सचिन पायलट, राजनेता
भारतीय राजनेता सचिन पायलट (Sachin Pilot) का जन्म 7 सितंबर 1977 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुआ था (Date of Birth). एक युवा नेता के रूप में वे राजस्थान के उप-मुख्यमंत्री (Deputy Chief Minister) और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष रहे हैं.
बतौर कांग्रेस पार्टी सदस्य, वे 2018 से टोंक के विधायक के रूप में राजस्थान विधान सभा के सदस्य हैं. सचिन संसद सदस्य बनने वाले भारत के सबसे युवा नागरिक रहे हैं (youngest citizen). उनके पिता स्वर्गीय राजेश पायलट कांग्रेस के बड़े नेता और केंद्रीय मंत्री थे, उनकी मां का नाम रमा पायलट है (Father Mother).
सचिन पायलट की स्कूली शिक्षा एयरफोर्स बाल भारती स्कूल, नई दिल्ली से हुई (Air Force Bal Bharati School, New Delhi), और उनके पास सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री है (St. Stephens College). और उन्होंने आईएमटी गाजियाबाद से मार्केटिंग में डिप्लोमा किया है (I.M.T. Ghaziabad). पायलट ने अमेरिका के फिलाडेल्फिया स्थित पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के वार्लटन स्कूल से एमबीए किया है (Wharton School of the University of Pennsylvania).
सचिन पायलट का विवाह सारा अब्दुल्लाह से 15 जनवरी 2004 को हुआ, जो कश्मीरी नेता और जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्लाह की पुत्री हैं (Sachin Pilot married Sara Abdullah). इनके दो बेटे हैं, आरन और विहान (Sachin Pilot Son). पायलट 2004 लोकसभा चुनावों में महज 26 साल की उम्र में भारत के सबसे युवा सांसद के तौर पर दौसा चुनाव क्षेत्र से चुने गए थे (youngest MP in India). उन्होंने 17 दिसंबर 2018 को अशोक गहलोत सरकार में उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी (Deputy Chief Minister of Rajasthan).
उनका ऑफिशियल ट्विटर हैंडल @SachinPilot है और उनके ऑफिशियल फेसबुक पेज का नाम Sachin Pilot है. वे इंस्टग्राम पर sachinpilot यूजरनेम से एक्टिव हैं.
राजनीतिक गतिविधियां 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में तेज हो गई हैं. BJP ने नशा मुक्त पंजाब यात्रा शुरू की है. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन आज यात्रा को हरी झंडी दिखाएंगे. वहीं अकाली दल चुनावी घोषणा पत्र की तैयारी में जुटा है. वहीं कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के लिए रिपोर्ट तैयार कर रही है.
पंजाब में गुलजार सिंह सुसाइड केस को लेकर कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. सचिन पायलट के नेतृत्व में पार्टी के वरिष्ठ नेता एक मंच पर आए और एकजुटता का संदेश दिया.
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के नतीजों में जहां बीजेपी ने प्रमुख शहरों में बोर्ड बनाकर बढ़त हासिल की है, वहीं भरतपुर, पाली और झालावाड़ जैसे इलाकों में कांग्रेस व निर्दलीयों ने सेंध लगाई है. इन नतीजों ने जहां मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, दीया कुमारी और डोटासरा-पायलट का कद मजबूत किया है, वहीं वसुंधरा राजे और मदन राठौड़ को अपने ही गढ़ में झटका लगा है.
राज्य निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, 147 नगर निकायों में कुल 87,63,595 मतदाताओं में से 61,35,153 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. छह नगर निगमों में जोधपुर में 71.10 प्रतिशत, पाली में 70.94 प्रतिशत, उदयपुर में 67.26 प्रतिशत, अजमेर में 63.65 प्रतिशत, जयपुर में 62.88 प्रतिशत और कोटा में 57.02 प्रतिशत मतदान हुआ। बाड़मेर जिले के धोरीमन्ना नगरपालिका में सबसे अधिक 91.59 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि कई छोटी नगरपालिकाओं में 85 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ.
कांग्रेस के सामने पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन और नेतृत्व का संकट खड़ा हो गया है. भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को प्रभारी बनाने के बाद अब चरणजीत चन्नी गुट प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग को हटाने की मांग कर रहा है. पार्टी के सामने जाट सिख और दलित नेतृत्व के बीच संतुलन साधने की चुनौती है. 2022 में कांग्रेस केवल 18 सीटें जीत सकी थी, जबकि 2024 में सात लोकसभा सीटें जीतीं.
कांग्रेस पार्टी के भीतर एक बहुत बड़ा संगठनात्मक फेरबदल देखने को मिला है. पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही अंदरूनी कलह और खींचतान के बीच आलाकमान ने बड़ा फैसला लिया है. पार्टी ने भूपेश बघेल को पंजाब के प्रभारी पद से हटा दिया है और अब उन्हें असम राज्य की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है. भूपेश बघेल की जगह राजस्थान के दिग्गज नेता सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है. यह फैसला पंजाब में पार्टी के आंतरिक विवादों को शांत करने के उद्देश्य से लिया गया माना जा रहा है.
