किसने हाथ मिलाया और किसने नहीं, बल्कि यह होनी चाहिए कि क्या हम देशभक्ति को इतना संकीर्ण बना रहे हैं कि खेल भावना के लिए भी जगह कम पड़ जाए. अगर हॉकी का खिलाड़ी पाकिस्तानी प्रतिद्वंद्वी से हाथ मिलाता है तो वह अपनी राष्ट्रीय पहचान नहीं भूलता, ठीक उसी तरह क्रिकेटर का हाथ न मिलाना भी अपने आप में देशभक्ति का प्रमाण नहीं हो सकता.
बड़ा सवाल यही है कि आखिर क्रिकेट को लेकर ही इस तरह का विरोध क्यों नजर आता है.