पूर्व IMF डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गीता गोपीनाथ ने अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई को उन नेताओं में गिना है, जिन्होंने उन पर गहरी छाप छोड़ी. उन्होंने कहा कि मिलेई अपनी सोच, विजन और रणनीति को लेकर बेहद आश्वस्त थे.
लंदन में एक इवेंट में बातचीत के दौरान गोपीनाथ से पूछा गया था कि किस विश्व नेता ने उन पर स्थायी असर छोड़ा. उन्होंने पहले महात्मा गांधी का नाम लिया. इसके बाद उन्होंने उन नेताओं की बात की, जिनसे वह खुद मिली थीं.
2 घंटे की अलग बातचीत
गोपीनाथ ने कहा कि मिलेई उनके लिए इसलिए अलग रहे, क्योंकि वह इकलौते राष्ट्रपति थे जिनसे उनकी 2 घंटे की वन-ऑन-वन बातचीत हुई. उन्होंने कहा, 'अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई काफी अलग थे, क्योंकि वह इकलौते राष्ट्रपति थे जिनके साथ मैंने 2 घंटे अकेले बातचीत की, और वह एक इकोनॉमिस्ट हैं.'
उन्होंने बताया कि बातचीत जल्दी ही इकोनॉमिक्स सेशन में बदल गई. गोपीनाथ ने कहा, 'उन्होंने कागज के एक टुकड़े पर समीकरण लिखने शुरू कर दिए, और हम उसे देखते रहे. यह मजेदार था. ऐसा कम होता है.'
विजन पर पूरा भरोसा
गोपीनाथ ने कहा कि मिलेई की सबसे अलग बात उनका भरोसा था. उनके मुताबिक, 'वह ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें इस बात पर बहुत ज्यादा भरोसा था कि वह क्या कर रहे हैं. और कभी-कभी इसकी जरूरत होती है. आपको एक विजन चाहिए. आपको एक रणनीति चाहिए.'
उन्होंने यह भी कहा, 'हर बार सब कुछ ठीक नहीं होता. लेकिन उनके दिमाग में यह बहुत साफ था कि उन्हें क्या हासिल करना है.' गोपीनाथ के मुताबिक, इसी भरोसे ने मिलेई को बाकी नेताओं से अलग बनाया.
जब उनसे पूछा गया कि मिलेई के आत्मविश्वास पर उनकी क्या प्रतिक्रिया थी, तो उन्होंने कहा कि बातचीत उन्हें अच्छी लगी. गोपीनाथ ने कहा, 'नहीं, यह बहुत अच्छा था. मुझे वह बातचीत पसंद आई. इकोनॉमी कैसे काम करती है, इस पर हम हर बात में सहमत नहीं हैं, लेकिन वह बहुत विचारशील थे.'
मिलेई, जो एक लिबर्टेरियन इकोनॉमिस्ट हैं, दिसंबर 2023 में अर्जेंटीना के राष्ट्रपति बने. उन्हें ऐसी इकोनॉमी मिली, जो ट्रिपल-डिजिट महंगाई, राजकोषीय घाटे और विदेशी मुद्रा की कमी से जूझ रही थी.
पद संभालने के बाद उनकी सरकार ने बड़े स्तर पर सख्ती वाले कदम उठाए. पब्लिक स्पेंडिंग में कटौती की गई, राजकोषीय सरप्लस पर जोर दिया गया और कई करेंसी कंट्रोल्स में ढील दी गई. इन नीतियों से महंगाई ट्रिपल-डिजिट स्तर से तेजी से घटी है. मासिक महंगाई कई साल के निचले स्तर पर आई है. IMF समेत अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने महंगाई और राजकोषीय सुधारों में प्रगति को स्वीकार किया है.
(इनपुट: बिजनेस टुडे)