पोर्टफोलियो में केवल सोना-चांदी रखने से भी रिस्क ज्यादा होता है, तो फिर सवाल उठता है कि एक आम निवेशक खासकर सैलरीड क्लास को हर महीने कितना सोने-चांदी में निवेश करना चाहिए? ऐसा नहीं है कि सोने-चांदी में गिरावट आई है, तो सारा पैसा एक ही जगह लगा दें.
दरअसल, इस अनिश्चितता के दौर में जब भी सुरक्षित निवेश की बात आती है, तो सबसे पहले सोना (Gold) और चांदी (Silver) का नाम ज़ुबान पर आता है. इतिहास गवाह है कि सोने ने निवेशकों को कभी निराश नहीं किया है. संकट के समय चाहे वह वैश्विक मंदी हो, युद्ध की स्थिति हो या महंगाई का बढ़ना, सोना हमेशा एक मजबूत ढाल साबित हुआ है.
आइए एक उदाहरण से समझते हैं कि एक आम निवेशक को हर महीने या साल में कितना सोना-चांदी खरीदना चाहिए. अगर किसी की सैलरी 50,000 रुपये है, तो वो अपने पोर्टफोलियो में सोने और चांदी को कितनी जगह दें. वित्तीय जानकार का साफ कहना है कि कभी भी अपनी सारी कमाई या बचत को एक ही जगह पर नहीं लगाना चाहिए. पोर्टफोलियो को हमेशा डाइवर्सिफिकेशन रखना चाहिए.
आमतौर पर निवेश को अपनी सैलरी में से 30 फीसदी सेविंग की सलाह दी जाती है. ऐसे में 50 हजार रुपये सैलरी वालों को महीने में कम से कम 15 हजार रुपये बचाना चाहिए. अब 15 हजार रुपये में कितना हिस्सा सोने-चांदी में जाएगा, ये ध्यान देने वाली बात है. आज के तौर में अधिकतर लोग म्यूचुअल फंड में SIP करते हैं. ऐसे में निवेशक को सोना, चांदी, म्यूचुअल फंड और अन्य एसेट्स का संतुलन बनाना होता है.
सोने और चांदी में कितना निवेश होना चाहिए?
आमतौर पर अब वित्तीय सलाहकार यह सलाह देते हैं कि आपके कुल निवेश पोर्टफोलियो का 20% हिस्सा सोना और चांदी में होना चाहिए. यानी 15 हजार रुपये में करीब 3000 रुपये सोने-चांदी में निवेश करना चाहिए. जिसमें से 2000 रुपये सोने और 1000 रुपये चांदी में लगाना बेहतर फैसला साबित हो सकता है.
चूंकि सोना मुख्य रूप से स्थिरता और महंगाई के खिलाफ बचाव के लिए जाना जाता है, इसलिए कुल निवेश का अधिकांश हिस्सा सोने में जाना चाहिए. जबकि चांदी में औद्योगिक मांग बहुत अधिक होती है, जिससे इसमें उतार-चढ़ाव सोने से ज्यादा होता है. इसलिए चांदी में थोड़ा कम यानी लगभग 1000 रुपये प्रति माह का निवेश उचित रहेगा.
फिजिकल गोल्ड खरीदें या कुछ और?
अब सवाल उठता है कि 2 हजार का सोना और 1 हजार रुपये की चांदी कैसे खरीदें? आज के समय में सोने-चांदी में निवेश के कई आधुनिक और सुरक्षित तरीके आ चुके हैं, जिससे आपको ज्वैलरी खरीदने पर लगने वाले मेकिंग चार्ज या शुद्धता की चिंता से मुक्ति मिलती है. अगर आप लंबी अवधि का निवेश करना चाहते हैं, तो गोल्ड ETF या डिजिटल माध्यम बेहतरीन विकल्प हैं. इनमें चोरी होने का डर नहीं रहता और मेकिंग चार्ज भी नहीं कटता.
इसके अलावा आप हर महीने गोल्ड म्यूचुअल फंड या सिल्वर म्यूचुअल फंड में SIP शुरू कर सकते हैं. 500 या 1000 रुपये की छोटी एसआईपी से भी इसकी शुरुआत की जा सकती है. अगर आपको फिजिकल गोल्ड रखना पसंद है, तो हमेशा प्रमाणित ज्वेलर से 999 शुद्धता के हॉलमार्क वाले सिक्के या बार ही खरीदें.
आंकड़े बताते हैं कि सोने ने लंबी अवधि में महंगाई को मात दी है और निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है. पिछले कुछ दशकों का ट्रेंड देखें तो सोने की कीमतें लगातार ऊपर की ओर ही गई हैं. ऐसे में अगर आपकी सैलरी 1 लाख रुपये है तो फिर आप सोने-चांदी में अधिकतम 5 से 6 हजार रुपये महीने निवेश कर सकते हैं, जो आपके पोर्टफोलियो को स्थिरता भी देगा.