नाग पंचमी (Nag Panchami) हिंदुओं का एक त्योहार है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, श्रावण के चंद्र महीने के शुक्ल पक्ष (Shukla Paksha) के पांचवें दिन यह पूजा की जाती है. देश कुछ राज्यों में जैसे कर्नाटक, राजस्थान और गुजरात, नाग पंचमी को उसी महीने के कृष्ण पक्ष पर मनाते हैं (Nag Pamchami in India).
नाग पंचमी के दिन चांदी, पत्थर, लकड़ी, या सांपों की पेंटिंग से बने नाग या नाग देवता को दूध से स्नान कराया जाता है. परिवार के कल्याण के लिए उनका आशीर्वाद मांगा जाता है. कई स्थानों पर इस दिन जीवित सांपों, विशेष रूप से कोबरा की भी पूजा की जाती है (Nag Panchami, Worship of Cobra Snake).
पंचमी चंद्रमा के ढलने के पंद्रह दिनों में से पांचवां दिन है. नाग पूजा का यह विशेष दिन हमेशा चंद्र हिंदू महीने श्रावण जुलाई या अगस्त में चंद्रमा के घटने के पांचवें दिन पड़ता है. इसलिए इसे नाग पंचमी कहा जाता है (Month of Shravan).
यह नेपाल (Nepal) में भी धूमधाम से मनाया जाता है.
Nag Panchami 2026: सावन सोमवार के पावन संयोग में कल यानी 17 अगस्त को है नाग पंचमी. जानें नाग पंचमी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कालसर्प दोष मुक्ति के अचूक उपाय.
नाग पंचमी 17 अगस्त 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। पंचमी तिथि 16 अगस्त शाम 4:52 बजे शुरू होकर 17 अगस्त शाम 5 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार पर्व 17 अगस्त को ही मनाया जाएगा।
Nag Panchami 2026: नाग पंचमी हिंदूओं का एक प्रमुख त्योहार है. हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन माह की शुक्ल पक्ष के पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है. इस दिन नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है और उन्हें दूध से स्नान कराया जाता है.
Surya Gochar 2026: 17 अगस्त को सूर्य सिंह राशि में गोचर करने वाले हैं. सिंह राशि के स्वामी स्वयं सूर्य भगवान ही हैं. यानी सूर्य की घर वापसी हो रही है. खास बात ये है कि 17 अगस्त को नाग पंचमी का त्योहार भी मनाया जाएगा. ज्योतिषाचार्य पंडित शैलेंद्र पांडेय ने इस सूर्य गोचर का सभी 12 राशियों पर प्रभाव बताया है.
इस साल 17 अगस्त को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा. नाग पंचमी के दिन कई घरों में तवे पर रोटी नहीं बनती है. कुछ लोग इस दिन तवे को हाथ तक नहीं लगाते हैं. यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. दरअसल, ज्योतिष में लोहे के तवे को राहु का प्रतीक माना गया है.
Nag Panchami 2026: 17 अगस्त को है नाग पंचमी. इस दिन भूलकर भी जमीन न खोदें और न करें ये 5 गलतियां, वरना नाग देवता की नाराजगी से जीवन में बढ़ सकती हैं मुश्किलें. जानें जरूरी नियम.
Nag Panchami 2026: 17 अगस्त 2026 को सावन का तीसरा सोमवार, नाग पंचमी और सूर्य देव का राशि परिवर्तन एक साथ होने जा रहा है. भगवान शिव, नाग देवता और सूर्य देव के इस दुर्लभ त्रिवेणी संगम से कई राशियों को फायदा होगा.
17 अगस्त 2026 को सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी एक ही दिन पड़ रहे हैं. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार यह विशेष संयोग भगवान शिव और नाग देवता की कृपा पाने का अवसर माना जाता है. इस दिन शिवलिंग पर नीला अपराजिता फूल, बेलपत्र और शमी के पत्ते चढ़ाने जैसे उपाय बताए गए हैं. कर्ज, आर्थिक परेशानी और कालसर्प दोष से राहत के लिए भी कुछ धार्मिक उपाय बताए जाते हैं.
ज्योतिषविदों के अनुसार, श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि यानी नागपंचमी इस वर्ष 17 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी. सावन सोमवार पर नागपंचमी का संयोग करीब 23 वर्ष पहले बना था. इससे पहले वर्ष 2003 में भी नागपंचमी सोमवार को पड़ी थी. अब लगभग 23 वर्ष बाद यह संयोग दोबारा बन रहा है, इसलिए इसे विशेष फलदायी माना जा रहा है.
