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Iran Big Fear: चीन बनेगा US का हथियार, ईरान को सता रहा ये डर... ऐसा क्या करने वाले हैं ट्रंप?

US-Iran War के चलते पहले ही ईरान में महंगाई का कोहराम मचा है और देश को कई आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. अब Donald Trump ने फिर से ईरानियों में डर का माहौल बना दिया है.

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ट्रंप की नई प्रतिबंध धमकियों से बढ़ गई ईरान की टेंशन. (Photo: Reuters/Pexels)
ट्रंप की नई प्रतिबंध धमकियों से बढ़ गई ईरान की टेंशन. (Photo: Reuters/Pexels)

अमेरिका-ईरान के बीच हमलों को सिलसिला भले ही थमा नजर आ रहा है, लेकिन मिडिल ईस्ट टेंशन अभी भी बनी हुई है, क्योंकि अमेरिकी धमकियों का सिलसिला लगातार जारी है. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के उस बयान के बाद ईरान खौफ में नजर आ रहा है, जिसमें उन्होंने कहा कि वाशिंगटन अगले सप्ताह से ही तेहरान पर ऐसे उपाय और प्रतिबंध लागू करेगा, जो पहले कभी नहीं देखे गए. तो वहीं Donald Trump ने Iran को कड़ी आर्थिक मार देने की बात कही है. बता दें अमेरिका से युद्ध के चलते ईरान पहले से ही महंगाई, करेंसी क्रैश समेत अन्य आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा है. 

ईरान के लोगों में अब यह आशंका बढ़ रही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए जाने वाले कड़े आर्थिक प्रतिबंध उनकी आर्थिक कठिनाइयों को और बढ़ा सकते हैं. इससे अशांति फिर से भड़का सकती है और इस्लामी गणराज्य की वैधता कमजोर हो सकती है. भले ही ईरान अमेरिका के साथ करीब 6 महीने के युद्ध के बाद शांति वार्ता की तरफ बढ़ रहा है. 

ट्रंप-स्कॉट बेसेंट के बयान से सहमा ईरान 
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बीते दिनों कहा था कि वाशिंगटन अगले सप्ताह से ही तेहरान पर ऐसे प्रतिबंध लागू करेगा, जो पहले कभी नहीं देखे गए होंगे. इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को तगड़ी आर्थिक मार देने की धमकी दे डाली है. हालांकि, अमेरिका की ओर से इन तमाम धमकियों में अभी तक ये स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन प्रतिबंध उपायों में क्या-क्या शामिल होगा?

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Donald Trump-Scott Basent

अमेरिका का ये बिल भी बढ़ाएगा संकट
ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों के खिलाफ टैरिफ लगाने की भी धमकी भी दी है. इसे लेकर सीनेट द्वारा पारित एक प्रतिबंध विधेयक उन्हें 100% टैरिफ लगाने की नए अधिकार दे सकता है. इस विधेयक को अभी भी प्रतिनिधि सभा की मंजूरी नहीं मिल पाई है. 

इसके अलावा कुछ अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों ने ईरान के पड़ोसी देशों को शामिल करते हुए जमीनी नाकाबंदी का प्रस्ताव भी रखा है. इस तरह के कदम से फूड प्रोडक्ट्स, एनर्जी और कपड़ों के आयात पर प्रतिबंध लग सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह के प्रतिबंध लागू करना मुश्किल होगा.

युद्ध की आग में ऐसे झुलसा ईरान
अमेरिका-इजरायल के साथ जब ईरान का युद्ध शुरू हुआ, उससे पहले ही Iran तगड़ी महंगाई, क्रैश होती करेंसी, एनर्जी की कमी, प्रतिबंधों और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहा था. ऐसे हालात से जूझते ईरान में अमेरिकी संघर्ष ने बुनियादी ढांचे को और भी अधिक नुकसान पहुंचाया है. व्यापार-उत्पादन को बाधित करते हुए पुनर्निर्माण की लागत को चरम पर पहुंचा दिया है. 

जुलाई में सालाना महंगाई दर ईरान में 66% तक पहुंच गई, जबकि उपभोक्ता कीमतें पिछले वर्ष की तुलना में 87.9% ज्यादा रिकॉर्ड की गईं. खाद्य महंगाई 128% के शिखर पर पहुंच चुकी है. फरवरी के अंत में शुरू हुए युद्ध के बाद मार्च में किराए में सालाना आधार पर 31% का उछाल आया, तो वहीं न्यूनतम मजदूरी में लगभग 60% की बढ़ोतरी के बाद भी ईरानी करेंसी रियाल के वैल्यूएशन ने कामगारों की क्रय शक्ति को कम किया है. 

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Iran Economic Crisis

क्या चीन बनेगा ट्रंप का हथियार? 
ईरान को आर्थिक रूप से और कमजोर करने के लिए डोनाल्ड ट्रंप कई कदम उठा सकते हैं. इनमें एक ये है कि US चीन की उन स्वतंत्र रिफाइनरियों को निशाना बनाए. जो ईरान के तेल निर्यात का एक बड़ा हिस्सा खरीदती हैं. बता दें कि चीन ईरान के निर्यातित तेल का 80% से अधिक का खरीदार है. इसके अलावा अमेरिका इन खरीदारों पर सेकंडरी प्रतिबंध लगाने का कदम उठा सकता है. 

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ईरानी तेल राजस्व और हथियार संबंधी लेनदेन में शामिल चीनी बैंकों पर भी कड़े प्रतिबंध लगा सकता है. इस तरह के कदम से बड़े वित्तीय संस्थानों पर दबाव पड़ सकता है. हालांकि, यहां पेंच ये है कि अमेरिका की ओर से उठाए जाने वाले ऐसे किसी भी कदम से चीन की तरफ से जवाबी कार्रवाई का खतरा है.

Trump China Iran

न सिर्फ China, बल्कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर लागू प्रतिबंधों के बाद भी उसकी मदद करने वाली ईरानी और विदेशी कंपनियों के खिलाफ बैन विस्तार कर सकता है. एक्सपर्ट इसे 'व्हैक-ए-मोल' (Whack-A-Mole) स्ट्रेटजी बताते हैं, क्योंकि ईरान ने प्रतिबंधित कंपनियों की जगह बार-बार नई संस्थाएं बनाई हैं.

आम आदमी से राष्ट्रपति तक डर
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने खुद पिछले सप्ताह दबाव को स्वीकार करते हुए कहा था कि ईरान की समस्याएं कई गुना बढ़ गई हैं, जबकि उसकी आय में गिरावट आई है. युद्ध के दौरान पुलों पर हुए हमलों ने सड़क परिवहन को बाधित कर दिया है. तो देश के अधिकारियों और निवासियों ने रॉयटर्स को बताया है कि ईरानी नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि बिगड़ती आर्थिक स्थिति देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की एक और लहर को जन्म दे सकती है. 

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