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युद्ध से तेल की कीमतों में आग... 2022 के बाद पहली बार कीमत $100 के पार, PAK-बांग्लादेश में हाहाकार

Middle East War ने दुनिया को संकट में डाल दिया है. इस युद्ध के चलते तेल की कीमतों में आग लगी हुई है और कीमतें बढ़ने से पाकिस्तान-बांग्लादेश जैसे देशों में हालात बदतर होते जा रहे हैं.

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क्रूड ऑयल की कीमत में उछाल से दुनिया में टेंशन. (Photo: Reuters)
क्रूड ऑयल की कीमत में उछाल से दुनिया में टेंशन. (Photo: Reuters)

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध (US-Israel War With Iran) ने दुनिया की टेंशन को चरम (Global Tension) पर पहुंचा दिया है और इसका जरिया बना है कच्चा तेल. जी हां, जंग के तेज होने से कच्चे तेल की ग्लोबल कीमतों में आग लगी हुई है और Crude Oil Price साल 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गए हैं. तमाम देश क्रूड ऑयल के आयात पर निर्भर हैं और कीमतों में आए इस उछाल के बाद इनकी मुसीबतें बढ़ती नजर आ रही हैं. पाकिस्तान, बांग्लादेश में तो हालात अभी से बदतर हो चुके हैं. 

Crude के दाम कहां जाकर रुकेंगे? 
क्रूड ऑयल की कीमतों में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारी उछाल देखने को मिला है और Brent Crude Price करीब 25% चढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया. WTI Crude Price में भी झटके में 24 फीसदी की तेजी आई और ये 112 डॉलर प्रति बैरल के पार निकलकर ट्रेड कर रहा था. Murban Crude करीब 18 फीसदी की तेजी के साथ 120 डॉलर प्रति बैरल, तो वहीं नेचुरल गैस की कीमत (Natural Gas Price) में भी लगभग 8 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया. 

Crude Oil Price Surge

अमेरिका में उत्पादित कच्चे तेल, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट की कीमत लगभग 106.22 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई, जो बीते शुक्रवार को 90.90 डॉलर पर बंद हुई थी. US Crude Oil Price आखिरी बार 30 जून 2022 को 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचे थे और इसके बाद पहली बार इस आंकड़े के पार निकले हैं. 

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जंग ने लगाई तेल की कीमतों में आग 
Crude Oil Price में इस ताबड़तोड़ तेजी के पीछे की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में जारी जंग और इससे बड़े तेल उत्पादक व सप्लायर्स द्वारा तेल सप्लाई रोकने के ऐलान हैं. इस जंद में तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया जा रहा है. कुवैत से लेकर कतर तक ने तेल गैस की सप्लाई रोकने की धमकियां दी हैं. ईरान भी बड़ा तेल रिजर्व रखता है, लेकिन अमेरिका-इजरायल के हमलों से ये भी ठप है और यहां तक कि दुनिया के 20 फीसदी तेल की आवाजाही के लिए प्रमुख समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से हालात बद से बदतर हो गए हैं. ईरान की रोक से ये तेल रूट बैन है और इसका असर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में देखा जा रहा है. 

Pakistan Bangladesh Fuel Crisis

Pakistan से बांग्लादेश तक कोहराम
कच्चे तेल के दाम में लगी ग्लोबल आग का असर कई देशों पर नजर आने लगा है. Pakistan Oil Crisis का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां पेट्रोल-डीजल के दाम में तगड़ा इजाफा किया गया है और Pakistan Petrol Price 336 पीकेआर प्रति लीटर, जबकि हाई स्पीड डीजल का भाव 321 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर पर पहुंच चुका है और हालात आगे भी बिगड़ने के संकेत मिल रहे हैं. बांग्लादेश में भी मिडिल ईस्ट टेंशन से क्रूड के दाम में उछाल के चलते बुरा हाल है और सरकार ने पेट्रोल-डीजल की बिक्री के लिए राशनिंग सिस्टम लागू कर दिया. यानी तय मात्रा के मुताबिक ही लोगों को फ्यूल मिल सकेगा. 

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भारत के लिए क्यों टेंशन? 
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच हालांकि, भारत की ओर से पर्याप्त स्टॉक होने की बात कही गई है, लेकिन इसके बुरे असर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. दरअसल, भारत भी क्रूड ऑयल का बड़ा आयातक है और अपनी जरूरत का करीब 85% तेज इंपोर्ट करता है. Crude Oil Price में इसी रफ्तार से उछाल आता है, तो फिर ये महंगाई को बढ़ाने वाला साबित हो सकता है और भारत का आयात बिल बढ़ सकता है.  

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