इथेनॉल ब्लेंडेड E20 पेट्रोल ने आपकी गाड़ी पर कितना असर डाला है, यह तय कर पाना भले मुश्किल हो. लेकिन इस फ्यूल ने बाजार का रूख बदल कर रख दिया है. E20 को लेकर बढ़ी चिंताओं ने कार खरीदारी का तरीका और ग्राहकों के चॉइस पर तगड़ा असर डाला है. जिसके चलते दूसरे फ्यूल ऑप्शन वाले वाहनों की डिमांड में अचानक तेजी आई है और उनका वेटिंग पीरियड भी काफी बढ़ गया है.
हाल के दिनों में कई लोगों ने इस बात की शिकायत की थी कि, E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद उनके वाहनों के माइलेज में गिरावट आई है और मेंटनेंट कॉस्ट बढ़ गया है. E20 फ्यूल को लेकर सामने आने वाले इन ख़बरों का असर कार खरीदारी पर भी दिख रहा है. कई लोग अब पेट्रोल के बजाय CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की तरफ रूख कर रहे हैं. अचानक से इन वाहनों की डिमांड बढ़ने का असर इनके सप्लाई पर भी पड़ रहा है.
हालात ऐसे हैं कि कुछ लोकप्रिय EV और CNG मॉडल्स की डिमांड इतनी बढ़ गई है कि कंपनियां ग्राहकों की मांग के हिसाब से सप्लाई नहीं कर पा रही हैं. कुछ गाड़ियों पर वेटिंग पीरियड 6 महीनों तक पहुंच गया है.
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किन गाड़ियों पर कितनी वेटिंग
इस समय सबसे ज्यादा चर्चा Mahindra XEV 9S की है, जिस पर ग्राहकों को करीब छह महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है. वहीं Tata Punch EV और Tata Tiago EV के कुछ वेरिएंट्स पर 18 से 24 हफ्ते तक की वेटिंग चल रही है. इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में TVS iQube की डिमांड सबसे ज्यादा बनी हुई है. इसके कुछ वेरिएंट के लिए करीब चार से पांच महीने का इंतजार करना पड़ रहा है.
दूसरी तरफ Maruti Brezza की औसत वेटिंग करीब दो महीने है. खास बात यह है कि Brezza के कुल बुकिंग में तकरीबन 70% हिस्सेदारी केवल टर्बो-पेट्रोल और CNG वेरिएंट की है. इससे साफ है कि ग्राहक अब सिर्फ पेट्रोल मॉडल पर निर्भर रहने के बजाय दूसरे पावरट्रेन विकल्पों की तरफ तेजी से रूख कर रहे हैं. आमतौर पर फेस्टीव सीजन में वाहनों की वेटिंग बढ़ती है, लेकिन त्योहारों से पहले ही ग्राहकों को अपने पंसदीदा वाहनों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है.
यस सिक्योरिटीज की अगस्त में किए गए चैनल इंसपेक्शन के मुताबिक EV और CNG वाहनों के लिए एंक्वॉयरी और बुकिंग में 30 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. यह ट्रेडिशनल ICE यानी पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है. इस रिपोर्ट के अनुसार, नए मॉडल्स की लॉन्चिंग के साथ E20 को लेकर बढ़ती नकारात्मक धारणा के चलते ये बदलाव देखने को मिल रहा है. करीब पांच महीने पहले जहां अधिकतम वेटिंग लगभग एक महीने की थी, वहीं अब यह बढ़कर तीन से चार महीने तक पहुंच गई है.
सस्ते EV वेरिएंट्स पर सबसे ज्यादा वेटिंग
EV बाजार में एक दिलचस्प बदलाव यह देखने को मिल रहा है कि कम कीमत वाले वेरिएंट्स के लिए ग्राहकों को ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है. Tata Punch EV Smart 30 और Tiago EV के कुछ वेरिएंट्स पर 18 से 24 हफ्ते तक की वेटिंग है. वहीं Tata Sierra EV के Pure 65 वेरिएंट की डिलीवरी के लिए करीब 12 से 15 हफ्ते इंतजार करना पड़ सकता है. इसके मुकाबले Sierra EV के कुछ महंगे वेरिएंट्स की वेटिंग करीब चार से छह हफ्ते है.
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इसका सीधा मतलब यह है कि अगर ग्राहक ज्यादा पैसा खर्च करने को तैयार है तो उसे उसी मॉडल की गाड़ी काफी पहले मिल सकती है. कम कीमत वाले वेरिएंट्स की बढ़ी मांग ने कंपनियों के लिए सप्लाई का दबाव बढ़ा दिया है.
EV और CNG वाहनों की मांग में यह तेजी ऐसे समय पर देखने को मिल रही है, जब देश में त्योहारी सीजन की सबसे बड़ी खरीदारी शुरू होने वाली है. केरल में ओणम के दौरान पैसेंजर व्हीकल बिक्री सालाना आधार पर 20 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है. इसके बाद गणेश चतुर्थी, नवरात्री, धनतेरस और दीवाली जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं. आमतौर पर इन त्योहारों में लोग गाड़ियों की जमकर खरीदारी करते हैं.