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कालसर्प दोष से नागयज्ञ तक... भारतीय ज्योतिष और पौराणिक कथाओं में क्यों खास हैं नाग

ज्योतिष में सर्प राहु के साथ भी और नक्षत्रों के साथ भी हैं. 27 नक्षत्रों में अश्लेषा नक्षत्र के देवता भी सर्प ही हैं. अश्लेषा का स्वामी सर्प ही माना गया है.

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नाग पंचमी 2026 (Photo: ITG)
नाग पंचमी 2026 (Photo: ITG)

सावन महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि नाग पंचमी कहलाती है. नागों को खासतौर पर समर्पित ये त्योहार बताता है कि सांप या नाग सिर्फ विषैले या डराने वाले जंतु नहीं हैं. बल्कि इनका हमारे सामाजिक जीवन के साथ ऐसा मिला-जुला महत्व है कि, गाहे-बगाहे ये हमारे जीवन से जुड़ जाते हैं. खेती-किसानी से लेकर पर्यावरण की शुद्धता में सांपों का योगदान तो है ही, इसके साथ ही हमारी पौराणिक और लोककथाओं में भी सांप महत्वपूर्ण स्थान पर हैं. 

ज्योतिष में नागों की भूमिका

लेकिन ज्योतिष में सर्पों और नागों का जिक्र अलग ही तरीके से आता है. नवग्रहों में राहु के दोष से पीड़ित लोग सर्प का पूजन करते हैं. ज्योतिष कहता है कि हर ग्रह के दो देवता होते हैं. इसमें राहु के अधिदेवता काल और प्रतिदेवता सर्प माने जाते हैं. यही वजह है कि जिन लोगों की कुंडली में राहु दोष होता है उन्हें अधिदेवता काल और प्रतिदेवता सर्प की पूजा करने की सलाह दी जाती है. इसे ही कालसर्प दोष पूजा कहते हैं. 

ज्योतिष में सर्प राहु के साथ भी और नक्षत्रों के साथ भी हैं. 27 नक्षत्रों में अश्लेषा नक्षत्र के देवता भी सर्प ही हैं. अश्लेषा का स्वामी सर्प ही माना गया है. ठीक इसी तरह बारिश के दिनों में सूर्य जब रोहिणी से हस्त नक्षत्र के बीच यात्रा करता है तो इन नक्षत्रों में एक का वाहन सर्प भी होता है और इन्हीं वाहनों से ज्योतिषी वर्षा का होना, न होना, कम या ज्यादा होने के अनुमान लगाते हैं.

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रामायण-महाभारत में नागों का जिक्र

नागों का वर्णन प्राचीन काल से मनुष्यों के इतिहास में शामिल होता है. कई पौराणिक कथाओं में नाग एक किरदार की तरह रहे हैं. रामायण में विष्णु अवतार भगवान श्री राम के छोटे भाई लक्ष्मण और महाभारत में श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम को शेषनाग के अवतार हैं. रामायण में ही रावण के पुत्र मेघनाद की पत्नी सुलोचना, नागकन्या थी और शेषनाग की पुत्री थी. सुरसा राक्षसी नागों की माता बताई गई हैं. 

इसी तरह महाभारत में अर्जुन नागकन्या उलूपी से विवाह करता है. अर्जुन का बेटा परीक्षित तक्षक नाग के डंसने से मारा जाता है. इससे क्रोधित जन्मेजय ने जब नाग यज्ञ किया तो धरती के अधिकांश नाग भस्म हो गए. तब वासुकी नाग की बहन और ऋषि जरत्कारु के पुत्र आस्तीक ने नाग यज्ञ रुकवाया और सर्पों की रक्षा की. कहते हैं कि जन्मेजय और आस्तीक-आस्तीक जपने वाले को सर्पदंश का भय नहीं होता है.

हर कथा में एक किरदार हैं नाग
दधीची ऋषि की अस्थियों से बने अस्त्र से इन्द्र के हाथों मारा गया वृत्तासुर भी नागराज ही था. वेदों में सांप का नाम अहि मिलता है. इसके अलावा अनेक रूपों में नाग जाति के बारे में लिखा गया है. इसके अलावा नागों के नाम पर अस्त्र भी हैं. मेघनाद ने नागपाश में राम-लक्ष्मण को बांध लिया था. श्रीकृष्ण कालिया नाग का दमन करते हैं और दुर्योधन के विष से बेहोश हुए भीम नागलोक पहुंच जाते हैं. यहां उन्हें 100 हाथियों के बराबर बल प्राप्त हो जाता है. 

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यम की रस्सी भी नागों की बनी बताई जाती है. जीवन में कर्म की डोर जो कि स्वर्ग और नर्क से जुड़ी बताई जाती है, कहते हैं कि वह भी असल में एक नाग ही है. एक बार नहुष नाम के राजा को इंद्र बनाया गया, लेकिन वह अपने कर्म से मुक्त नहीं हो पाया. उसकी लालसा में लपलपाती जीभ देखकर ऋषियों ने उसे सर्प हो जाने का श्राप दे दिया. 

नाग या सर्प सिर्फ जंतु नहीं हैं, बल्कि मनुष्यों की तरह और उनके बराबर ही उनका भी इतिहास है. वह खुद एक देवता हैं, एक सभ्यता हैं. कई सभ्यताओं ने अपना प्रतीक चिह्न नागों को बनाया है. कश्मीर का अनंतनाग जिला, किसी समय में नागों की समृद्ध राजधानी था. इसके प्रमाण आज भी वहां मिलते हैं और कई लोककथाओं में इनका जिक्र होता है.

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