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Meta, Alibaba, SpaceX... अब Jio प्लेटफॉर्म्स, इस खास क्लब में शामिल होने जा रही कंपनी

Jio IPO Records: जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ ने कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. करीब ₹10.3 लाख करोड़ के वैल्यूएशन के साथ जियो दुनिया की उन चुनिंदा फाउंडर-लेड कंपनियों में शामिल होने जा रही है, जिनका आईपीओ के समय वैल्यूएशन 100 अरब डॉलर से ज्यादा था. इस क्लब में मेटा, अलीबाबा और स्पेसएक्स शामिल हैं.

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जियो दुनिया की उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल होने जा रही है, जिनका आईपीओ के समय वैल्यूएशन 100 अरब डॉलर से ज्यादा था. (File Photo)
जियो दुनिया की उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल होने जा रही है, जिनका आईपीओ के समय वैल्यूएशन 100 अरब डॉलर से ज्यादा था. (File Photo)

रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) शेयर मार्केट में उतरने से पहले ही दुनिया की चुनिंदा कंपनियों में शामिल होने जा रही है. कंपनी का ₹30,213 करोड़ का आईपीओ निवेशकों के बीच जबरदस्त लोकप्रिय रहा और इसे करीब ₹7 लाख करोड़ की बोलियां मिलीं. खास बात यह है कि आईपीओ के समय 100 अरब डॉलर से ज्यादा का वैल्यूएशन हासिल करने वाली फाउंडर-लेड कंपनियों के चुनिंदा समूह में जियो चौथी कंपनी बनने की ओर है. इस सूची में मेटा, अलीबाबा और स्पेसएक्स शामिल हैं.

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में निवेशकों ने खूब दिलचस्पी दिखाई. शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, एंकर इंवेस्टर्स की बोलियों समेत इश्यू के लिए करीब ₹7 लाख करोड़ की मांग आई. आईपीओ में करीब 1.34 करोड़ आवेदन मिले, जो भारतीय शेयर बाजार में किसी आईपीओ के लिए एक रिकॉर्ड है. इश्यू खुलने के महज 100 मिनट के भीतर ही यह पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया. इस तरह जियो का आईपीओ भारत में सबसे तेजी से सब्सक्राइब होने वाला पब्लिक इश्यू बन गया. बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद इसे घरेलू और वैश्विक निवेशकों से मजबूत समर्थन मिला.

बड़े से छोटे निवेशकों तक की दिलचस्पी

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में संस्थागत निवेशकों की मांग सबसे ज्यादा रही. एंकर निवेशकों को छोड़कर क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) यानी बड़े संस्थागत निवेशकों ने करीब ₹3.87 लाख करोड़ की बोलियां लगाईं. आईपीओ में अलग-अलग निवेशक श्रेणियों की ओर से मिली मांग इस प्रकार रही:

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संस्थागत निवेशक (QIB): करीब ₹3.87 लाख करोड़ की बोलियां, एंकर निवेशकों को छोड़कर

हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (HNI): करीब ₹57,000 करोड़

रिटेल निवेशक: करीब ₹26,000 करोड़

मौजूदा रिलायंस शेयरधारक: करीब ₹19,000 करोड़

कंपनी के कर्मचारी: करीब ₹1,450 करोड़

इन आंकड़ों से पता चलता है कि जियो के आईपीओ में बड़े संस्थागत निवेशकों के साथ-साथ छोटे निवेशकों और कंपनी के कर्मचारियों ने भी दिलचस्पी दिखाई.

IPO के समय ₹10.3 लाख करोड़ वैल्यूएशन

आईपीओ के अपर प्राइस बैंड पर जियो प्लेटफॉर्म्स का वैल्यूएशन करीब ₹10.3 लाख करोड़ यानी 100 अरब डॉलर से ज्यादा बैठता है. इस आधार पर कंपनी भारत की सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनियों में शामिल होने जा रही है. जियो से पहले दुनिया में सिर्फ मेटा, अलीबाबा और स्पेसएक्स जैसी कंपनियां आईपीओ के समय 100 अरब डॉलर या उससे अधिक के वैल्यूएशन वाले फाउंडर-लेड बिजनेस रहे हैं. जियो प्लेटफॉर्म्स इस क्लब में शामिल होने वाली चौथी कंपनी बनने की ओर है. यह उपलब्धि कंपनी के डिजिटल और टेलीकॉम बिजनेस के आकार के साथ-साथ निवेशकों की उस उम्मीद को भी दिखाती है, जिसके तहत जियो को भविष्य में टेक्नोलॉजी, डिजिटल सर्विसेज और अन्य नए क्षेत्रों में विस्तार करने वाली कंपनी के रूप में देखा जा रहा है.

जियो ने 2020 में भी जुटाए थे 20 अरब डॉलर

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जियो प्लेटफॉर्म्स ने इससे पहले 2020 में भी बड़ी रकम जुटाकर वैश्विक निवेशकों का ध्यान खींचा था. उस समय कंपनी ने 13 रणनीतिक और निजी इक्विटी निवेशकों से करीब 20 अरब डॉलर जुटाए थे. अब आईपीओ के जरिए कंपनी सार्वजनिक शेयर बाजार में अपनी जगह बनाने जा रही है. इस बार मजबूत मांग ऐसे समय में आई है, जब भारतीय शेयर बाजार में गिरावट और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव बना हुआ है. आईपीओ में निवेश के लिए विदेशी निवेशकों द्वारा डॉलर को रुपये में बदलने से बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ने की बात भी कही गई है. इससे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच रुपये को कुछ समर्थन मिलने की संभावना जताई गई.

जियो की लिस्टिंग से रिलायंस ग्रुप को फायदा

जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग का असर सिर्फ कंपनी तक सीमित नहीं रहने वाला है. इसके शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद रिलायंस ग्रुप की सभी लिस्टेड कंपनियों का जॉइंट मार्केट वैल्यूएशन भारत के कारोबारी समूहों में सबसे बड़ा होने की उम्मीद है. जियो का आईपीओ रिलायंस इंडस्ट्रीज के डिजिटल और टेलीकॉम बिजनेस के लिए एक अहम पड़ाव है. कंपनी के बड़े कस्टमर बेस और टेक्निकल सर्विसेज के विस्तार की योजनाओं के बीच अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद कंपनी का प्रदर्शन कैसा रहता है और वह अपने वैल्यूएशन को किस तरह बनाए रखती है.

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