दुनिया की सबसे बड़ी AI चिप कंपनी Nvidia लगातार ऐसे अनाउंसमेंट्स करता है जिससे एआई वर्ल्ड में हलचल मच जाती है. कंपनी ने AI की रेस को और दिलचस्प बना दिया है. एनवीडिया दरअसल AI स्टार्टअप Poolside के साथ करीब 7 अरब डॉलर का बड़ा सौदा कर रही है. इसमें 6 अरब डॉलर पूलसाइड की AI टेक्नोलॉजी को लाइसेंस करने पर खर्च किए जाएंगे, जबकि एनवीडिया कंपनी में 1 अरब डॉलर का निवेश भी करेगी.
एनवीडिया का यह कदम ऐसे समय में आया है जब चीन की DeepSeek, Kimi और दूसरी कंपनियों ने अमेरिका की AI इंडस्ट्री की चिंता बढ़ा दी है. खासकर चीन के ओपन-वेट AI मॉडल तेजी से लोकप्रिय हुए हैं. इन्हें डेवलपर डाउनलोड कर सकते हैं, अपने हिसाब से बदल सकते हैं और अलग-अलग काम के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. अमेरिका की बड़ी AI कंपनियां लंबे समय तक ऐसे मॉडल के बजाय बंद सिस्टम पर ज्यादा फोकस करती रही हैं. अब एनवीडिया इसी खाली जगह को भरना चाहती है.
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6 अरब डॉलर देकर खरीदा क्या?
Poolside के फाउंडर कंपनी के साथ बने रहेंगे. एनवीडिया पूलसाइड की उस टेक्नोलॉजी का लाइसेंस ले रही है, जिसका इस्तेमाल AI मॉडल बनाने के लिए किया जाता है. इसे पूसलाइड ने अपना मॉडल फैक्ट्री बताया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक एनवीडिया 100 से ज्यादा पूलसाइड इंजीनियर्स को भी अपने साथ जोड़ सकती है. ये इंजीनियर्स एनवीडिया के AI मॉडल प्रोजेक्ट Nemotron पर काम करेंगे.
यानी एनवीडिया ने एक तरह से सिर्फ AI मॉडल नहीं खरीदा, बल्कि उसे बनाने वाली टेक्नोलॉजी और उसके पीछे काम करने वाले बड़े टैलेंट को अपने AI मिशन में शामिल कर लिया.
एनवीडिया का अगला दांव नेमोट्रॉन है
एनवीडिया पहले से ही नेमोट्रॉन नाम से अपने ओपन-वेट AI मॉडल तैयार कर रही है. हाल ही में कंपनी ने Nemotron 3.5 Lightning लॉन्च किया है. एनवीडिया के मुताबिक यह मॉडल लंबे समय तक काम करने वाले AI एजेंट्स और दूसरे खास AI कामों के लिए बनाया गया है. कंपनी ने इसके मॉडल वेट्स, ट्रेनिंग डेटा और दूसरे जरूरी संसाधन भी खुले तौर पर उपलब्ध कराए हैं, ताकि डेवलपर इसे अपने हिसाब से बदल सकें.
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अब पूलासाइड की टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग टैलेंट मिलने के बाद एनवीडिया इस प्रोजेक्ट को और तेजी से आगे बढ़ा सकती है. Wall Street Journal की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी का लक्ष्य अगले एक साल के आसपास ऐसा नेमोट्रॉन मॉडल तैयार करना है, जो दुनिया के सबसे पावरफुल AI मॉडल्स को चुनौती दे सके.
DeepSeek फिर से सुर्खियों में
जनवरी 2025 में DeepSeek के कम लागत वाले ओपन-वेट मॉडल ने पूरी दुनिया की टेक इंडस्ट्री का ध्यान खींचा था. उसके बाद चीन से Kimi, GLM और कई दूसरे मॉडल सामने आए. इन कंपनियों ने दिखाया कि ताकतवर AI सिर्फ अमेरिका की कुछ बड़ी कंपनियों तक लिमिटेड नहीं रहेगा. बता दें कि अमेरिकी कंपनी एनवीडिया के हाई एंड एआई चिपसेट चीन या दूसरे देशों में नहीं भेजे जा सकते, सरकार ने बैन लगा रखा है. ऐसे में चीन के AI मॉडल तेजी से बेहतर हुए और उनकी पहुंच भी बढ़ी.
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यही एनवीडिया के लिए बड़ा मौका भी है और चुनौती भी. अगर दुनिया भर के डेेवेलपर और कंपनियां चीनी ओपन-वेट मॉडल इस्तेमाल करने लगती हैं, तो अमेरिका का AI इकोसिस्टम उस क्षेत्र में पीछे छूट सकता है. एनवीडिया के CEO Jensen Huang पहले भी कह चुके हैं कि अमेरिका की AI लीडरशिप सिर्फ एक सबसे पावरफुल मॉडल से तय नहीं होगी, बल्कि इस बात से होगी कि अमेरिका एक मजबूत और खुला AI इकोसिस्टम बना पाता है या नहीं.
OpenAI को चिप भी बेचेंगे, खुद उससे मुकाबला भी करेंगे?
एनवीडिया आज OpenAI और Anthropic जैसी बड़ी AI कंपनियों की सबसे अहम टेक पार्टनर्स में शामिल है. इन कंपनियों को AI मॉडल ट्रेन करने के लिए बड़े पैमाने पर एनवीडिया के GPU और कंप्यूटिंग सिस्टम की जरूरत होती है. लेकिन नेमोट्रॉ को आगे बढ़ाकर एनवीडिया खुद AI मॉडल की दुनिया में भी मजबूत खिलाड़ी बन रही है.
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इसका मतलब यह हुआ कि एनवीडिया एक तरफ AI कंपनियों को अपनी चिप और सिस्टम बेच रही है, वहीं दूसरी तरफ अपना AI मॉडल भी तैयार कर रही है. यह OpenAI या Anthropic के साथ सीधी टक्कर हो, यह कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना साफ है कि एनवीडिया अब AI की अगली रेस में सिर्फ हार्डवेयर सप्लायर नहीं रहना चाहता.
पूलसाइड के लिए यह डील क्यों जरूरी थी?
पूलसाइड एक समय AI मॉडल बनाने के लिए भारी मात्रा में कंप्यूटिंग कैपेसिटी जुटाने की कोशिश कर रही थी. कंपनी के सामने बड़ी चुनौती यह थी कि सबसे बड़े AI मॉडल बनाने के लिए हजारों की संख्या में महंगे GPU और विशाल डेटा सेंटर की जरूरत पड़ती है. पूलसाइड के शेयरहोल्डर्स को भेजे गए लेटर्स के मुताबिक कंपनी पिछले साल एक बड़े फंडिंग प्रयास में जरूरी रकम जुटाने में सफल नहीं हुई थी और उसे कंप्यूटिंग क्षमता को लेकर मुश्किलों का सामना करना पड़ा. एनवीडिया के साथ डील ने पूलसाइड को इस दबाव से निकलने का रास्ता दिया.
यही इस डील का एक बड़ा ट्विस्ट भी है. Nvidia सिर्फ AI कंपनियों को चिप बेचकर पैसा नहीं कमा रही. अब वह उन कंपनियों में निवेश कर रही है, उनकी टेक्नोलॉजी को लाइसेंस कर रही है, इंजीनियरों को अपने साथ जोड़ रही है और AI के पूरे इकोसिस्टम में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है.