पंजाब में कांग्रेस अंदरूनी कलह से जूझ रही है. चन्नी के नेतृत्व वाले गुट ने वडिंग को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनाए रखने के फैसले का विरोध किया. समर्थकों का कहना है कि चन्नी को विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया जाए.
उत्तराखंड में राहुल गांधी के खिलाफ FIR के विरोध में कांग्रेस 1 सितंबर को सुबह 10:30 बजे सचिवालय तक मार्च करेगी। FIR हल्द्वानी के ‘शुद्धिकरण’ विवाद को लेकर दर्ज हुई है।
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि संवाद करना इस सरकार की फितरत में नहीं है. सचिन पायलट ने कहा कि सरकार का रवैया जिद्दी और अलोकतांत्रिक है. देखें वीडियो.
राजस्थान के पूर्व मंत्री रमेश मीणा ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को 2020 के राजनीतिक संकट के दौरान 10 करोड़ रुपये लेने के आरोप पर नार्को टेस्ट करवाने की चुनौती दी है. मीणा ने कहा कि गहलोत के पास यदि कोई सबूत है तो वे खुद भी नार्को टेस्ट कराएं. उन्होंने आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दिया और कहा कि कांग्रेस मजबूत होने पर ऐसे झूठे आरोप लगाए जाते हैं.
राजस्थान की राजनीति में अशोक गहलोत के पूर्व ओएसडी लोकेश शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं. शर्मा ने कहा कि गहलोत 'भूल जाओ और माफ कर दो' की बात करते हैं, लेकिन खुद मानेसर प्रकरण उठाकर सचिन पायलट को निशाना बनाते रहते हैं. उन्होंने 2020 के राजनीतिक संकट, अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान पर लगाए गए आरोपों तथा कांग्रेस नेतृत्व से जुड़े कई फैसलों पर भी सवाल उठाए.
राजस्थान कांग्रेस में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के रिश्तों को लेकर चर्चा तेज है. गहलोत ने 2022 के घटनाक्रम को लेकर पायलट पर निशाना साधा है, लेकिन सचिन के करीबी सूत्रों का कहना है कि वह इस बार भी जवाबी हमले के बजाय 'चुप्पी' बनाए रखेंगे. इसकी जगह पेपर लीक, महंगाई और BJP सरकार की नाकामियों पर फोकस करेंगे.
अशोक गहलोत के निशाने पर एक बार फिर सचिन पायलट आ गए हैं. लेकिन, इस बार तो अशोक गहलोत ने बीजेपी के बहाने सचिन पायलट और सचिन पायलट के बहाने कांग्रेस नेतृत्व तक को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है - आखिर अशोक गहलोत कौन सा राजनीतिक संदेश देना चाहते हैं?
राजस्थान की सियासत में एक बार फिर से अशोक गहलोत ने सचिन पायलट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस में जब-जब पायलट को कुछ दिए जाने की चर्चा होती है तो गहलोत अपने तेवर में उतर आते हैं. ऐसे में गहलोत के आक्रामक रुख के पीछे क्या शशिकांत शर्मा का हाथ है?
अशोक गहलोत ने मानेसर प्रकरण को लेकर भाजपा के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है. उन्होंने दावा किया कि 25 सितंबर की घटना हाईकमान के खिलाफ विद्रोह नहीं थी, बल्कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने के विरोध में हुई थी.
राजस्थान की राजनीति में कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच की सियासी अदावत एक बार फिर सतह पर आ गई है. इस बार इस अंदरूनी कलह में बीजेपी की एंट्री हुई है.
राजस्थान के झुंझुनूं जिले में NEET 2026 पेपर लीक से आहत होकर सुसाइड करने वाले मेधावी दलित छात्र प्रदीप मेघवाल के घर रविवार को कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट पहुंचे. उन्होंने पीड़ित परिवार का दर्द साझा किया और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला.
NEET परीक्षा 2026 रद्द होने के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है. पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने सरकार की कड़ी आलोचना की है.
अशोक गहलोत ने बीजेपी नेता राधामोहन दास के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अपनी ही पार्टी के नेता सचिन पायलट पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि वह बीजेपी के बहकावे में आ गए थे, लेकिन अब उन्हें अपनी गलती के बारे में पता है.
राजस्थान में कांग्रेस की सियासत सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच बंटी हुई है, लेकिन बुधवार को दिल्ली में दोनों मिले और तस्वीर भी खिंचवाई, लेकिन क्या यही केमिस्ट्री राजस्थान में भी दिखेगी. इनके बीच असल लड़ाई राजस्थान में अगुवाई करने की है.
केरलम के कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट ने आजतक से खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव पर तमाम सवालों के जवाब दिए. सचिन पायलट ने कहा कि केरलम की जनता बदलाव चाहती है. उन्होंने साथ ही बीजेपी और सीपीएम के बीच मिलीभगत का आरोप भी लगाया. देखें वीडियो.