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'इसे मैं नहीं, मेरा भाई पसंद है' पत्नी को लेकर देवर से शादी कराने पहुंचा पति! बागपत सामूहिक विवाह में खलबली

बागपत में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत एक अजीब मामला सामने आया, जहां एक महिला गोद में बच्चा और अपने पति के साथ पहुंची, लेकिन वह पति के बजाय देवर से सात फेरे लेना चाहती थी. पति ने भी इसका समर्थन किया और पंचायत द्वारा तलाक का दावा किया. हालांकि, कानूनी दस्तावेज न होने के कारण अधिकारियों ने आवेदन खारिज कर दिया.

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सांकेतिक फोटो
सांकेतिक फोटो

यूपी के बागपत में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में पहुंची एक महिला की अजीबोगरीब मांग ने अधिकारियों को हैरत में डाल दिया. महिला गोद में बच्चा लेकर अपने मौजूदा पति के साथ आई थी, लेकिन सात फेरे देवर के साथ लेना चाहती थी. पति ने भी पत्नी की बात का समर्थन करते हुए कहा कि उसे मैं नहीं, मेरा छोटा भाई पसंद है. पंचायत से तलाक होने का दावा भी किया, लेकिन कानूनी कागजात नहीं होने पर आवेदन खारिज हो गया.

दरअसल, बागपत में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत शादी कराने के लिए आवेदन करने वाले जोड़ों की जांच चल रही थी. इसी दौरान एक ऐसा आवेदन सामने आया, जिसने अधिकारियों को भी चौंका दिया. आवेदन करने वाली महिला अपने गोद में बच्चे और मौजूदा पति के साथ अधिकारियों के सामने पहुंची थी. लेकिन उसकी मांग थी कि उसकी शादी उसके पति से नहीं, बल्कि उसके छोटे भाई यानी देवर से कराई जाए. शुरुआत में अधिकारियों को मामला सामान्य लगा, लेकिन जब दस्तावेजों की जांच हुई तो कहानी ने ऐसा मोड़ लिया कि हर कोई हैरान रह गया. महिला पहले से शादीशुदा थी और उसका एक बच्चा भी था। इसके बावजूद वह सामूहिक विवाह योजना के तहत देवर के साथ सात फेरे लेने की तैयारी में थी.

वहीं, जब अधिकारियों ने महिला से पूछा कि पहले से शादीशुदा होने के बावजूद वह दूसरी शादी कैसे कर सकती है, तो उसने बेझिझक अपनी बात रख दी. महिला का कहना था कि उसे पति पसंद नहीं है और वह अपने देवर से शादी करना चाहती है. उसने दावा किया कि गांव में पंचायत बैठी थी और पंचों ने दोनों का तलाक करा दिया था. महिला ने अपनी बात साबित करने के लिए बाकायदा सादे कागज पर लिखा पंचायत का फैसला भी अधिकारियों के सामने रख दिया.

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हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया, जब महिला के साथ पहुंचे उसके पति ने भी उसकी बात का समर्थन कर दिया. पति ने अधिकारियों के सामने पत्नी के दावे की पुष्टि करते हुए कहा कि वह सच बोल रही है. उसे मैं नहीं, बल्कि मेरा छोटा भाई पसंद है. कुछ दिन पहले ही गांव में पंचों की मौजूदगी में दोनों का तलाक कराया गया था. यानी जिस महिला को शादी के मंडप तक लेकर पहुंचा पति, वही पति अपनी पत्नी की दूसरी शादी की पैरवी करता नजर आया. पति-पत्नी दोनों ने पंचायत के फैसले को ही तलाक का आधार बताया, लेकिन सरकारी नियमों के सामने उनका यह तर्क नहीं चल पाया. अधिकारियों ने महिला को साफ कर दिया कि पंचायत में हुआ फैसला या सादे कागज पर लिखा तलाक नामा कानूनी तलाक का विकल्प नहीं हो सकता. दूसरी शादी के लिए पहले वैधानिक प्रक्रिया के तहत तलाक होना जरूरी है. जब महिला कानूनी तलाक के दस्तावेज पेश नहीं कर पाई तो उसका आवेदन निरस्त कर दिया गया.

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत कुल 220 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए थे. जांच में पात्र पाए गए 149 जोड़ों का 25 अक्टूबर को विवाह संपन्न कराया गया. वहीं, दस्तावेजों और पात्रता संबंधी कमियों के चलते कुछ आवेदन निरस्त कर दिए गए. इन्हीं निरस्त आवेदनों की जांच के दौरान पति, पत्नी और देवर से जुड़ा यह अनोखा मामला सामने आया.

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वहीं, 'आज तक' संवाददाता से फोन पर हुई बातचीत में जिला समाज कल्याण अधिकारी नीलम चौहान ने बताया कि सामूहिक विवाह योजना के तहत एक महिला का आवेदन आया था, जो अपने देवर से शादी करना चाहती थी. जांच के दौरान पता चला कि महिला का अपने मौजूदा पति से कानूनी रूप से तलाक नहीं हुआ है. ऐसे में नियमों के अनुसार उसका आवेदन निरस्त कर दिया गया.

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