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बिहार में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा, CM ने लिया हालात का जायजा

नेपाल में फ्लैश फ्लड के बाद गंडक नदी का जलस्तर बढ़ गया है. इसे देखते हुए बिहार में 6 जिले अलर्ट पर हैं, जबकि NDRF की 9 टीमें तैनात की गई हैं.

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नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद बिहार में अलर्ट जारी किया गया है. (Photo- ITG)
नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद बिहार में अलर्ट जारी किया गया है. (Photo- ITG)

नेपाल में फ्लैश फ्लड के बाद गंडक नदी में पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए बिहार में अलर्ट बढ़ा दिया गया है. केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, चीन सीमा के पास नेपाल में GLOF यानी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड की आशंका के बीच त्रिशूली नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा है. बाढ़ की लहर आगे गंडक नदी तक पहुंच सकती है. इसे देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गंडक नदी के हालात का जायजा लिया है.

फिलहाल नेपाल में आई बाढ़ के बीच बिहार में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा है. रात 8 बजे तक वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में 1.04 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया. दिन में यह आंकड़ा करीब 80 हजार क्यूसेक था. हालांकि, अभी नेपाल की बाढ़ का वाल्मीकिनगर बैराज पर बहुत ज्यादा असर नहीं दिख रहा है. मानसून के दौरान बैराज से 2 लाख क्यूसेक तक पानी का डिस्चार्ज सामान्य माना जाता है. अनुमान है कि नेपाल से बाढ़ का पानी पहुंचने पर यह आंकड़ा बढ़कर करीब 2.5 लाख क्यूसेक हो सकता है. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, वाल्मीकिनगर बैराज 8 लाख क्यूसेक तक पानी का डिस्चार्ज संभाल सकता है. अब तक यहां सबसे ज्यादा करीब 6.19 लाख क्यूसेक पानी 31 जुलाई 2003 को दर्ज किया गया था.

पश्चिम चंपारण और मुजफ्फरपुर में तैनाती के लिए NDRF की दो टीमें भेजी गई हैं. बिहार में अब कुल 9 NDRF टीमें तैनात हैं. राज्य सरकार गंडक नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रख रही है. जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें भेजी जाएंगी.

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वहीं, नेपाल से आने वाला पानी अगले कुछ घंटों में बिहार पहुंचने की आशंका है. इससे गंडक के आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. छह जिलों को अलर्ट किया गया है. वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं. मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी बात कर हालात पर चर्चा की है.

बिहार आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने ANI को बताया कि संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए पूरी आपदा प्रबंधन टीम हाई अलर्ट पर है. एहतियात के तौर पर पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली के साथ उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में भी NDRF की टीमें तैनात की गई हैं. बेतिया, गोपालगंज और मुजफ्फरपुर में NDRF की अतिरिक्त टीमें भी भेजी गई हैं. बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में SDRF की टीमें पहले से मौजूद हैं.

अधिकारियों को संभावित बाढ़ की स्थिति में समय रहते एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं. गंडक बैराज के गेट भी इस तरह संचालित करने को कहा गया है, ताकि अचानक आने वाले अतिरिक्त पानी को सुरक्षित तरीके से आगे निकाला जा सके. SSB की अलग-अलग टीमें भी अलर्ट पर हैं और उन्हें स्टैंडबाय मोड में रखा गया है.

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त्रिशूली नदी में अचानक बढ़ा पानी

नेपाल के फुर्के खोला इलाके में त्रिशूली नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यह जगह भारत-नेपाल सीमा से करीब 160 किलोमीटर दूर बताई जा रही है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, नेपाल-चीन सीमा के पास संभावित ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF गतिविधि के कारण नदी में अचानक पानी बढ़ने की आशंका है.

बाढ़ की यह लहर नीचे की तरफ बढ़ते हुए गंडक नदी में पहुंच सकती है. हालांकि, रास्ते में इसके पीक फ्लो में कमी आने की संभावना जताई गई है. इसके बावजूद बिहार के सीमावर्ती और निचले इलाकों के लिए स्थिति को गंभीरता से लिया जा रहा है. स्थानीय अधिकारियों को गंडक नदी के जलस्तर और आसपास के संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं.

गंडक बैराज को लेकर खास निर्देश

विशेष बाढ़ सलाह में कहा गया है कि अगर जरूरत पड़े तो गंडक नदी के किनारे आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जाएं. साथ ही गंडक बैराज के गेट का संचालन इस तरह किया जाए कि संभावित बाढ़ के पानी को सुरक्षित तरीके से आगे निकाला जा सके. इसका मकसद अचानक आने वाले पानी के दबाव को नियंत्रित करना और डाउनस्ट्रीम इलाकों में खतरा कम करना है.

