भारतीय रेलवे में माल ढुलाई को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच संसद की स्थायी समिति ने रेलवे मंत्रालय से कम खनन और कम औद्योगिक गतिविधि वाले क्षेत्रों के लिए जोन-वाइज रणनीति तैयार करने को कहा है. समिति की 9वीं रिपोर्ट 10 अगस्त को संसद में पेश की गई. इसमें कहा गया है कि रेलवे से पहले भी ऐसे क्षेत्रों के लिए अलग कदम उठाने को कहा गया था, लेकिन अब समिति ने इसके लिए ज्यादा स्पष्ट रोडमैप मांगा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रेलवे में रोजाना औसतन चलने वाली मालगाड़ियों की संख्या 2021-22 में 4,968 थी, जो 2024-25 में बढ़कर 6,789 हो गई. इसके बावजूद समिति का मानना है कि माल ढुलाई की क्षमता और कम मांग वाले क्षेत्रों में माल ढुलाई कारोबार बढ़ाने के लिए और रणनीतिक कदम उठाने की जरूरत है.
समिति ने अपनी पिछली 6वीं रिपोर्ट में भारतीय रेलवे की माल ढुलाई से होने वाली कमाई बढ़ाने और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के डेवलपमेंट से जुड़ी 12 टिप्पणियां और सिफारिशें की थीं. रेल मंत्रालय ने इन सिफारिशों पर क्या कार्रवाई की गई इसे लेकर जानकारी दी थी, जिनके आधार पर समिति ने अपनी 9वीं रिपोर्ट में आगे की टिप्पणी की है.
मल्टीट्रैकिंग और DFC से बढ़ेगी क्षमता
संसदीय समिति ने रेलवे की ओर से मल्टीट्रैकिंग, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के ऑपरेशन और यार्ड के आधुनिकीकरण जैसे कदमों की सराहना की है. रिपोर्ट के मुताबिक, इन पहलों से रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने और माल ढुलाई को अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश हो रही है.
मंत्रालय ने बताया कि जोनल रेलवे, डिविजनल रेलवे और बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट्स से मिलने वाले इनपुट के आधार पर समय-समय पर डेटा का एनालिसिस किया जाता है. इसका इस्तेमाल नीतियों में बदलाव, फ्रेट दरों को तर्कसंगत बनाने और जरूरत पड़ने पर इंसेंटिव स्कीम तैयार करने के लिए किया जाता है. हालांकि, समिति ने फ्रेट दरों की सालाना समीक्षा को संस्थागत बनाने की सिफारिश की है. इसके लिए वस्तु-वार मांग, बाजार में प्रतिस्पर्धा, लॉजिस्टिक्स लागत और रेलवे के ऑपरेशनल खर्च का विश्लेषण करने को कहा गया है.
प्राइवेट वैगन इन्वेस्टमेंट स्कीम की तारीफ
समिति ने कोयला ढुलाई के लिए रेलवे की ओर से रेक और वैगन उपलब्ध कराने की नीति का भी उल्लेख किया. साथ ही प्राइवेट वैगन इन्वेस्टमेंट स्कीम के जरिए निजी निवेश को बढ़ावा देने की पहल की सराहना की. रिपोर्ट में रेलवे से यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि नेशनल कोल लॉजिस्टिक्स प्लान एंड पॉलिसी के तहत भारत की कोयला ढुलाई को एकीकृत मल्टीमॉडल नेटवर्क के रूप में विकसित करने की योजना कैसे लागू होगी. इसके अलावा 2012 में लाई गई PPP नीति की मौजूदा स्थिति और उसमें किए जा रहे संशोधनों की जानकारी भी मांगी गई है.
फीडर रूट्स को मजबूत करने पर जोर
रेल मंत्रालय ने समिति को बताया कि मौजूदा फीडर रूट्स पर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है. साथ ही ऑपरेशनल सुधार किए जा रहे हैं, ताकि औद्योगिक केंद्रों और DFC नेटवर्क के बीच माल की आवाजाही आसान हो सके. यह जवाब मालगाड़ियों की औसत रफ्तार और नेटवर्क की क्षमता को लेकर उठे सवालों के बीच आया है. समिति ने रेलवे से फ्रेट नेटवर्क की दक्षता बढ़ाने और मालगाड़ियों की आवाजाही में देरी कम करने पर लगातार ध्यान देने को कहा है.
क्रू की कमी दूर करने की जरूरत
समिति ने माल ढुलाई नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए लोको क्रू की कमी को जल्द दूर करने पर भी जोर दिया है. उसके मुताबिक, पर्याप्त क्रू उपलब्ध होने से ट्रेन संचालन में देरी कम होगी, थ्रूपुट बढ़ेगा और DFC नेटवर्क पर मालगाड़ियों की आवाजाही ज्यादा सुचारु हो सकेगी. मंत्रालय के मुताबिक, 2024 और 2025 में 28,769 असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) और 6,560 गुड्स ट्रेन मैनेजर के पदों की रिक्तियां अधिसूचित की गईं. मंत्रालय ने यह भी बताया कि 2024 में विज्ञापित 18,799 ALP पदों के मुकाबले बड़ी संख्या में उम्मीदवारों का चयन किया जा चुका है. सरकार का कहना है कि भर्ती से क्रू की कमी को काफी हद तक दूर करने में मदद मिलेगी.