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पेट्रोल गाड़ियों का गेम-ओवर! इस फ्यूल पर शिफ्ट हो रहे लोग, चौंका देंगे आंकड़े

अगस्त में जमकर कारों की बिक्री हुई है. इस दौरान 4.01 लाख से ज्यादा पैसेंजर व्हीकल की बिक्री हुई. लेकिन इस महीने कार खरीदारी में फ्यूल ऑप्शन चुनने में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. पेट्रोल कारों के मार्केट शेयर में बड़ी गिरावट आई है.

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पेट्रोल वाहनों का मार्केट शेयर घटकर केवल 41% रहा गया है. Photo: ITG
पेट्रोल वाहनों का मार्केट शेयर घटकर केवल 41% रहा गया है. Photo: ITG

भारत में कार खरीदने वालों की पसंद अब तेजी से बदल रही है. पेट्रोल कारों को लंबे समय से सबसे पसंदीदा विकल्प माना जाता रहा है, लेकिन बीते महीने यानी अगस्त में तस्वीर कुछ अलग नजर आई. पहली बार CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री पेट्रोल कारों से आगे निकल गई. इन तीनों विकल्पों ने मिलकर पैसेंजर व्हीकल की रिटेल बिक्री में 42% हिस्सेदारी हासिल की, जबकि पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी घटकर 41% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई.

फ्यूल ऑप्शन में बदलाव के बावजूद देश में कारों की मांग में कोई गिरावट देखने को नहीं मिली है. अगस्त में पैसेंजर व्हीकल की रिटेल बिक्री सालाना आधार पर 16% बढ़कर करीब 4.01 लाख यूनिट हो गई. यानी ग्राहक कार खरीद रहे हैं, लेकिन अब कार चुनते समय सिर्फ पेट्रोल या डीजल पर निर्भर नहीं रहना चाहते. कीमत, माइलेज, फ्यूल कॉस्ट और नई टेक्नोलॉजी जैसे कई फैक्टर कार खरीदारी के तरीके पर असर डाल रहे हैं.

अगस्त में पेट्रोल कारों का मार्केट शेयर घटकर 41% पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है. पिछले साल अगस्त में पेट्रोल कारों कार मार्केट शेयर 46% था. यानी एक साल में ही पेट्रोल की हिस्सेदारी में 5 प्रतिशत की गिरावट आई है. इसके पीछे CNG और इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती लोकप्रियता के साथ-साथ हाइब्रिड वाहनों की ओर ग्राहकों का बढ़ता रुझान भी अहम माना जा रहा है.

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CNG कारों ने बनाया नया रिकॉर्ड

CNG कारों की डिमांड में सबसे तगड़ा ग्रोथ देखने को मिल रहा है. ग्राहकों के रूझान के चलते वाहन निर्माता कंपनियां भी लगातार सीएनजी सेगमेंट में अपने नए मॉडलों को पेश करने में लगी हैं. ऐसी कार कंपनियां जिन्होंने कभी खुद को प्रीमियम बताते हुए कहा था कि, वो सीएनजी में एंट्री नहीं करेंगी आज वो भी सीएनजी पर दौड़ने की तैयारी में हैं. किआ इंडिया भी सीएनजी सेगमेंट में उतर चुकी है, और बहुत जल्द ही कंपनी अपने पहले फैक्ट्री फिटेड सीएनजी कार Kia Carens CNG को लॉन्च करने जा रही है. 

इक्विरस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त में पैसेंजर व्हीकल सेल्ट में अकेले CNG की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 25% पर पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी महीने यह आंकड़ा 21% था. देश में CNG मॉडल की बढ़ती संख्या और पेट्रोल के मुकाबले कम रनिंग कॉस्ट ग्राहकों को ज्यादा पसंद आ रहा है. हालांकि, हाल ही में दिल्ली में सीएनजी की कीमतों में 6 रुपये की तगड़ी बढ़ोतरी की गई है.

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CNG कारों के मामले में मारुति सुजुकी का दबदबा अभी भी कायम है. देश में बेची जाने वाली सभी सीएनजी कारों में मारुति सुजुकी की करीब 71% हिस्सेदारी है. इसके बाद टाटा मोटर्स का मार्केट शेयर तकरीबन 17% और हुंडई की 9% रही. आंकड़ों से साफ है कि CNG सेगमेंट तेजी से मशहूर हो रहा है और आने वाले समय में ये फ्यूल ऑप्शन और रफ्तार पकड़ेगा.

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डीजल की हिस्सेदारी करीब 17%

पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में डीजल वाहन खरीदार कम ही होते हैं. लेकिन बावजूद इसके डीजल कारों की हिस्सेदारी अगस्त में करीब 17% रही. भले ही डीजल व्हीकल्स के ऑप्शन बाजार में कम हों, लेकिन अभी भी एक बड़ा वर्ग ऐसा है तो डीजल गाड़ियों को प्राथमिकता दे रहा है. ख़ासकर तब से जब से पेट्रोल में इथेनॉल को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हुआ है. 

EV की बिक्री में 52% की छलांग

इलेक्ट्रिक कारों ने भी अगस्त में शानदार प्रदर्शन किया. EV की बिक्री सालाना आधार पर 52% बढ़कर करीब 30,700 यूनिट हो गई. इसके साथ ही पैसेंजर व्हीकल बाजार में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 7.7% तक पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह 5.9% थी. हालांकि अगस्त में EV का मार्केट शेयर जुलाई के 8.1% से थोड़ा कम रहा है, लेकिन इसके बावजूद अगस्त इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री के मामले में अब तक का तीसरा सबसे बेहतर महीना रहा. 

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इलेक्ट्रिक कारों के बाजार में Tata Motors का जलवा कायम है. टाटा मोटर्स शुरुआत से ही EV सेगमेंट में लीडर की भूमिका निभा रहा है. इलेक्ट्रिक कार बाजार में टाटा मोटर्स का मार्केट शेयर करीब 43% तक पहुंच गया है, जो दिसंबर 2025 के बाद से कंपनी का सबसे बेहतर रिकॉर्ड है. कंपनी लगातार अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल पोर्टफोलियो को मजबूत करने में लगी है.

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पेट्रोल अब अकेला डिफॉल्ट विकल्प नहीं

अगस्त के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. पेट्रोल कारें अभी भी बाजार में सबसे बड़ा हिस्सा रखती हैं, लेकिन अब वे अकेले बाय डिफॉल्ट ऑप्शन नहीं रह गई हैं. CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों ने मिलकर पेट्रोल को पीछे छोड़ दिया है. आने वाले समय में कार खरीदने का फैसला सिर्फ कीमत और डिजाइन पर नहीं, बल्कि रनिंग कॉस्ट, फ्यूल और टेक्नोलॉजी पर भी तेजी से निर्भर होता दिखाई दे रहा है.

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