जयपुर में आयोजित 'आजतक पंचायत राजस्थान' के मंच पर पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने शिरकत किया, इस दौरान उन्होंने बातचीत में राजस्थान के राजनीतिक घटनाक्रम, स्थानीय निकाय चुनावों, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, और 'इंडिया' गठबंधन में राहुल गांधी की भूमिका पर खुलकर अपने विचार रखे.
सचिन पायलट से यह सवाल किया गया कि क्या राहुल गांधी अब 'इंडिया' गठबंधन के सबसे प्रमुख चेहरे के रूप में स्थापित हो चुके हैं, तो उन्होंने इस पर स्पष्ट जवाब दिया.
राहुल गांधी 'इंडिया' गठबंधन का चेहरा हैं-सचिन पायलट
सचिन पायलट ने राहुल गांधी ने संसद से लेकर सड़क तक हर मुद्दे पर डटकर मुकाबला किया है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में उन्होंने समूचे विपक्ष को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई है. समूचा विपक्ष उनके साथ खड़ा है.
उन्होंने कहा क राजनीतिक दबावों के बावजूद राहुल गांधी पीछे नहीं हटे. उनके इसी संघर्ष और जनता के अधिकारों के लिए खड़े होने के दम पर वे आज 'इंडिया' गठबंधन के सबसे प्रमुख और स्वाभाविक नेता के रूप में उभरे हैं. राहुल गांधी पिछले 12 सालों से पीएम मोदी के आंख में आंख डालकर बात कर रहे हैं, जो भी बात उन्होंने कही है, उस पर अड़े हुए हैं और वो सारी बाते सच हो रही है.
पायलट ने कहा कि राहुल गांधी निडर हैं और सदन से सड़क तक संघर्ष कर रहे हैं राहुल गांधी विपक्षी नेता है, ये तो जगजाहिर है, कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है और राहुल गांधी राष्ट्रीय नेता हैं, लेकिन क्षेत्रीय दल भी हमारे साथ हैं, उनके नेता भी हैं, उनके अपने भी जनाधारा हैं. वो सभी राहुल गांधी के साथ मजबूती से खड़े हैं.
राजस्थान के निकाय और पंचायत चुनाव पर बोले पायलट
राजस्थान के शहरी निकाय और पंचायत चुनावों पर बात करते हुए पायलट ने दावा किया कि भाजपा और कांग्रेस के बीच कुल मत प्रतिशत (वोट शेयर) में 1% से भी कम का अंतर था. शहरी इलाके में बीजेपी का हमेंशा से गढ़ रहा है. उसके बावजूद बीजेपी को झटका है. कांग्रेस का ग्राफ बढ़ा है. जनता का समर्थन कांग्रेस के साथ है, जो चुनाव नतीजे भी बता रहे हैं, लेकिन बीजेपी ने धांधली से मेयर और अध्यक्ष बना लिए.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने चुनावों को लंबे समय तक टाला, वार्डों का मनमाने ढंग से परिसीमन किया और पुलिस व प्रशासन पर दबाव बनाकर परिणामों को प्रभावित किया. इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस की जड़ें मजबूत हैं और जनता में सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश है.
चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर तीखे सवाल
सचिन पायलट ने पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव और पद से हटने के बाद मिलने वाले कानूनी संरक्षण को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें सरकार का एकतरफा प्रभाव न हो और सभी पक्षों को समान अवसर मिले.
उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थाओं की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनाई गई है, जिससे उनकी निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है। पायलट के मुताबिक, चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया और जवाबदेही से जुड़े प्रावधानों की समीक्षा जरूरी है.
पायलट ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस का विरोध चुनाव प्रक्रिया के खिलाफ नहीं, बल्कि चुनाव कराने वाली संस्था की निष्पक्षता को लेकर है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कई चुनाव जीते हैं और कई चुनावों में हार का सामना भी किया है, लेकिन लोकतंत्र में जनता के फैसले को स्वीकार करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि हमें चुनाव में पूरा भरोसा है, चुनाव आयोग पर नहीं.
पायलट ने कहा कि यदि चुनाव कराने वाले अधिकारियों की मंशा और कार्यप्रणाली संदिग्ध हो, तो मतदाताओं और राजनीतिक दलों का भरोसा कायम रखना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने आगामी चुनावों से पहले चुनाव आयोग में सुधार की जरूरत बताई.
परिसीमन की प्रक्रिया पर पायलट ने उठाया सवाल
सचिन पायलट ने परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर भी केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि परिसीमन एक निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए और इसके लिए जनगणना तथा परिसीमन आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण है.
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रक्रिया पूरी होने से पहले परिसीमन को आगे बढ़ाने की कोशिश राजनीतिक हितों से प्रेरित हो सकती है। पायलट ने कहा कि सरकार को स्थापित प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए और किसी भी बदलाव को राजनीतिक लाभ के नजरिये से नहीं देखना चाहिए.
विदेश नीति, विरोध प्रदर्शन और अन्य मुद्दे
बांग्लादेश से जुड़े बयानों और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर सचिन पायलट ने स्पष्ट किया कि उनके लिए देश सबसे पहले है, उन्होंने कहा कि सरकार किसी की भी हो, देश, जनता, नागरिक और संविधान पहले आते हैं. पायलट ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और राजनीतिक दलों से ऊपर देश, जनता और संविधान का स्थान है.
उन्होंने युवाओं की भागीदारी और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा को जरूरी बताते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ी को भी वही स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, जो देश के नागरिकों को संविधान ने दी है.उन्होंने राज्य सरकार के दावों को खारिज करते हुए कहा कि पेपर लीक और प्रशासनिक खींचतान के कारण आज राज्य का युवा वर्ग परेशान है और बदलाव चाहता है.
उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यायपालिका चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर उचित निर्णय लेगी। साथ ही कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करना आवश्यक है.
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