चीन-तुर्की से हथियार मंगाकर, भारत के खिलाफ कैसी साजिश कर रहा है पाकिस्तान

पाकिस्तान में चीन और तुर्की के सैन्य विमानों की आवाजाही तेज हुई है. टीबी2 ड्रोन, लॉयटरिंग म्यूनिशन और उपकरणों की आपूर्ति का दावा किया गया है. भारत के खिलाफ संभावित तैयारियों और क्षेत्रीय प्रभावों पर चर्चा हो रही है.

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ये है तुर्की का बेरक्तार टीबी-2 ड्रोन, जिसे पाकिस्तान को देने की बात की जा रही है. (File Photo: Getty) ये है तुर्की का बेरक्तार टीबी-2 ड्रोन, जिसे पाकिस्तान को देने की बात की जा रही है. (File Photo: Getty)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 24 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:42 PM IST

पाकिस्तान में 18 से 20 अगस्त 2026 के बीच कई चीनी और तुर्की सैन्य कार्गो विमानों की आवाजाही देखी गई. चीनी वाई-20 सैन्य परिवहन विमान नूर खान और मसरूर एयरबेस पर उतरे. उसी समय तुर्की का एयरबस ए400एम इस्तांबुल से मुरीद एयरबेस पहुंचा. तुर्की के सी-130 हरक्यूलिस विमान भी नूर खान और मसरूर पर देखे गए. इन उड़ानों को जोड़कर इस समय सोशल मीडिया और इंटरनेट पर एक एनालिसिस पेश किया जा रहा है, जिसमें कहा गया है कि ये गतिविधियां चुपचाप चल रही तैयारियों यानी सीक्रेट मिशन का हिस्सा हो सकती हैं.  

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ये है तुर्की का एयरबस ए400एम विमान जो मुरीद एयरबेस पहुंचा. (Photo: Getty)

तुर्की से क्या भेजा जाने का दावा?

तुर्की ने अपग्रेडेड बेरक्तार टीबी2 ड्रोन और बेकर यीहा-3 लॉयटरिंग म्यूनिशन की बड़ी खेप भेजी है. इन्हें आमतौर पर बहावलपुर और रावलपिंडी के पास सुविधाओं में रखा जाता है. नया टीबी2टी-एआई वर्जन एआई क्षमताओं वाले तीन नए ऑनबोर्ड कंप्यूटरों से लैस बताया गया है. 

यह 1000 किलोमीटर तक लक्ष्य का पता लगाने, पहचानने और एनालिसिस करने में सक्षम है. इसमें 250 KG पेलोड और 27 घंटे की उड़ान क्षमता है. ब्रॉडबैंड सैटकॉम इंटीग्रेशन से यह लाइन-ऑफ-साइट सीमाओं से परे भी काम कर सकता है.  

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ये है तुर्की का बेरक्तार टीबी2 ड्रोन. (File Photo: Getty)

यीहा-3 अपग्रेडेड वर्जन 6 किलोग्राम तक वॉरहेड ले जा सकता है. इसकी रेंज 200 KM से अधिक और एंड्योरेंस एक घंटे की है. इसे पिकअप ट्रक से स्प्रिंट-लॉन्च किया जा सकता है. इसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम और एआई सहायता वाली गाइडेंस है.  

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सैटेलाइट और गहरे लक्ष्य पर दावा

30 मई 2024 को पाकिस्तान ने चीन के शिचांग सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से पाक सैट-एमएम1 लॉन्च किया था, जो सितंबर 2024 में पूरी तरह चालू हो गया. यह लगभग 38,786 किलोमीटर ऊंचाई पर 38.2 डिग्री ईस्ट ऑर्बिट में है. 

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भारत के साथ किसी संभावित टकराव में पाकिस्तान इस सैटेलाइट को बियॉन्ड लाइन-ऑफ-साइट ड्रोन वॉरफेयर के लिए डेटा हाईवे के रूप में इस्तेमाल कर सकता है. टीबी2टी-एआई में यही क्षमता बताई गई है. दावा है कि सैटकॉम और ड्रोन के मिलने से भारत के अंदरूनी शहरों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है.  

नौसेना और अन्य खतरे का जिक्र

करांची में उतरे तुर्की सी-130 ने संभवतः तुसाश अंका-3 स्टील्थ ड्रोन की आपूर्ति की हो सकती है. यह कम ऊंचाई पर उड़ने वाला ड्रोन नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है. दिसंबर 2025 में तुर्की एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने पाकिस्तान वायुसेना को अंका-3 ऑफर किया था. 

