आज के समय में दुनिया के कई देशों में असंतोष और गुस्से का एक नया दौर देखने को मिल रहा है. भारत से लेकर यूरोप और अमेरिका तक, जगह-जगह बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. सरकार की नीतियों के खिलाफ जनता सड़कों पर उतर आई है.
फ्रांस, इटली,और अल्बानिया से लेकर अर्जेंटीना और तुर्किये तक, लोग महंगाई, बेरोजगारी, आवास संकट को लेकर जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं.
फ्रांस और अल्बानिया में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की वजह से बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले जनता का गुस्सा फूट पड़ा है.
फ्रांस- बढ़ती महंगाई और ईंधन के दामों को लेकर प्रदर्शन
फ्रांस में इन प्रदर्शनों की दो मुख्य वजहें हैं- एक तरफ जहां बढ़ती महंगाई और ईंधन के दामों को लेकर जनता में आक्रोश है, वहीं दूसरी तरफ स्टूडेंट और टीचर स्कूल की बदहाल स्थिति और शिक्षा बजट में कटौती का विरोध कर रहे हैं. राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के लिए ये चुनाव उनका कार्यकाल खत्म होने से पहले एक बड़ा इम्तिहान बन गया है.
फ्रांस में ये छात्र आंदोलन पिछले महीने पेरिस में स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ था, जो धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया. फ्रांस 24 को जानकारी देते हुए फ्रांसीसी आंतरिक मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि घटती क्रय शक्ति (Purchasing Power) के खिलाफ हुए इन प्रदर्शनों में करीब 5.5 लाख लोगों ने हिस्सा लिया, जिनमें पेरिस की सड़कों पर 1.10 लाख लोग उतरे थे. इस दौरान कई जगहों पर हिंसक झड़पें भी हुईं.
बेल्जियम- यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रेशन फीस बढ़ाने का विरोध
पड़ोसी देश बेल्जियम में भी कुछ ऐसा ही हाल है. सार्वजनिक खर्चों में कटौती और बढ़ते घरेलू खर्चों के बीच छात्रों ने उच्च शिक्षा और यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रेशन फीस बढ़ाने का विरोध किया है. ब्रसेल्स और लिएज में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़पों के बाद पुलिस को वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा.
पुर्तगाल- बढ़ती महंगाई और कम सैलरी के विरोध में मार्च
पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में हजारों लोगों ने बढ़ती महंगाई, कम सैलरी और सस्ते मकान मिलने में हो रही मुश्किलों के खिलाफ मार्च निकाला. लिस्बन और कई दूसरे शहरों में 2017 के बाद से संपत्ति की कीमतें दोगुनी से ज्यादा हो चुकी हैं, जबकि किराए में भी भारी बढ़ोतरी हुई है. इससे कम आय वाले परिवारों और युवा कामगारों पर भारी आर्थिक दबाव आ गया है.
इटली- महंगाई के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन
वहीं, इटली में भी यूरोप के दूसरे हिस्सों जैसे ही हालात देखने को मिल रहे हैं. मिलान में स्थिर वेतन, महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने में आ रही दिक्कतों को लेकर लोगों ने प्रदर्शन किए और झड़पों की खबरें भी सामने आईं, हालांकि इटली के प्रदर्शन फ्रांस के मुकाबले छोटे थे.
अल्बानिया और तुर्किये में सुलगता असंतोष
अल्बानिया में भी छात्र विश्वविद्यालयों की बद्तर स्थिति, पढ़ाई में ज्यादा खर्च और ग्रेजुएशन के बाद रोजगार के मौकों की कमी को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं. 13 अक्टूबर को तिराना में शिक्षा मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन हिंसक हो गया, जब छात्रों ने इमारत पर ईंटें और कंक्रीट के ब्लॉक फेंके, जिसके जवाब में पुलिस ने कार्रवाई की.
उधर, तुर्किये में पिछले महीने पेंशनभोगियों और मजदूर संगठनों ने लगातार बढ़ती महंगाई और अपर्याप्त पेंशन भुगतान के खिलाफ प्रदर्शन किए. अंकारा में संवैधानिक अदालत के बाहर जमा हुए पेंशनभोगियों ने गरिमा के साथ जिंदगी जीने के अपने अधिकार की मांग की.
अर्जेंटीना और अमेरिका में भी विरोध की गूंज
लैटिन अमेरिकी देश अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में बजट में भारी कटौती करने वाले राष्ट्रपति जेवियर माइली की उच्च शिक्षा नीति के खिलाफ इस हफ्ते की शुरुआत में प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प हो गई. संसद के बाहर हजारों विश्वविद्यालय के छात्रों, कर्मचारियों और ट्रेड यूनियन के सदस्यों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया. माइली के सत्ता में आने के बाद से शिक्षा फंडिंग संकट को लेकर ये पांचवां बड़ा विरोध प्रदर्शन है.
संयुक्त राज्य अमेरिका में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ 'नो किंग्स' नेटवर्क ने देश भर के शहरों में रैलियां कीं. इसका मकसद मध्यावधि चुनावों में लोगों को जल्दी मतदान करने के लिए प्रोत्साहित करना था. हालांकि इन्हें गैर-पक्षपाती बताया गया, लेकिन ये ट्रंप की नीतियों से असंतुष्ट लोगों के दो साल के लंबे विरोध का ही एक हिस्सा था.
यह भी पढ़ें: कनॉट प्लेस में प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने दर्ज की कई FIR, बार-बार नियम तोड़ने वालों पर सख्ती
भारत में पहले से ही वोटर लिस्ट के SIR में गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन जारी है. ऐसे में साफ है कि देश से विदेश तक में सरकार की नीतियों के खिलाफ जनता में विरोध की आग सुलग रही है और लोग अपने हक के लिए आवाज उठा रहे हैं.
दरख़्शां मुमताज़