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रोजगार के मोर्चे पर राहत... बेरोजगारी दर घटकर 5.1% पर आई, वर्क फोर्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

भारत के रोजगार बाजार में जुलाई 2026 के दौरान सुधार के संकेत मिले हैं. 15 साल और उससे अधिक उम्र की आबादी में बेरोजगारी दर घटकर 5.1% रह गई. वहीं, लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) बढ़कर 55.4% और वर्कर पॉपुलेशन रेश्यो (WPR) 52.5% हो गया. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार से जुड़े संकेतकों में खास सुधार दिखा. महिलाओं की वर्कफोर्स भागीदारी भी बढ़ी है.

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भारत में रोजगार के हालात बेहतर हुए हैं; जुलाई 2026 में बेरोजगारी घटी है और वर्कफोर्स में लोगों की भागीदारी बढ़ी है. (File Photo: PTI)
भारत में रोजगार के हालात बेहतर हुए हैं; जुलाई 2026 में बेरोजगारी घटी है और वर्कफोर्स में लोगों की भागीदारी बढ़ी है. (File Photo: PTI)

भारत में रोजगार के मोर्चे पर राहत देने वाली तस्वीर सामने आई है. जुलाई 2026 में 15 साल और उससे अधिक उम्र की आबादी में बेरोजगारी दर घटकर 5.1% रह गई. वहीं, इस दौरान ज्यादा लोग रोजगार से जुड़े या काम की तलाश में वर्कफोर्स का हिस्सा बने. भारत सरकार के प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) और वर्क पॉपुलेशन रेश्यो (WPR) दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि बेरोजगारी दर जून के मुकाबले कम हुई.

जुलाई में 15 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों का ओवरऑल LFPR 55.4% रहा. जून में यह 54.4% था. यानी एक महीने में इसमें 1 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई. LFPR यह बताता है कि कामकाजी उम्र की आबादी में कितने लोग रोजगार कर रहे हैं या रोजगार की तलाश में हैं. LFPR में बढ़ोतरी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में दर्ज की गई. हालांकि, ग्रामीण इलाकों में सुधार ज्यादा तेज रहा.

ग्रामीण LFPR में 1.4% अंक की बढ़ोतरी

ग्रामीण क्षेत्रों में LFPR जून के मुकाबले 1.4 प्रतिशत अंक बढ़कर जुलाई में 58% हो गया. इससे संकेत मिलता है कि गांवों में ज्यादा लोग रोजगार से जुड़ने या काम की तलाश में वर्कफोर्स में शामिल हुए.

महिलाओं की वर्कफोर्स भागीदारी भी बढ़ी

जुलाई के रोजगार आंकड़ों में महिलाओं की भागीदारी में भी सुधार देखने को मिला. महिला LFPR जुलाई में 34.4% रहा, जो जून के मुकाबले 1.7 प्रतिशत अंक अधिक है. ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी में खास तौर पर तेज बढ़ोतरी हुई. ग्रामीण महिला WPR जून के 34.7% से बढ़कर जुलाई में 37.2% पहुंच गया. यानी ग्रामीण इलाकों में काम कर रही महिलाओं का अनुपात भी बढ़ा.

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फरवरी के बाद पहली बार WPR में बढ़त

15 साल और उससे अधिक उम्र की आबादी का ओवरऑल WPR जुलाई में 52.5% रहा. फरवरी 2026 के बाद यह इस अनुपात में पहली बढ़ोतरी है. WPR बताता है कि कुल आबादी में कितने लोग वास्तव में काम कर रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में WPR जुलाई में 55.4% रहा, जो जून के मुकाबले 1.6 प्रतिशत अंक ज्यादा है. यह पिछले साल जुलाई के स्तर से भी 1 प्रतिशत अंक ऊपर रहा.

जुलाई में बेरोजगारी दर घटकर 5.1% रही

जुलाई में ओवरऑल बेरोजगारी दर 5.1% रही. यह जून के स्तर के साथ-साथ पिछले साल जुलाई की तुलना में भी कम है. पुरुषों और महिलाओं, दोनों में जून के मुकाबले बेरोजगारी दर में गिरावट दर्ज की गई. इस तरह जुलाई के आंकड़ों में रोजगार बाजार के कई अहम संकेतकों में एक साथ सुधार दिखा है. ज्यादा लोग वर्कफोर्स में शामिल हुए, काम कर रही आबादी का अनुपात बढ़ा और बेरोजगारी दर में कमी आई. हालांकि, आने वाले महीनों के आंकड़े यह तय करेंगे कि जुलाई में दिखा यह सुधार महज एक महीने का बदलाव है या रोजगार बाजार में टिकाऊ सुधार की शुरुआत.

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