समुद्र बढ़ा तो घुसपैठिए जीव करेंगे नए इलाकों पर कब्जा, 122 समुद्री प्रजातियों पर चौंकाने वाली स्टडी

समुद्र का पानी बढ़ेगा तो सिर्फ जमीन ही नहीं डूबेगी, नए इलाकों पर समुद्री जीवों का कब्जा भी बढ़ सकता है. बढ़ता समुद्र स्तर 2100 तक लाखों वर्ग KM तटीय जमीन को इनवेसिव स्पीशीज के लिए नया ठिकाना बना सकता है.

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समंदर का लेवल बढे़गा तो घुसपैठिए जीव शहरी और गांवों में घुस आएंगे. (Photo: Getty) समंदर का लेवल बढे़गा तो घुसपैठिए जीव शहरी और गांवों में घुस आएंगे. (Photo: Getty)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 30 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:00 AM IST

जलवायु परिवर्तन की वजह से समुद्र का पानी लगातार बढ़ रहा है. इसका असर सिर्फ तटीय जमीन के डूबने तक नहीं रहेगा. 28 सितंबर को आई एक स्टडी के मुताबिक, समुद्र का पानी बढ़ने से कई ऐसे समुद्री जीवों को नए इलाकों में फैलने का मौका मिल सकता है, जो वहां के मूल जीव नहीं हैं. वैज्ञानिकों ने 122 समुद्री इनवेसिव स्पीशीज पर स्टडी करके यह पता लगाया है कि समुद्र का स्तर बढ़ने पर इनका खतरा कहां बढ़ सकता है.

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स्टडी के मुताबिक, 2050 तक समुद्र का बढ़ता पानी करीब 3.6 लाख वर्ग किलोमीटर तटीय जमीन को डुबो सकता है. 2100 तक यह आंकड़ा करीब 5.5 लाख वर्ग किलोमीटर हो सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि पानी में जाने वाले इन नए इलाकों के बड़े हिस्से में समुद्री इनवेसिव स्पीशीज के रहने के लिए सही माहौल बन सकता है.

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वैज्ञानिकों ने जिन 122 प्रजातियों को देखा, उनमें मछलियां, क्रस्टेशियन, मोलस्क और सी स्टार जैसी समुद्री प्रजातियां शामिल हैं. ये जीव अपने मूल इलाके से बाहर दूसरे हिस्सों में पहले ही फैल चुके हैं. स्टडी में अलग-अलग जलवायु हालात के आधार पर यह देखा गया कि समुद्र बढ़ने के बाद ये प्रजातियां किन नए इलाकों तक पहुंच सकती हैं.

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समुद्र का स्तर बढ़ने की दो बड़ी वजहें हैं. पहली, समुद्र का पानी गर्म होने पर फैलता है. दूसरी, ग्लेशियर और आइस शीट पिघलने से समुद्र में ज्यादा पानी पहुंचता है. स्टडी के अनुमान के मुताबिक, 2050 तक समुद्र का स्तर करीब 20 सेंटीमीटर और 2100 तक करीब 56 सेंटीमीटर बढ़ सकता है.

3.6 लाख वर्ग किलोमीटर जमीन डूब सकती है

स्टडी के मुताबिक, 2050 तक करीब 3.6 लाख वर्ग किलोमीटर तटीय जमीन समुद्र के पानी में जा सकती है. 2100 तक यह इलाका बढ़कर करीब 5.5 लाख वर्ग किलोमीटर हो सकता है. वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि इनमें से करीब 2.9 लाख से 4.7 लाख वर्ग किलोमीटर जमीन पर उन समुद्री जीवों के रहने के लिए सही हालात बन सकते हैं, जिनका अध्ययन किया गया है. यानी समुद्र का पानी बढ़ने से इन प्रजातियों के लिए नए इलाके खुल सकते हैं.

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इन इलाकों में ज्यादा खतरा

स्टडी में दुनिया के कई ऐसे इलाके बताए गए हैं जहां इन समुद्री जीवों के फैलने का खतरा ज्यादा हो सकता है. इनमें अमेरिका का पूर्वी तट, गल्फ ऑफ मेक्सिको, नॉर्थ सी, गल्फ ऑफ गिनी, अरेबियन गल्फ, उत्तरी बंगाल की खाड़ी, दक्षिण-पूर्वी चीन और उत्तरी ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं.

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एस्ट्यूरी यानी जहां नदी का पानी समुद्र से मिलता है, वहां खतरा ज्यादा हो सकता है. इन इलाकों का समुद्र से सीधा कनेक्शन होता है. साथ ही यहां इंसानी गतिविधियां भी ज्यादा होती हैं. समुद्र का पानी आगे बढ़ने पर ये जगहें इनवेसिव स्पीशीज के लिए नए इलाकों तक पहुंचने का रास्ता बन सकती हैं.

कई प्रजातियां पहले ही फैल चुकी हैं

ऐसी कई समुद्री प्रजातियां हैं जो अपने मूल इलाके से बाहर फैल चुकी हैं. यूरोप में पैसिफिक ऑयस्टर, अटलांटिक ब्लू क्रैब और वेन्ड रापा व्हेल्क इसके उदाहरण हैं. समुद्र का पानी बढ़ने पर इन जीवों को नए इलाकों तक पहुंचने और वहां रहने का मौका मिल सकता है. इससे वहां पहले से मौजूद स्थानीय प्रजातियों के लिए परेशानी बढ़ सकती है. इन जीवों के बीच खाने और रहने की जगह को लेकर मुकाबला भी बढ़ सकता है.

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पर्यावरण के साथ अर्थव्यवस्था पर भी असर

इनवेसिव स्पीशीज का असर सिर्फ समुद्री जीवों पर नहीं पड़ता. ये पूरे इकोसिस्टम को बदल सकती हैं. इसका असर मछली पकड़ने और तटीय इलाकों से जुड़े दूसरे कामों पर भी पड़ सकता है. आईपीबीईएस के मुताबिक, 2019 में दुनिया भर में बायोलॉजिकल इनवेजन से 423 अरब डॉलर से ज्यादा का आर्थिक नुकसान हुआ था. वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र का स्तर बढ़ने के साथ इनवेसिव स्पीशीज के फैलने के खतरे को भी तटीय इलाकों की प्लानिंग और निगरानी में ध्यान में रखना जरूरी होगा.

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