इस साल सावन शुक्ल पंचमी 16 अगस्त को शाम 04:52 बजे प्रारंभ होगी. 17 अगस्त को शाम 05:00 बजे तिथि समाप्त हो जाएगी. ऐसे में नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त दिन सोमवार को मनाया जाएगा. इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:04 बजे से सुबह 08:39 बजे तक रहने वाला है.
Sawan 2026: इस साल सावन के तीसरे सोमवार को नाग पंचमी और सिंह संक्रांति का 23 साल बाद बेहद दुर्लभ महासंयोग बनने जा रहा है. ज्योतिषियों के मुताबिक, यह संयोग बहुत ही विशेष माना जा रहा है.
पश्चिम बंगाल से चलकर, आसाम और बिहार व इसके साथ ओडिशा में भी बिहुला-विषहरी की गाथा, थोड़ी बहुत रद्दोबदल के साथ बहुत मशहूर है और नागपंचमी मनाए जाने का कारण भी है. भागवत पुराण में सती बिहुला का जिक्र आता है, जहां वह अपने पूर्व जन्म बाणासुर की पुत्री ऊषा के तौर पर दिखाई देती है. ऊषा का विवाह श्रीकृष्ण के पोते अनिरुद्ध के साथ हुआ था.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 29 जुलाई को बुध का पुष्य नक्षत्र में गोचर होगा. शनि-बुध एक दूसरे के मित्र माने जाते हैं. ऐसे में बुध के नक्षत्र परिवर्तन से कुछ राशियों का भाग्य बेहतर हो जाएगा.
Nagchandreshwar Mandir: नाग पंचमी आज मनाई जा रही है. नागों से संबंधित उज्जैन में एक मंदिर स्थापित है जिसका नाम नागचंद्रेश्वर मंदिर है. नागचंद्रेश्वर मंदिर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थापित है और खास बात यह है कि इस मंदिर को सिर्फ 24 घंटे के लिए ही श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है.
इस बार नाग पंचमी 29 जुलाई यानी कल मनाई जाएगी. भारत के अनेकों मंदिरों में सांपों को देवता के रूप में पूजकर उनसे सुख-शांति और समृद्धि की कामना भी की जाती है.
प्राचीन विश्व की लगभग सभी सभ्यताओं की मूर्तिकला को देखें तो एक बात बहुत साफ मिलती है कि इनमें सांपों का होना अनिवार्य सा नजर आता है. मिस्र की प्राचीन सभ्यता में तो नाग शासन के भी महत्वपूर्ण तत्व रहे हैं. भारतीय इतिहास और संस्कृति में नाग या सर्प से संबंधित अनेक साहित्यिक आख्यान और आर्कियोलॉजिकल एविडेंस मिल जाएंगे.
Nag Panchami 2025: नाग पंचमी का त्योहार हर साल सावन में मनाया जाता है. इस दिन मुख्य रूप से सांप या फिर नाग की देवता भांति पूजा-अर्चना की जाती है. नाग पंचमी के मौके पर लोग दिन भर व्रत रखते हैं और सांपों की पूजा करते हैं और उन्हें दूध पिलाते हैं. नाग पंचमी का व्रत बेहद फलदायी और शुभ माना जाता है.
नाग पंचमी का पर्व सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है, जो इस साल 29 जुलाई 2025 को पड़ रही है. इस दिन भगवान शिव और नाग देवता की विशेष पूजा की जाती है.
पूर्वी बिहार के इलाकों में नागपंचमी के विशेष अनुष्ठान के लिए 'बारी कलश' की स्थापना की जाती है. यह मिट्टी का एक बड़ा घड़ा होता है. इसके चारों ओर गोबर से सुंदर आकृति बनाई जाती है. इन आकृतियों में सर्पिल आकृतियां अधिक होती हैं. फिर कलश स्थापना करके पांच नागिन बहिनियों को बुलाया जाता है और कलश पर स्थापित किया जाता है.
नाग पंचमी के दिन नाग देवता और भगवान शिव की उपासना की जाती है. इस बार नाग पंचमी 29 जुलाई यानी कल मनाई जाएगी.
नाग पंचमी इस बार बहुत ही खास मानी जा रही है क्योंकि इस दिन बहुत सारे संयोगों का निर्माण होने जा रहा है. नाग पंचमी पर रवि योग, सौभाग्य योग, शिव योग और अभिजीत मुहूर्त का संयोग बनने जा रहा है.