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Bihar: खगड़िया में बाढ़ का कहर, 16 हजार परिवार प्रभावित, घर-मोहल्ले और सड़कें बनीं दरिया

बिहार के खगड़िया में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने परबत्ता प्रखंड के कई इलाकों में जिंदगी मुश्किल कर दी है. दस पंचायतें बाढ़ की चपेट में हैं, 15 स्कूल और खेत पानी में डूब चुके हैं. घरों में पानी भरने के बाद परिवार सामान, बच्चों और पशुओं के साथ सुरक्षित जगहों की ओर पलायन कर रहे हैं. प्रशासन 93 नावों से राहत और निगरानी में जुटा है.

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घर छोड़ पलायन को मजबूर लोग.(Photo: Screengrab)
घर छोड़ पलायन को मजबूर लोग.(Photo: Screengrab)

बिहार के खगड़िया जिले में नदियों के उफान के बीच बाढ़ ने बड़ी आबादी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी से परबत्ता प्रखंड के कई इलाकों में पानी फैल गया है. जोड़ापुर, दरियापुर भेलवा, माधवपुर समेत करीब दस पंचायतें बाढ़ की चपेट में हैं. सड़कों से लेकर घरों तक पानी पहुंचने से सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है.

बाढ़ के पानी ने खेतों में खड़ी फसलों को अपनी चपेट में ले लिया है. इलाके के 15 स्कूल भी जलमग्न हो गए हैं. कई प्रमुख सड़कें पानी में डूबकर दरिया जैसी नजर आ रही हैं. आवाजाही प्रभावित होने से लोगों को एक जगह से दूसरी जगह जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

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हालात बिगड़ने के बाद बड़ी संख्या में परिवार अपने आशियाने छोड़कर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की तरफ जाने को मजबूर हैं. लोग घरेलू सामान को किसी तरह बचाकर ले जा रहे हैं. परबत्ता प्रखंड के एक गांव में बाढ़ प्रभावित परिवार सड़क पर फैले पानी के बीच रस्सी के सहारे पलायन करते दिखाई दिए. बच्चों और पशुओं को साथ लेकर लोग सुरक्षित ठिकाने की तलाश में हैं.

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घरों में पानी, रस्सी के सहारे पलायन

बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच कई परिवारों ने ऊंची जगहों पर शरण ली है, जबकि दर्जनों परिवार अब भी अपने घरों में फंसे हुए हैं. कुछ लोगों ने घर में मौजूद सामान को सुरक्षित रखने के लिए वहीं रहने का फैसला किया है. कई परिवार पानी से घिरे मकानों में ही रहने को विवश हैं, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी जल कैद जैसी हो गई है.

घरों और आसपास पानी जमा होने से बाढ़ पीड़ितों को जहरीले कीड़े-मकोड़ों का डर भी सता रहा है. वहीं पेयजल समेत रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी चुनौती बन गया है. लोगों का कहना है कि खाने-पीने की चीजों से लेकर जरूरी सामान तक पहुंचाना मुश्किल हो रहा है और आवागमन बाधित होने से परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं.

बाढ़ प्रभावित परिवारों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाएं जरूरत के मुकाबले नाकाफी हैं. उनका कहना है कि खेतों में लगी फसल पानी में डूब चुकी है, जिससे आर्थिक नुकसान की चिंता भी बढ़ गई है. दूसरी तरफ पानी से घिरी सड़कों के कारण आवाजाही मुश्किल होने से रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हो रहे हैं.

प्रशासन की नजर बाढ़ और तटबंधों पर

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हालांकि, जिला प्रशासन का कहना है कि प्रभावित इलाकों में जरूरत के मुताबिक राहत और बचाव के इंतजाम किए जा रहे हैं. जिलाधिकारी विक्रम वीरकर ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में कुल 93 नावों का परिचालन किया जा रहा है. अंचल अधिकारी स्तर के अधिकारी लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा ले रहे हैं.

डीएम के मुताबिक प्रशासन गंगा समेत नदियों के बढ़ते जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए है. बाढ़ की स्थिति की निगरानी की जा रही है और जरूरत के अनुसार प्रभावित इलाकों में व्यवस्थाएं बढ़ाई जा रही हैं. प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षित आवाजाही और प्रभावित परिवारों तक जरूरी सुविधाएं पहुंचाना है.

तटबंधों की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन सतर्क है. जिले के सभी तटबंधों की निगरानी की जा रही है. बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारी तटबंधों के साथ-साथ जमींदारी बांध का भी लगातार निरीक्षण कर रहे हैं. प्रशासन के मुताबिक फिलहाल जिले के सभी तटबंध सुरक्षित हैं. डीएम ने बताया कि खगड़िया में करीब 16 हजार परिवार फिलहाल बाढ़ से प्रभावित हैं.

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