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बिहार के लिए यह अलर्ट इसलिए भी अहम है क्योंकि नेपाल में होने वाली भारी बारिश, अचानक बाढ़ और पहाड़ी इलाकों में पानी बढ़ने का असर यहां की नदियों पर पड़ सकता है. गंडक और कोसी समेत कई प्रमुख नदियों के जलग्रहण क्षेत्र नेपाल में हैं. ऐसे में नेपाल में हालात बिगड़ने पर बिहार के सीमावर्ती और निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने का खतरा रहता है.

गंडक और कोसी बेसिन के इन जिलों पर खास नजर

नेपाल में फ्लैश फ्लड के खतरे को देखते हुए बिहार में गंडक और कोसी नदी बेसिन से जुड़े जिलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है. गंडक बेसिन में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण और वैशाली जिले आते हैं. वहीं कोसी बेसिन में सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और अररिया जिले शामिल हैं. नेपाल से आने वाले पानी और नदियों के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी की स्थिति में इन जिलों के निचले और संवेदनशील इलाकों पर खास नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारियों को तटबंधों, नदी के जलस्तर और संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने को कहा गया है.

बिहार में पहले से कई इलाकों पर दबाव

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बिहार में पहले से ही कई नदियों के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ा रखी है. राज्य के आधिकारिक फ्लड फोरकास्ट सिस्टम में 23 अगस्त के आंकड़ों के मुताबिक कोसी, गंडक, गंगा समेत कई नदियों के अलग-अलग गेज स्टेशनों पर जलस्तर चेतावनी या खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर दर्ज किया गया था. ऐसे में नेपाल से आने वाला अतिरिक्त पानी हालात को और चुनौतीपूर्ण बना सकता है.

इसी वजह से प्रशासन को नदियों के जलस्तर, तटबंधों और संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी करने को कहा गया है. नेपाल से मिलने वाली हर सूचना को गंभीरता से लेने और जरूरत पड़ने पर स्थानीय स्तर पर तुरंत कदम उठाने की सलाह दी गई है.

SSB ने 11 रेस्क्यू टीमों को किया अलर्ट

नेपाल में अचानक आई फ्लैश फ्लड के बाद भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. SSB ने तत्काल राहत और बचाव अभियान के लिए 11 रेस्क्यू एंड रिलीफ टीमों (RRT) को अलर्ट किया है, जबकि 7 अतिरिक्त टीमें स्टैंडबाय पर रखी गई हैं. सीमा पर तैनात बटालियनों को हालात पर लगातार नजर रखने और स्थानीय प्रशासन के संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए हैं.

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SSB की टीमें जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर रेस्क्यू, राहत और इमरजेंसी ऑपरेशन में मदद करेंगी. यह अलर्ट कोसी और नारायणी नदी बेसिन में बढ़ते जलप्रवाह के अनुमान और नेपाल की छोटी नदियों में अचानक बाढ़ की आशंका के बीच जारी किया गया है. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में घाघरा/कर्णाली और महाकाली नदी से जुड़े संवेदनशील जिलों की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है.

नेपाल के रसुवा में भीषण बाढ़ से तबाही

उधर, नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई. तिब्बत की ओर से आए तेज पानी के बाद भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया. टिमुरे बाजार और आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल गया, जिससे कई घर, वाहन और दूसरी संपत्तियां प्रभावित हुईं. सड़क और पुलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है.

रसुवा के चीफ डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर नरेंद्र परियार के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 9:15 बजे तिब्बत की ओर से भोटेकोशी नदी में अचानक बड़ी मात्रा में पानी आने की सूचना मिली थी. इसके बाद टिमुरे और आसपास के इलाकों में हालात तेजी से बिगड़े. नेपाल की सेना और सुरक्षा बल राहत-बचाव अभियान में जुटे हैं और जरूरत के मुताबिक हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है.

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बाढ़ के कारण बेट्रावती से रसुवागढ़ी बॉर्डर तक करीब 42 किलोमीटर सड़क को कई जगह नुकसान पहुंचने और कई कंक्रीट पुलों के बहने की जानकारी सामने आई है. कुछ रिपोर्टों में बड़ी संख्या में लोगों के बहने की आशंका जताई गई है, लेकिन करीब 1000 लोगों के बहने के दावे की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. राहत और बचाव अभियान जारी है और नुकसान का पूरा आकलन अभी किया जा रहा है.

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