युद्ध अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा है और तेल पाकिस्तान का निकल रहा है. मिडिल ईस्ट में जंग और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से पड़ोसी मुल्क में संकट (Pakistan Crisis) लगातार बढ़ता जा रहा है. तेल की किल्लत सिर्फ पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफे तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसके चलते आटा-चावल समेत अन्य खाने की चीजें भी लोगों की पहुंच से बाहर होती नजर आ रही हैं.
देश में महंगाई की मार फिर से पड़ने लगी है और मार्च में Pakistan Inflation Rate अचानक फिर से उछल गया है. इस बीच कर्ज का बोझ और देनदारी का दबाव लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रही इकोनॉमी को ध्वस्त कर रहा है, जबकि नया कर्ज देने के लिए कोई तैयार नहीं है. हालात PAK में इतने खराब हो चुके हैं कि शहबाज शरीफ सरकार को कोरोना जैसे उपाय लागू करने पड़े हैं, सबसे ताजा आदेश की बात करें, तो पाकिस्तान अब 8 बजे के बाद ही अंधेरे में डूब जाया करेगा. आइए पाकिस्तान में संकट के ऐसे ही पांच सबूत देखते हैं. (Photo: Reuters)
पहला संकट: पेट्रोल-डीजल
अमेरिका और ईरान में युद्ध (US-Iran War) जारी है, जिससे दुनियाभर में तेल संकट (Oil Crisis) गहराया हुआ है. इससे पाकिस्तान का भी बेहद बुरा हाल है. शहबाज शरीफ सरकार असमंजस में नजर आ रही है कि Petrol-Diesel Price को कैसे मैनेज करे. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद सरकार ने दो बार पेट्रोल-हाई स्पीड डीजल की कीमतों में तगड़ी बढ़ोतरी की और देश में पेट्रोल 458.41 रुपये लीटर, जबकि डीजल 520.35 रुपये प्रति लीटर तक कर दिया था. इसके बाद अचानक सरकार ने जनता के विरोध को देखते हुए पेट्रोल में हल्की राहत दे दी और Pakistan Petrol Price 80 रुपये कम होकर 378 रुपये पर आ गए. पेट्रोल-डीजल पर महंगाई की इस मार ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है और देश के पेट्रोल पंपों पर अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला है. (Photo: Reuters)
दूसरा संकट: कर्ज का बढ़ता बोझ, चुकाने की चिंता
Pakistan पर दूसरे संकट की बात करें, तो कर्ज का बोझ देश की इकोनॉमी को झकझोर रहा है. शहबाज शरीफ सरकार आईएमएफ समेत कई देशों से भारी-भरकम कर्ज ले चुकी है, लेकिन पाकिस्तान का आर्थिक संकट है कि कम होने का नाम नहीं ले रहा है. अब कर्ज देने वाले उसे लौटाने का दबाव बना रहे हैं और पाकिस्तान की हालत टाइट होती जा रही है. एक ओर तो उसे कोई नया कर्ज देने को राजी नहीं है, तो वहीं मिडिल ईस्ट युद्ध से गहराए संकट के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने उसकी टेंशन को और बढ़ा दिया है. UAE ने इस महीने के अंत तक पाकिस्तान को 3.5 अरब डॉलर का कर्ज वापस करने का फरमान सुनाया है.
कर्ज के आंकड़ों पर गौर करें, तो पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, Pakistan पर जनवरी 2026 तक कुल कर्ज 79,322 अरब पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गया है. स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) के डॉक्युमेंट्स देखें, तो संघीय सरकार का घरेलू कर्ज जनवरी 2026 तक 55,978 पाकिस्तानी अरब रुपये, जबकि बाहरी कर्ज 23,344 अरब पाकिस्तानी रुपये हो गया था. जो Pakistan GDP का करीब 70% है. (Photo: ITG)
तीसरा संकट: महंगाई की पड़ने लगी मार
पाकिस्तान के लिए तीसरा संकट महंगाई के रूप में देखने को मिल रहा है. मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच क्रूड ऑयल की कीमतों में आए तगड़े उछाल ने देश में महंगाई बढ़ा दी है. पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल के दाम बढ़ने के साथ ही खाद्य पदार्थों की महंगाई दर में तेज इजाफा हुआ है. ब्रेड, दूध से लेकर आटा-दाल-चावल से खाने के तेल तक फूड प्रोडक्ट्स के दाम बेतहाशा बढ़े हैं और ये धीरे-धीरे लोगों की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं.
पाकिस्तान में महंगाई सालाना आधार पर बढ़कर 7.3% हो गई. बीते बुधवार को स्टेटिस्टिक्स ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों को देखें, तो पाकिस्तान की CPI महंगाई दर फरवरी के 7 फीसदी की तुलना में बढ़कर इस स्तर पर पहुंची है. मिडिल ईस्ट युद्ध के साथ ही अफगानिस्तान के साथ तनाव ने जरूरी चीजों का आयात रोका है, जिससे रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में तेज उछाल आया है. (Photo: Reuters)
चौथा संकट: इकोनॉमी में गिरावट का खौफ
Middle East War से पाकिस्तान की बदहाल इकोनॉमी को और झटका लग सकता है. बीते दिनों आई डॉन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व पाकिस्तानी वित्त मंत्री हाफिज पाशा ने चेतावनी दी थी कि अगर ये युद्ध जारी रहा और क्रूड प्राइस 100 डॉलर के पार बने रहे, तो Pakistan GDP पर 1-1.5% का निगेटिव इम्पैक्ट पड़ सकता है. पेट्रोलियम आयात में बढ़ोतरी के चलते अगले साल पाकिस्तान को 12-14 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसके साथ ही उन्होंने महंगाई को लेकर कहा था कि रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे हालात बनते हैं और क्रूड 120 डॉलर के पार पहुंचता है, तो फिर महंगाई भी उसी दौर के करीब 30% पर पहुंच सकती है.
पांचवां संकट: अंधेरे में डूब जाएगा पाकिस्तान
Pakistan Crisis का पांचवां सबूत देखें, तो तेल-गैस संकट से स्थिति इस कदर बदतर हो गई है, कि Shahbaz Sharif Govt को कोरोना महामारी के समय से एनर्जी सेविंग उपाय लागू किए गए है. पहले ही सरकारी गाड़ियों में 60% कटौती, सांसदों और मंत्रियों की सैलरी कट, सरकारी विभागों के गैर-जरूरी खर्च में 20% की कटौती, बैठकों को वर्चुअल और पढ़ाई को ऑनलाइन में शिफ्ट करने के आदेश दिए गए थे. वहीं रिपोर्ट की मानें, तो अब हालात और भी बिगड़ गए हैं. ईंधन और गैस की बढ़ती कीमतों के बीच पाकिस्तान सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए 7 अप्रैल से देश के ज्यादातर हिस्सों में बाजार और शॉपिंग मॉल रात 8 बजे बंद करने का आदेश दिया है. मतलब पाकिस्तान में अब 8 बजे के बाद अंधेरा छाने वाला है. (Photo: AP)