खुद भारी विदेशी कर्ज के बोझ तले दबा पाकिस्तान अब दुनिया के कर्ज लेने वाले विकासशील देशों के मंच की अगुवाई करेगा. दरअसल, IMF से अरबों डॉलर की मदद मांग चुके पाक वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने 12 अक्टूबर को बैंकॉक में इस मंच की अध्यक्षता संभाली. हालांकि, इस पद से पाकिस्तान का कर्ज माफ नहीं होगा. न ही उसे कर्ज चुकाने की शर्तों में कोई खास छूट मिलेगी.
पाकिस्तान खुद आर्थिक संकट और भारी विदेशी कर्ज से जूझ रहा है. इसके बावजूद उसे संयुक्त राष्ट्र के समर्थन वाले 'बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म' यानी कर्ज लेने वाले देशों के मंच की कमान मिली है. पाकिस्तान सरकार के मुताबिक, वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने 12 अक्टूबर को बैंकॉक में इस मंच की गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष का पद संभाला.
इस मंच का मकसद विकासशील देशों को कर्ज के प्रबंधन में मदद करना, उनके अनुभव साझा करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी चिंताओं को मजबूती से उठाना है. अब पाकिस्तान को इन देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और 2026-27 के कार्य कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी मिलेगी.
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खुद कर्ज में डूबा है पाकिस्तान
पाकिस्तान की इस नियुक्ति पर इसलिए भी चर्चा हो रही है, क्योंकि वह खुद लगातार बाहरी आर्थिक मदद पर निर्भर रहा है. 7 अक्टूबर को पाकिस्तान और IMF के बीच एक समझौते पर सहमति बनी थी. इसके तहत करीब 1.21 अरब डॉलर की मदद मिल सकती है. हालांकि, इसके लिए IMF के कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी जरूरी है.
इससे पहले 2023 में पाकिस्तान 3 अरब डॉलर के IMF राहत पैकेज की मदद से संप्रभु डिफॉल्ट यानी कर्ज चुकाने में पूरी तरह नाकाम होने की स्थिति से बचा था. इसके बाद 2024 में उसे 7 अरब डॉलर का एक और कार्यक्रम मिला. पाकिस्तान ने जलवायु से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए 1.3 अरब डॉलर का अलग IMF ऋण भी हासिल किया. स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के आंकड़ों की माने तो मार्च 2026 के आखिर तक देश का कुल बाहरी कर्ज और देनदारियां 137.55 अरब डॉलर थीं.
क्या है बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म?
दरअसल, बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म विकासशील देशों का ऐसा मंच है, जहां कर्ज लेने वाले देश अपने अनुभव शेयर कर सकते हैं. यहां वे कर्ज के बेहतर प्रबंधन, आर्थिक सुधारों और विकास के लिए वित्त जुटाने के तरीकों पर चर्चा करते हैं. इस मंच को संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNCTAD का सचिवालय सहयोग देता है. इस मंच का विचार जुलाई 2025 में स्पेन के सेविले में आयोजित विकास वित्त सम्मेलन के दौरान सामने आया था. इसे 15 अप्रैल 2026 को वॉशिंगटन में औपचारिक रूप से शुरू किया गया.
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इसका उद्देश्य कर्ज लेने वाले देशों को एक स्थायी मंच देना है. दुनिया में कर्ज देने वाले देशों के बीच समन्वय के लिए लंबे समय से व्यवस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन कर्ज लेने वाले देशों के पास आपसी सहयोग के लिए ऐसा स्थायी मंच नहीं था.
UNCTAD में कर्ज और विकास से जुड़े मामलों की प्रमुख पेनेलोप हॉकिन्स ने अप्रैल में मंच की शुरुआत के दौरान कहा था कि कर्ज देने वाले देशों के ग्रुप 'पेरिस क्लब' को इस तरह के समन्वय का करीब 70 साल का अनुभव है.
पाकिस्तान की क्या होगी जिम्मेदारी?
पाकिस्तान इस मंच को तैयार करने की प्रक्रिया में पहले से शामिल था. वह मिस्र की अगुवाई वाले कार्य समूह का उपाध्यक्ष था. इस समूह में कोलंबिया, होंडुरास, मालदीव, नेपाल और जाम्बिया भी शामिल थे. ग्रुप ने मंच के कामकाज, सदस्यता और संचालन से जुड़े नियम तैयार करने में मदद की.
UNCTAD के मुताबिक, मंच के सदस्य हर साल अपना अध्यक्ष चुनते हैं. गवर्निंग काउंसिल में वित्त मंत्री, केंद्रीय बैंक के गवर्नर और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी प्राथमिकताएं तय करते हैं. वहीं, संचालन समिति तकनीकी और व्यावहारिक कामकाज संभालती है.
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पाकिस्तान के वित्त मंत्री औरंगजेब ने कहा है कि उनका देश कर्ज प्रबंधन बेहतर बनाने, आर्थिक सुधारों के अनुभव साझा करने और विकास के लिए वित्त जुटाने के नए तरीके तलाशने पर ध्यान देगा. उन्होंने योजनाओं को जमीन पर उतारने और उनके नतीजों को मापने की जरूरत पर भी जोर दिया.
मालूम हो, इस पद के साथ पाकिस्तान को कर्ज माफी या भुगतान में छूट मिलने का कोई प्रावधान नहीं है. UNCTAD के मुताबिक, यह मंच अपने सदस्यों की ओर से कर्ज की शर्तों या भुगतान पर बातचीत नहीं करेगा. यह कर्ज से जुड़ी मौजूदा व्यवस्थाओं के साथ काम करेगा.
यानी पाकिस्तान की भूमिका कर्ज से परेशान देशों को एक साथ लाने, उनके अनुभव साझा कराने और उनकी समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की होगी. वह इस मंच की अगुवाई जरूर करेगा, लेकिन इससे उसके अपने कर्ज की जिम्मेदारियां खत्म नहीं होंगी.
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