PAK सीमा के पास हाईवे को बनाया रनवे, सेना ने उतारे अटैक हेलिकॉप्टर

भारत-पाकिस्तान सीमा के पास NH-911 को अस्थाई सैन्य रनवे में बदला गया. दंतौर के पास रुद्र, ध्रुव और चेतक हेलिकॉप्टरों ने लैंडिंग-टेकऑफ अभ्यास किया. ताकि मिशन के दौरान ऑप्शन की प्रैक्टिस की जा सके.

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ये भारतीय सेना का अटैक हेलिकॉप्टर रुद्र. (Photo: IAF_MCC) ये भारतीय सेना का अटैक हेलिकॉप्टर रुद्र. (Photo: IAF_MCC)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 29 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:53 PM IST

भारतीय सेना ने राजस्थान के दंतौर इलाके में राष्ट्रीय राजमार्ग-911 (NH-911) के एक हिस्से को अस्थाई रूप से सैन्य रनवे में बदल दिया. यह स्थान भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के काफी करीब है. यहां सेना की एविएशन यूनिट्स ने हेलिकॉप्टर लैंडिंग अभ्यास किया. 

रुद्र, ध्रुव और चेतक हेलिकॉप्टरों ने हाईवे के निर्धारित हिस्से पर लैंडिंग और टेक-ऑफ के ड्रिल पूरे किए. यह अभ्यास पारंपरिक एयरबेस, एयरफील्ड और हेलीपैड के अलावा ऑप्शनल लैंडिंग क्षेत्रों से ऑपरेशन करने की क्षमता को दर्शाता है. रेगिस्तानी चुनौतीपूर्ण माहौल में सटीक फ्लाइट कंट्रोल, नियंत्रित लैंडिंग-टेकऑफ और एयरक्रू व ग्राउंड टीम्स के बीच तालमेल पर जोर दिया गया.

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यह अभ्यास इसलिए खास है क्योंकि यह दिखाता है कि जरूरत पड़ने पर सड़कों को भी सैन्य हवाई अड्डे की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. युद्ध या आपात स्थिति में अगर पारंपरिक एयरबेस क्षतिग्रस्त हो जाएं या उपलब्ध न हों तो ऐसी व्यवस्था बहुत काम आती है. हेलिकॉप्टरों को किसी भी उपयुक्त सपाट सतह से उतारने और उड़ाने की क्षमता सैन्य लचीलापन बढ़ाती है. 

रुद्र सशस्त्र हेलिकॉप्टर है जो हमले के मिशन कर सकता है. ध्रुव बहुउद्देश्यीय है. चेतक पुराना लेकिन विश्वसनीय प्लेटफॉर्म है. तीनों का एक साथ अभ्यास सेना की विभिन्न हेलिकॉप्टर क्षमताओं को एकीकृत करने की तैयारी दर्शाता है. ग्राउंड टीम्स के साथ समन्वय से सुरक्षा और सटीकता सुनिश्चित हुई.

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सीमावर्ती रेगिस्तानी इलाके की चुनौतियां

दंतौर राजस्थान के पश्चिमी रेगिस्तानी क्षेत्र में स्थित है. यहां लंबी दूरी, कठिन भूभाग, कठोर मौसम और सीमित बुनियादी ढांचा चुनौती पेश करते हैं. धूल, गर्मी और रेत के तूफान हेलिकॉप्टर संचालन को मुश्किल बना सकते हैं. ऐसे माहौल में अभ्यास करना वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों की तैयारी है. 

भारत-पाकिस्तान सीमा के पास होने से यह अभ्यास सामरिक संदेश भी देता है. यह दर्शाता है कि सेना सीमा के करीब भी तेजी से और लचीले तरीके से हवाई समर्थन जुटा सकती है. पारंपरिक बुनियादी ढांचे पर निर्भरता कम करने से ऑपरेशनल रेजिलिएंस यानी लचीलापन बढ़ता है.

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आधुनिक युद्ध में हवाई गतिशीलता बहुत महत्वपूर्ण है. हेलिकॉप्टर सैनिकों को तेजी से पहुंचाने, घायलों को निकालने, टोही और हमले के मिशन में मदद करते हैं. हाईवे लैंडिंग जैसी क्षमता से सेना किसी भी इलाके में जल्दी तैनात हो सकती है. यह अभ्यास सिर्फ तकनीकी कौशल नहीं बल्कि योजना, समन्वय और अनुकूलन की क्षमता को भी मजबूत करता है. 

भविष्य में ऐसी और जगहों पर अभ्यास हो सकते हैं ताकि पूरे देश में वैकल्पिक लैंडिंग विकल्प तैयार रहें. कुल मिलाकर NH-911 पर यह प्रदर्शन भारतीय सेना की तैयारियों और आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप बदलने के प्रोसेस को दिखाता है. 

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