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'खुशियों में आते हैं, दुख में भी साथ चलना चाहिए', बाढ़ पीड़ितों की मदद को आगे आया किन्नर समाज

गोपालगंज में बाढ़ से कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित है. घरों में पानी भरने से लोगों के सामने खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट है. ऐसे मुश्किल वक्त में किन्नर समाज ने बाढ़ पीड़ित परिवारों की मदद के लिए कदम बढ़ाया. जितिया पर्व को देखते हुए कुचायकोट, गोपालगंज, मांझा, बरौली और बैकुंठपुर के प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री बांटी गई.

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चूड़ा-बिस्किट बांटी.(Photo: Vikash Kumar Dubey/ITG)
चूड़ा-बिस्किट बांटी.(Photo: Vikash Kumar Dubey/ITG)

बिहार के गोपालगंज में बाढ़ ने कई इलाकों के लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. कहीं घरों के भीतर पानी पहुंच गया है, तो कहीं रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परिवार परेशान हैं. इसी संकट के बीच किन्नर समाज ने बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है. जितिया पर्व को देखते हुए समाज के लोग राहत और खाद्य सामग्री लेकर प्रभावित इलाकों में पहुंचे और जरूरतमंद परिवारों के बीच सामान बांटा.

गोपालगंज के कुचायकोट, गोपालगंज, मांझा, बरौली और बैकुंठपुर प्रखंड के दर्जनों गांव बाढ़ से प्रभावित हैं. पानी से घिरे परिवारों के सामने सबसे बड़ी चिंता घर का चूल्हा जलाने और परिवार के लिए भोजन जुटाने की है. इसी जरूरत को देखते हुए किन्नर समाज के लोगों ने मांझा प्रखंड की भैसही और निमुईयां पंचायत में राहत सामग्री पहुंचाई. इस दौरान उन्होंने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर उनकी परेशानियां भी जानीं.

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राहत बांटने के दौरान किन्नर समाज के लोगों ने बाढ़ पीड़ितों को भरोसा दिलाया कि इस मुश्किल वक्त में वे अकेले नहीं हैं. जितिया पर्व को ध्यान में रखते हुए चूड़ा, मीठा, मोमबत्ती और बिस्किट समेत जरूरी सामान वितरित किया गया. मदद के साथ उन्होंने परिवारों की स्थिति भी समझी और उनकी जरूरतों के बारे में जानकारी ली.

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गोपालगंज​

'खुशियों में आते हैं, दुख में भी साथ चलना चाहिए'

पुष्पा किन्नर ने कहा कि वे लोग हमेशा इन परिवारों की खुशियों में शामिल होने के लिए आते हैं, लेकिन इस बार हालात अलग हैं. जब लोगों को परेशानी में देखा तो लगा कि उनके दुख में भी कदम से कदम मिलाकर चलना चाहिए. इसी भावना के साथ बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच पहुंचकर मदद की गई.

उन्होंने बताया कि जितिया पर्व को देखते हुए जरूरतमंद परिवारों के लिए चूड़ा, मीठा, मोमबत्ती और बिस्किट का इंतजाम किया गया. बाढ़ की वजह से जिन लोगों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा है, उन्हें राहत पहुंचाने की कोशिश की गई.

प्रीति किन्नर ने कहा कि सभी लोग बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं. उन्होंने कहा, "हम इनकी क्या मदद कर सकते हैं, हम लोग तो इन्हीं लोगों से जीते हैं." इसके बावजूद जितिया पर्व के मौके पर उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचकर उनका दुख बांटने की कोशिश की.

गोपालगंज​

मुश्किल में उम्मीद बनी मदद की छोटी कोशिश

गोपालगंज की बाढ़ ने लोगों के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है. प्रभावित परिवार पानी उतरने और हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं. इस बीच किन्नर समाज की पहल ने जरूरतमंदों को राहत देने के साथ यह संदेश भी दिया कि संकट के समय मदद के लिए कोई भी आगे आ सकता है.

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बाढ़ का पानी कब कम होगा और जिंदगी कब पूरी तरह पटरी पर लौटेगी, इसका इंतजार प्रभावित परिवार कर रहे हैं. फिलहाल उनके सामने भोजन और दूसरी जरूरी चीजों की जरूरत बनी हुई है. ऐसे समय में राहत सामग्री का एक छोटा पैकेट भी उनके लिए बड़ी मदद साबित हो रहा है.

किन्नर समाज की यह पहल बताती है कि मुश्किल घड़ी में इंसानियत किसी पहचान की मोहताज नहीं होती. जब बाढ़ पीड़ित परिवारों को सहारे की जरूरत थी, तब समाज के लोगों ने उनके बीच पहुंचकर मदद का हाथ बढ़ाया. पानी से घिरे लोगों के लिए यह कोशिश मुश्किल वक्त में उम्मीद की वजह बनी है.

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