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ये है तुर्की तुसांस अंका ड्रोन जो मिसाइलें भी ले जा सकता है. (Photo: Getty)

इसमें एसओएम-जे एंटी-शिप मिसाइलें हो सकती हैं. यह मिसाइल 0.7 मैक स्पीड पर 1500 किलोग्राम पेलोड के साथ 10 घंटे उड़ सकती है. एयर डिफेंस को भ्रमित करने के लिए सुपर सिमसेक टैक्टिकल ड्रोन भी लॉन्च कर सकता है. भारत की पश्चिमी कमान और समुद्री व्यापार मार्गों पर फोकस का जिक्र है.  

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चीन से क्या भेजे जाने का दावा?

चीनी वाई-20 ने एचक्यू-9 और एचक्यू-16 बैटरियां भेजीं, जो खाड़ी देशों को आगे आपूर्ति के लिए हो सकती हैं. साथ ही जे-10सीई, जेएफ-17 और वीटी-4/अल खालिद टैंकों के लिए अपग्रेडेड उपकरण और स्पेयर पार्ट्स भी भेजे गए होने का दावा है.  

ये है चीन का एचक्यू-16 एयर डिफेंस सिस्टम. (Photo: Getty)

मकसद क्या है पाकिस्तान का?

एनालिसिस दो हिस्सों में बांट गया है. पहला हिस्सा पाकिस्तान को सिंदूर-2 जैसे संभावित टकराव के लिए फिर से हथियार और अपग्रेड से लैस करना बताया गया है. इसमें तुर्की और चीन दोनों का सैटकॉम व एआई सपोर्ट शामिल है. तुर्की अपने नए उपकरण टेस्ट करना चाहता है, जबकि चीन पाकिस्तान के जरिए भारतीय युद्ध रणनीति पर एआई को ट्रेन करना चाहता है. चूंकि चीन का भारत से हिमालयी सीमा है, इसलिए ऊंचे इलाकों में टकराव की संभावना जताई गई है ताकि चीनी एआई भारतीय पहाड़ी युद्ध की रणनीति सीख सके.  

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दूसरा हिस्सा खाड़ी रक्षा बाजार का हिस्सा हथियाना बताया गया है. अमेरिका की एयर डिफेंस और मिसाइल स्टॉक कम होने के दावे के बीच तुर्की और चीन इसका फायदा उठाना चाहते हैं. पाकिस्तान-सऊदी-तुर्की त्रिपक्षीय समझौते के बाद चीन पाकिस्तान के जरिए अपने रक्षा उत्पाद बेच रहा है. कारण यह है कि पाकिस्तान समझौते का साझेदार है और ऑपरेशन सिंदूर में HQ-9 व HQ-16 के प्रदर्शन का गढ़ा डेटा दुनिया भर में फैला रहा है.  

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ये है तुर्की का सुपर सिमसेक टैक्टिकल ड्रोन. (Photo: Getty)

पाकिस्तान सेना की मंशा पर दावा

बलूचिस्तान, पीओजेके और खैबर में चल रहे आंतरिक संकट ने पाकिस्तान की स्थिरता को नुकसान पहुंचाया है. भारत के साथ टकराव से तीन मौके मिल सकते हैं...

  • चीन और तुर्की के हथियार खाड़ी और लीबिया के हफ्तर को बेचकर हथियार व्यापारी बनना.
  • भारत की महंगी प्रणालियों के खिलाफ बिना टेस्ट किए हथियार आजमाना.
  • इंटरनल इमरजेंसी लगाकर आंतरिक संघर्षों को दबाना. 

इसमें आसिम मुनीर के सत्ता में आने या नेताओं को बदलने की संभावना भी जताई गई है. ये सभी दावे फ्लाइट ट्रैकिंग, हथियार क्षमताओं और रणनीतिक अनुमानों पर आधारित एनालिसिस हैं. वास्तविक सप्लाई, इरादे और प्रभाव की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं है. भारत के लिए यह स्थिति सतर्कता बरतने का संकेत हो सकती है, लेकिन ऐसी रिपोर्ट्स को सत्यापित स्रोतों के साथ देखना जरूरी है.  

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