बिजनेस टुडे इंफ्रास्ट्रक्चर समिट 2026 (BT Infra Summit 2026) का आयोजन शुक्रवार को किया गया. इसमें शामिल होकर एनर्जी सेक्टर के तमाम दिग्गजों ने रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में भारत के बढ़ते कदमों पर बात की और आगे की चुनौतियों के बारे में बताया.
समिट में शामिल हुए एक्सपर्ट्स ने कहा कि भारत की एनर्जी सेफ्टी एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां पारंपरिक ईंधन सुरक्षा के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा, बैटरी भंडारण और ग्रिड आधुनिकीकरण पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने भविष्य के लिए एनर्जी इकोसिस्टम के निर्माण के लिए जरूरी निवेश और नीतिगत सुधारों पर बात की.
रिन्यूएबल एनर्जी में भारत आगे
बिजनेस टुडे समिट में बोलते हुए रिन्यू (ReNew) के फाउंडर-चेयरमैन और CEO सुमंत सिन्हा ने कहा कि भारत का रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अब तेजी से आगे बढ़ते हुए अपनी कैपेसिटी में लगातार बढ़ोतरी कर रहा है और ऊर्जा परिवर्तन के अगले चरण में एंट्री कर रहा है.
सिन्हा ने कहा कि भारत ने 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन इलेक्ट्रिसिटी प्रोडक्शन क्षमता में 500 गीगावाट का टारगेट सेट किया है. जबकि हम 300 गीगावाट की स्थापित रिन्यूएबल क्षमता को पार करने की प्रक्रिया में हैं, जिसमें से पवन और सौर ऊर्जा का हिस्सा दो-तिहाई से ज्यादा है. उन्होंने आगे कहा कि हमने Renewable Energy की नई क्षमताओं को जोड़ने के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है और अब भारत चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश बन गए हैं.
अब ये चुनौतियां, क्या करना होगा?
सुमंत सिन्हा के मुताबिक, भारत की बिजली आपूर्ति में नवीकरणीय ऊर्जा का योगदान अब लगभग 20% है. हालांकि, उद्योग को अब अलग तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. नवीकरणीय ऊर्जा अब एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गई है जहां, हमने जो प्रगति की है, उसके बावजूद, हमारे सामने कई चुनौतियां हैं. पहली चुनौती रिन्यूएबल एनर्जी की बढ़ती हिस्सेदारी को ग्रिड में एकीकृत करना है. उन्होंने कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ अधिक से अधिक स्टोरेज क्षमता स्थापित करनी जरूरी है. इसके साथ ही दूसरी चुनौती आयातित उपकरणों पर भारत की निर्भरता को कम करना है.
भारत की एनर्जी सेफ्टी के लिए यहां फोकस
कार्यक्रम में शामिल हुए अन्य एक्सपर्ट्स ने भी इंफ्रा इंडिया 2047 विजन पर बात की. उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा की भारत की परिभाषा में एक मौलिक बदलाव आ रहा है, जो बिजली और ईंधन तक पहुंच सुनिश्चित करने से लेकर वैश्विक रुकावटों का सामना करने में सक्षम एक किफायती और टिकाऊ एनर्जी सिस्टम के निर्माण तक है.
CEEW की प्रोग्राम डायरेक्टर शालू अग्रवाल ने कहा कि भारत ने ऊर्जा तक पहुंच की चुनौती को काफी हद तक पार कर लिया है, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति में तेज सुधार हुआ है. लेकिन अब आगे फोकस किफायती ऊर्जा उपलब्धता, विश्वसनीय आपूर्ति और बाहरी झटकों से निपटने की क्षमता सुनिश्चित करने पर होना चाहिए.
किर्नी इंडिया में एनर्जी एंड प्रोसेस इंडस्ट्रीज प्रैक्टिस के पार्टनर गौरव गुलाटी ने कहा कि आयातित हाइड्रोकार्बन पर भारत की निर्भरता कई वर्षों तक बनी रहेगी, इसलिए रणनीतिक भंडारण ऊर्जा सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी है. उन्होंने रिन्यूएबल एनर्जी प्रोडक्शन में वृद्धि और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए बैटरी स्टोरेज, पंप स्टोरेज परियोजनाओं की आवश्यकता पर भी जोर दिया.
केंद्र सरकार द्वारा संचालित की जा रही योजनाओं का जिक्र करते हुए गुलाटी ने कहा कि पीएम सूर्य घर (PM Surya Ghar Muft Bijli Yojna) और पीएम-कुसुम योजना जैसी सरकारी स्कीमों ने रूफटॉप सोलर को अपनाने को बढ़ावा दिया है और घरेलू सोलर विनिर्माण को मजबूत किया है.